
हर पांचवां बच्चा गंभीर पेट रोग की चपेट में; फास्ट फूड के शौकीनों की आंतों में मिल रहा संक्रमण और अल्सर
आगरा। आधुनिक जीवनशैली और जीभ के स्वाद का चस्का अब बच्चों की जान का दुश्मन बनता जा रहा है। हाल ही में अमरोहा की 16 वर्षीय किशोरी अहाना की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, जिसकी वजह मोमोज और चाऊमीन जैसे फास्ट फूड बने। ताजनगरी आगरा में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है। एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) के बाल रोग विभाग में आने वाला हर पांचवां बच्चा अब पेट की गंभीर बीमारियों से पीड़ित मिल रहा है।
ओपीडी के आंकड़े खोल रहे पोल
एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. नीरज यादव ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 220 बच्चे इलाज के लिए आते हैं। इनमें से लगभग 20 प्रतिशत बच्चे पेट में दर्द, सूजन, अपच और भूख न लगने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इनमें से 12 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनकी दिनचर्या में बाजार का फास्ट फूड और जंक फूड गहराई से शामिल है। सबसे डराने वाली बात यह है कि 3 प्रतिशत बच्चों की स्थिति इतनी गंभीर पाई गई कि उन्हें सर्जरी तक की सलाह देनी पड़ रही है।
क्यों जानलेवा बन रहा है फास्ट फूड?
पूछताछ में सामने आया कि बीमार होने वाले अधिकांश बच्चे सप्ताह में 3 से 5 दिन बाहर का खाना खाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, फास्ट फूड को आकर्षक और स्वादिष्ट बनाने के लिए इनमें भारी मात्रा में सिंथेटिक रंग (Synthetic Colors) और हानिकारक रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। मैदा पेट की आंतों में चिपक जाता है, जिससे संक्रमण फैलता है। लंबे समय तक इसके सेवन से आंतों में अल्सर, नसों में खिंचाव और पीलिया जैसी बीमारियां जन्म ले रही हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी और इम्युनिटी का संकट
इंडियन पीडियाट्रिक एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अरुण जैन और पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र त्यागी का कहना है कि फाइबर युक्त भोजन की कमी से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) तेजी से घट रही है। बाजार की चटनी और सॉस में इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स बच्चों के पाचन तंत्र को अंदर से खोखला कर रहे हैं। पौष्टिक आहार न लेने के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार भी हो रहे हैं।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
चिकित्सकों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान दें:
घर का विकल्प: बच्चों को हरी सब्जियां और फल खाने के लिए प्रेरित करें। बाजार जैसी चीजें घर पर ही शुद्ध सामग्री से तैयार करें।
स्कूल कैंटीन पर सख्ती: स्कूलों को अपनी कैंटीन में जंक फूड की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए।
जांच की जरूरत: प्रशासन और खाद्य विभाग को सड़कों पर बिकने वाले फास्ट फूड की गुणवत्ता की नियमित सैंपलिंग करनी चाहिए।समय रहते सचेत होना जरूरी है, अन्यथा स्वाद की यह आदत बच्चों के भविष्य को अंधकार में डाल सकती है।




