
वाइल्डलाइफ एसओएस के केंद्रों में सांता बनकर पहुंचे केयरटेकर्स, उपहारों और फलों की दावत पाकर खिले बेजुबानों के चेहरे
मथुरा/आगरा:क्रिसमस का त्योहार सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों के लिए भी खुशियों की सौगात लेकर आया। वाइल्डलाइफ एसओएस (Wildlife SOS) द्वारा संचालित आगरा और मथुरा के संरक्षण केंद्रों में इस बार ‘बचाए गए’ हाथियों और भालुओं के लिए क्रिसमस बेहद खास रहा। लाल और सफेद रंगों के उत्सव में लिपटे इन केंद्रों में जानवरों और उनके देखभाल करने वालों (केयरटेकर्स) के बीच प्यार का एक अद्भुत बंधन देखने को मिला।
हाथियों के लिए सजी फलों की विशेष थाली
मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में नजारा किसी उत्सव जैसा था। यहाँ रहने वाली हथिनी माया, फूलकली, एम्मा, तारा और सूरज ने अपनी शाम की सैर के दौरान क्रिसमस की मस्ती में हिस्सा लिया। हाथियों के लिए विशेष रूप से रंग-बिरंगे फलों की दावत तैयार की गई थी।
इतना ही नहीं, हाथियों के अस्पताल परिसर में रह रही नन्हीं हथिनी बानी को भी विशेष उपहार दिए गए। सजे हुए ‘सरप्राइज बॉक्स’ में रखे उनके पसंदीदा पौष्टिक खाद्य पदार्थों को पाकर हाथियों का उत्साह देखते ही बनता था। ये गतिविधियाँ न केवल मनोरंजन के लिए थीं, बल्कि हाथियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को ध्यान में रखकर तैयार की गई थीं।
स्लॉथ भालुओं की ‘हनी’ और ‘पॉपकॉर्न’ पार्टी

दूसरी ओर, आगरा भालू संरक्षण केंद्र में रहने वाले स्लॉथ भालू—मोगली, रॉन, मौली, डिजिट, गंभीर और वाल्मीकि—भी पीछे नहीं रहे। उनके बाड़ों को घंटों और सितारों से सजाया गया था। जब केयरटेकर्स सांता क्लॉज़ की पोशाक में उनके पास पहुँचे, तो भालुओं की जिज्ञासा चरम पर थी।
इन भालुओं के लिए रहस्यमयी बक्से रखे गए थे जिनमें शहद, खजूर, नारियल और पॉपकॉर्न भरे थे। शहद की महक ने भालुओं को अपनी ओर आकर्षित किया, जिससे उनकी प्राकृतिक भोजन खोजने की प्रवृत्ति (foraging behavior) को बढ़ावा मिला।
“त्योहारी गतिविधियों के माध्यम से हम बचाए गए जानवरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ उनके लिए एक स्नेहपूर्ण वातावरण भी तैयार कर पाते हैं। यह जिम्मेदार पशु देखभाल का ही एक विस्तार है।” > कार्तिक सत्यनारायण, सह-संस्थापक और सीईओ, वाइल्डलाइफ
एसओएस> सेवा और समर्पण का संगम
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने बताया कि यह जश्न जितना जानवरों के लिए है, उतना ही उन केयरटेकर्स के लिए भी है जो दिन-रात इनकी सेवा करते हैं। वहीं, डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की संवर्धन-आधारित देखभाल (enrichment care) से जानवरों को सुरक्षित और तनावमुक्त महसूस कराया जाता है।
इन केंद्रों में बिताया गया यह दिन यह याद दिलाता है कि दया और प्रेम की कोई भाषा नहीं होती, और हर जीव उत्सव का हकदार है।




