
आगरा में पानी का संकट दूर करने के लिए बांध की मांग, सिविल सोसाइटी ने आईआईटी रुड़की से सर्वे कराने का अनुरोध किया
आगरा: आगरा के फतेहाबाद तहसील के रेहावली और बाह के रीठे गांव के बीच उटंगन नदी पर प्रस्तावित बांध परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। आगरा की सिविल सोसाइटी ने इस महत्वपूर्ण जल संचय योजना के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी इस परियोजना को लेकर उदासीनता दिखा रहे हैं, इसलिए इसका सर्वे आईआईटी रुड़की या किसी बाहरी एजेंसी से करवाया जाना चाहिए। पिछले चार सालों से यह मांग उठाई जा रही है, लेकिन आगरा कैनाल लोअर खंड के अधिकारी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
क्यों है रेहावली बांध जरूरी?
उटंगन नदी का विशाल जल प्रवाह, जो हर साल व्यर्थ बह जाता है, इस परियोजना को बेहद अहम बनाता है। यह नदी जयपुर की बैराठ पहाड़ियों से निकलकर 288 किलोमीटर का सफर तय करती है और फतेहाबाद के रेहावली में यमुना में मिल जाती है। मानसून के दौरान, इस नदी में लगभग 6 अरब घन मीटर पानी बहता है, जिसे बिना रोके बह जाने दिया जाता है। इस पानी को रोककर जमा करने से आगरा और आसपास के क्षेत्रों में कई समस्याओं का समाधान हो सकता है।
भूजल स्तर में सुधार: आगरा के कई ब्लॉक जैसे पिनाहट, शमसाबाद, राजाखेड़ा, बरौली अहीर और बाह में भूजल स्तर बहुत नीचे जा चुका है। हैंडपंप सूख गए हैं और नए लगाने पर भी रोक है। रेहावली बांध बनने से इन अति-दोहित क्षेत्रों में भूजल स्तर फिर से ऊपर आ सकता है।
पेयजल की समस्या का समाधान: बांध का पानी भूजल को रिचार्ज करेगा, जिससे पीने के पानी की समस्या भी कम होगी। शमसाबाद और फतेहाबाद कस्बों के साथ-साथ फतेहाबाद रोड पर स्थित होटल कॉम्प्लेक्स को भी पानी मिल सकता है।
पर्यावरण लाभ: जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया के अनुसार, इस बांध से भूजल स्तर सुधरने के साथ-साथ बटेश्वर तीर्थ क्षेत्र में यमुना नदी का प्रदूषण भी कम होगा।
सिंचाई विभाग की उदासीनता और सिविल सोसाइटी के तर्क
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी इस परियोजना को लेकर बहाने बना रहे हैं। उन्होंने ड्रोन मैपिंग में जल समृद्धि दिखने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। वे कभी चेकडैम की बात करते हैं, तो कभी नहर की बाध्यता का हवाला देते हैं। सिविल सोसाइटी का तर्क है कि देश में कई ऐसे बांध और बैराज हैं, जो नहरों को पोषित नहीं करते, फिर भी जल संचय के लिए बनाए गए हैं। लखनऊ में गोमती नदी पर बना रबर डैम इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।
यह भी सामने आया है कि उटंगन एक अंतर-राज्यीय (Inter-state) नदी होने के बावजूद, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने राजस्थान सरकार से कोई पत्राचार नहीं किया है, जिससे विभाग की लापरवाही साफ दिखती है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने भी दिया समर्थन
हाल ही में, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने जल संचय की इस योजना को अपना समर्थन दिया। उन्होंने सिविल सोसाइटी के पदाधिकारियों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई। उन्होंने माना कि यह बांध आगरा के लिए फायदेमंद होगा।
आगे क्या? सिविल सोसाइटी ने जिला पंचायत अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि सिंचाई विभाग द्वारा दी जा रही जानकारी अधूरी और भ्रामक है। उन्होंने मांग की है कि सिरौली और वोकोली हेडवर्क्स के डाउन में मौजूद सभी आंकड़े मंगवाए जाएं और इस महत्वपूर्ण परियोजना का वैज्ञानिक अध्ययन आईआईटी रुड़की से करवाया जाए। यह कदम आगरा के पानी के संकट को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत हो सकता है।




