आगरा में परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा अनोखा विवाद; पत्नी बोली- ‘रोजाना बस में धक्के खाती हूँ, साथ नहीं रहना

आगरा, उत्तर प्रदेश: आगरा में पति-पत्नी के बीच एक अजीबोगरीब विवाद सामने आया, जो स्कूटी खरीदने की मांग से शुरू होकर सीधे परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंच गया। पत्नी की नाराज़गी की वजह यह थी कि पति उसे ऑफिस आने-जाने के लिए एक्टिवा स्कूटी नहीं दिला रहा था, जिसके चलते उसे रोज़ाना ऑटो और बस की धक्का-मुक्की झेलनी पड़ रही थी।

धक्का-मुक्की नहीं झेलनी”: पत्नी की शिकायत

आगरा के कागारौल क्षेत्र की रहने वाली यह युवती, जिसकी शादी 2022 में झांसी के एक युवक से हुई थी, दोनों ही प्राइवेट जॉब करते हैं। नौकरी फिर से शुरू करने के बाद, युवती को रोज़ाना यात्रा में भारी परेशानी होने लगी।

युवती ने अपनी शिकायत में कहा, “मुझे घर से ऑफिस आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है। रोजाना ऑटो और बस में धक्का-मुक्की झेलनी पड़ती है। मैंने पति से एक्टिवा दिलाने को कहा था, लेकिन एक साल तक नहीं दिलाई। मुझे अब उनके साथ नहीं रहना है।

“पति के वादे पूरे न करने पर विवाद इतना बढ़ गया कि मार्च 2025 में पत्नी अपने बच्चे के साथ मायके चली गई और पति को छोड़कर 6 महीने तक वहीं रही। जब बात नहीं बनी तो मामला पुलिस तक पहुंचा, जिसने इसे सुलह के लिए परिवार परामर्श केंद्र भेज दिया।

काउंसलिंग में हुआ ‘स्कूटी-समझौता’

शनिवार (25 अक्टूबर) को परिवार परामर्श केंद्र में पति-पत्नी की काउंसलिंग की गई। काउंसलर्स ने दोनों की परेशानियाँ सुनीं और उन्हें वैवाहिक जीवन में समझदारी और संवाद के महत्व के बारे में समझाया।

काउंसलिंग के बाद, आखिरकार पति अपनी पत्नी की मांग पूरी करने को तैयार हो गया। उसने कहा, “मैं तुम्हें एक्टिवा दिला दूंगा, अब घर चलो।” पति की ओर से स्कूटी दिलाने का वादा सुनते ही पत्नी की नाराज़गी तुरंत खत्म हो गई और वह खुशी-खुशी पति के साथ घर जाने के लिए राजी हो गई। इस ‘स्कूटी-समझौते’ के साथ ही टूटा हुआ परिवार फिर से जुड़ गया।

16 दंपतियों का हुआ समझौता

परिवार परामर्श केंद्र में शनिवार को कुल 96 दंपतियों की काउंसिलिंग की गई। इनमें से 16 मामलों में समझौता कराया गया, जबकि 20 फाइलें बंद की गईं। काउंसलर्स ने इस दौरान यह संदेश दिया कि वैवाहिक जीवन में खुशहाली तभी आती है जब पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे की जरूरतों, विशेषकर कामकाजी महिलाओं की परेशानियों को समझते हैं। काउंसलिंग में आए अधिकांश मामले घर की छोटी-छोटी समस्याओं से जुड़े थे, जिन्हें सहानुभूति और समझदारी से हल किया जा सकता है।