आगरा। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाने की सरकार की मंशा पर पानी फेरने वाले स्कूलों के खिलाफ आगरा प्रशासन ने अब आर-पार की जंग छेड़ दी है। अक्सर देखा जाता है कि आरटीई के तहत लॉटरी में नाम आने के बावजूद कई निजी स्कूल बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करते हैं या तकनीकी बहाने बनाकर उन्हें वापस भेज देते हैं। लेकिन इस बार आगरा के जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (BSA) जितेंद्र कुमार गोंड ने साफ कर दिया है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले स्कूलों को बख्शा नहीं जाएगा।

​स्पेशल टास्क फोर्स का गठन: अब सीधे ग्राउंड पर होगी निगरानी

​प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए बीएसए ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टास्क फोर्स जिले के उन स्कूलों पर पैनी नजर रखेगी जो चयनित बच्चों को प्रवेश देने में अड़चनें पैदा कर रहे हैं।

​इस टास्क फोर्स में शिक्षा विभाग के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • रंजन गुप्ता: खंड शिक्षा अधिकारी, बिचपुरी
  • महेश कुमार: खंड शिक्षा अधिकारी, बरौली अहीर
  • अमरनाथ: खंड शिक्षा अधिकारी, बाह

​यह टीम न केवल शिकायतों की जांच करेगी, बल्कि औचक निरीक्षण के जरिए यह भी सुनिश्चित करेगी कि आरटीई कोटे की सीटों पर पात्र बच्चों को ही दाखिला मिले।

​’पहले समझाएंगे, नहीं माने तो रद्द होगी मान्यता’

​खंड शिक्षा अधिकारी रंजन गुप्ता ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि विभाग की पहली प्राथमिकता संवाद और समन्वय है। यदि कोई स्कूल प्रबंधन प्रवेश प्रक्रिया में लापरवाही बरतता है, तो पहले उन्हें नियमावली और उनके नैतिक दायित्वों के बारे में समझाया जाएगा।

​हालांकि, यदि इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन के अड़ियल रवैये में सुधार नहीं आता है और वे बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने से इनकार करते हैं, तो टास्क फोर्स सीधे अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की संस्तुति की जाएगी। यह कदम उन स्कूलों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो शिक्षा को सेवा के बजाय केवल व्यापार की दृष्टि से देखते हैं।

​अभिभावकों के लिए राहत: आरटीई सेल में करें सीधा संपर्क

​अक्सर अभिभावक स्कूलों के चक्कर लगाकर थक जाते हैं और उन्हें यह समझ नहीं आता कि शिकायत कहाँ करें। इसे ध्यान में रखते हुए बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि वे किसी भी समस्या की स्थिति में सीधे आरटीई सेल (RTE Cell) से संपर्क कर सकते हैं।

​वहाँ उनकी शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाएगा। आरटीई सेल और टास्क फोर्स का साझा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले में चयनित एक भी बच्चा शिक्षा के अपने मौलिक अधिकार से वंचित न रहे। विभाग का लक्ष्य इस वर्ष शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करना है।

​शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) क्यों है महत्वपूर्ण?

​आरटीई एक्ट 2009 के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इन बच्चों की फीस का पुनर्भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। आगरा जैसे शहरों में, जहाँ निजी स्कूलों की फीस आसमान छू रही है, यह कानून हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एकमात्र किरण है। यदि स्कूल इस कानून का पालन नहीं करते हैं, तो यह न केवल कानूनी उल्लंघन है बल्कि उन बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है।

​निष्कर्ष: क्या सुधरेगी निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली?

​प्रशासन की इस सख्ती ने निजी स्कूलों के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। टास्क फोर्स का गठन एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोषी स्कूलों पर कार्रवाई कितनी तेजी से होती है। आगरा के शिक्षा विभाग ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है—शिक्षा के अधिकार का सम्मान हर हाल में करना होगा।

पाठकों के लिए प्रश्न: क्या आपको लगता है कि टास्क फोर्स के गठन से निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें।