पीड़ितों को भटकाने वाले पुलिसकर्मियों की अब खैर नहीं; संपत्ति जब्त करने और IGRS की जांच में तेजी लाने के भी आदेश

आगरा। थाने आने वाले पीड़ितों की अनदेखी और सीमा विवाद में फंसाकर उन्हें वापस लौटाने की बढ़ती शिकायतों पर पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। पाक्षिक अपराध गोष्ठी (मासिक क्राइम मीटिंग) में उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘जीरो एफआईआर’ (Zero FIR) दर्ज करने के मामलों में तत्काल कार्रवाई की जाए।

पुलिस आयुक्त ने चेतावनी दी कि यदि इन निर्देशों के पालन में कोई लापरवाही बरती गई, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद उसे आगे की जांच के लिए संबंधित थाने में शीघ्र ट्रांसफर किया जाए।

प्रमुख निर्देश और प्राथमिकताएं: शिकायतों के त्वरित निवारण पर जोर

पुलिस आयुक्त ने गोष्ठी में कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी जोर दिया, जिनका उद्देश्य पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और सक्रिय बनाना है:

शिकायतों की सुनवाई: थाने में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की शिकायत गंभीरता से सुनी जाए और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

गैंगस्टरों पर शिकंजा: गैंगस्टर एक्ट के तहत वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी में तेजी लाई जाए।

संपत्ति जब्तीकरण: धारा 14(1) के तहत गैंगस्टरों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। इसके अलावा, धारा 107 बीएनएसएस (BNSS) के तहत चिह्नित अपराधियों की संपत्ति भी जब्त करने के निर्देश दिए गए।

IGRS जांच में पारदर्शिता: आईजीआरएस (Integrated Grievance Redressal System) के प्रार्थना पत्रों की जांच में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच अधिकारी अनिवार्य रूप से मौके पर जाकर सत्यापन करें, न कि थाने में बैठकर।

महिला सुरक्षा: एंटी रोमियो टीम को सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों और कॉलेजों के आसपास नियमित रूप से सक्रिय रखा जाए। *

शीघ्र न्याय: फास्ट ट्रैक कोर्ट में महिला संबंधी मामलों का शीघ्र निवारण सुनिश्चित किया जाए।

पुलिस आयुक्त के ये कड़े निर्देश स्पष्ट करते हैं कि अब जनसुनवाई और त्वरित कार्रवाई आगरा पुलिस की शीर्ष प्राथमिकता होगी।