शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून का मकसद हर गरीब बच्चे को बड़े निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाना है। ताजनगरी आगरा में इस योजना का विस्तार तो हो रहा है, कागजों पर सीटें भी बढ़ रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पिछले सत्र के आंकड़े चौंकाने वाले हैं—हजारों आवेदन आए, सीटें भी खाली रहीं, लेकिन फिर भी बहुत से नौनिहालों को स्कूल की दहलीज नसीब नहीं हुई। आखिर व्यवस्था में चूक कहां हो रही है?​

सीटें बढ़ीं पर खाली रह गए हाथ: पिछले सत्र का लेखा-जोखा

​सत्र 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो आगरा जिले में आरटीई के तहत 1,760 स्कूलों को पंजीकृत किया गया था। इन स्कूलों में कुल 16,023 सीटें उपलब्ध थीं। संख्या के लिहाज से यह एक बड़ा अवसर था, लेकिन जब परिणामों की बारी आई तो तस्वीर धुंधली नजर आई।​

कुल 13,759 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से जांच के दौरान 2,115 आवेदन निरस्त कर दिए गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पात्र पाए गए बच्चों में से भी 4,973 बच्चों को कोई सीट आवंटित नहीं हो सकी। यानी एक तरफ सीटें खाली थीं और दूसरी तरफ बच्चे प्रवेश के लिए कतार में थे।​

क्यों नहीं मिल पा रहा प्रवेश? बीएसए ने बताई बड़ी वजह​

जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (BSA) जितेंद्र कुमार गोंड ने इस विसंगति के पीछे एक तकनीकी और व्यवहारिक कारण बताया है। उनके अनुसार, समस्या ‘चॉइस फिलिंग’ यानी स्कूलों के चयन में है।​

“अभिभावक अक्सर ऑनलाइन आवेदन करते समय केवल कुछ चुनिंदा और नामी स्कूलों के नाम ही भरते हैं। चूंकि लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह सॉफ्टवेयर आधारित है, इसलिए सिस्टम एक बच्चे को उसकी वरीयता के आधार पर केवल एक ही स्कूल आवंटित करता है। यदि उन चुनिंदा स्कूलों में सीटें भर जाती हैं, तो बच्चा आवंटन से बाहर हो जाता है, भले ही पड़ोस के दूसरे स्कूल में सीटें खाली क्यों न हों।

“​इसके अलावा, जिन 6,671 बच्चों को स्कूल आवंटित हुए थे, उनमें से भी केवल 5,354 बच्चों ने ही वास्तव में प्रवेश लिया। बाकी बच्चों का प्रवेश न हो पाना भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।​

सत्र 2026-27: क्या इस बार बदलेंगे हालात?​

विगत वर्षों की कमियों से सबक लेते हुए विभाग अब नए सत्र (2026-27) की तैयारियों में जुट गया है। इस बार आरटीई का दायरा और अधिक बढ़ाया गया है।

​स्कूलों की संख्या: अब 1,760 से बढ़कर 2,054 स्कूल योजना का हिस्सा होंगे।

​सीटों की उपलब्धता: कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 18,756 कर दी गई है।​

मौजूदा स्थिति: प्रथम चरण के लिए अब तक 4,525 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।​

प्रशासन की कोशिश है कि इस बार अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा तकनीकी कारणों से पीछे न छूटे।​

आवेदन करते समय अभिभावक न करें ये गलतियां

अगर आप अपने बच्चे का दाखिला आरटीई के तहत कराना चाहते हैं, तो शिक्षा विभाग ने कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:

​स्कूलों की लंबी सूची: केवल एक या दो नामी स्कूलों के भरोसे न रहें। अपने निवास क्षेत्र के आसपास उपलब्ध अधिक से अधिक स्कूलों के विकल्प भरें।

​दस्तावेजों की शुद्धता: आवेदन निरस्त होने का सबसे बड़ा कारण आय प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र में त्रुटि होना है। सुनिश्चित करें कि सभी दस्तावेज वैध और अपडेटेड हों।​

दूरी का ध्यान रखें: आरटीई के तहत प्राथमिकता उन्हीं बच्चों को मिलती है जो स्कूल के पड़ोस (Neighborhood) में रहते हैं।​

निष्कर्ष: :-क्या केवल सीटें बढ़ाना ही काफी है?​

शिक्षा का अधिकार कानून का सफल क्रियान्वयन केवल सीटों की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और सुलभ प्रक्रिया से संभव है। आगरा के आंकड़े बताते हैं कि जागरूकता की कमी और ऑनलाइन प्रक्रिया की जटिलता कहीं न कहीं गरीब परिवारों के आड़े आ रही है। प्रशासन को चाहिए कि वे वार्ड स्तर पर कैंप लगाकर अभिभावकों को फॉर्म भरने की सही प्रक्रिया समझाएं।