समाज से कटी हुई थीं राधा और जिया; पड़ोसियों का दावा- मानसिक बीमारी के बावजूद डॉक्टरी इलाज के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया गया।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ दो सगी बहनों, राधा (27) और जिया (24) ने अपने बीमार पालतू कुत्ते ‘टोनी’ के गम में फिनायल पीकर आत्महत्या कर ली। लेकिन इस दुखद अंत के पीछे की कहानी सिर्फ एक पालतू जानवर का प्रेम नहीं, बल्कि सालों से चलता आ रहा मानसिक अवसाद (Depression) और जागरूकता की कमी है।

टोनी को भगाना मत, उसका ख्याल रखना’

आखिरी शब्द24 दिसंबर की शाम, माँ गुलाबा देवी ने अपनी दोनों बेटियों को सामान लेने दुकान भेजा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि दोनों बहनें मौत का सामान लेने जा रही हैं। घर लौटकर उन्होंने माँ से जो कहा, उसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने फिनायल पी लिया है और आखिरी इच्छा के रूप में कहा— “टोनी को घर से भगाना मत, उसका इलाज जारी रखना।

“अस्पताल ले जाते समय राधा ने रास्ते में दम तोड़ दिया, जबकि जिया की मौत इलाज के दौरान हुई। गुरुवार शाम दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

अंधविश्वास की भेंट चढ़ीं दो ज़िंदगियाँ

स्थानीय लोगों और पड़ोसियों से बातचीत में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि दोनों बहनें पिछले 6 साल से मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं। वे न तो किसी से बात करती थीं और न ही सोशल मीडिया या फोन का इस्तेमाल करती थीं।

परिजनों और पड़ोसियों के अनुसार: इलाज की जगह झाड़-फूंक: परिवार को लगा कि बेटियों पर ‘भूत-प्रेत’ का साया है। इसके लिए उन्हें कई बार बालाजी और अन्य जगहों पर झाड़-फूंक के लिए ले जाया गया, लेकिन पेशेवर मनोचिकित्सक की मदद नहीं ली गई।

सामाजिक अलगाव: दोनों बहनें खुद को कमरे में बंद रखती थीं। मोहल्ले के लड़कों से अक्सर उनका विवाद होता था और उन्होंने समाज से पूरी तरह दूरी बना ली थी।

डॉग से गहरा लगाव: उनका संसार उनके जर्मन शेफर्ड ‘टोनी’ तक सीमित था। वे अपना खाना अलग बनाती थीं और टोनी के भूखे रहने पर खुद भी खाना छोड़ देती थीं।

क्या कहता है प्रशासन?

पारा थाना प्रभारी सुरेश सिंह के मुताबिक, शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। फिलहाल विसरा सुरक्षित रखा गया है ताकि मौत के सटीक कारणों और रसायनों की पुष्टि हो सके। पुलिस परिवार के बयानों और मेडिकल हिस्ट्री की जांच कर रही है।

एक्सपर्ट राय: मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना घातक

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। जब कोई व्यक्ति समाज से कटने लगे, अत्यधिक चुप रहने लगे या किसी एक चीज पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो जाए, तो यह गहरे डिप्रेशन के संकेत हो सकते हैं। इसे ‘साया’ या ‘अंधविश्वास’ से जोड़ना मरीज की स्थिति को और बिगाड़ देता है।

नोट: अगर आप या आपका कोई जानने वाला किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया मनोचिकित्सक से संपर्क करें। सहायता के लिए सरकारी हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें।