पैंगोंग झील से लौटते समय रास्ता भटके थे आगरा के युवा, 4 दिनों तक लापता रहने के बाद रेस्क्यू; 20 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे सुरक्षित स्थान।​

लेह-आगरा: एडवेंचर और रोमांच का शौक कभी-कभी कितना भारी पड़ सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण आगरा के चार दोस्तों की कहानी है। लद्दाख की हाड़ कंपा देने वाली ठंड और बर्फीले रास्तों के बीच चार दिनों तक लापता रहे आगरा के चार युवक आखिरकार सुरक्षित मिल गए हैं। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जिसमें रास्ता भटकने, कार के खाई में गिरने और फिर जिंदगी बचाने के लिए मीलों पैदल चलने का संघर्ष शामिल है।​

ट्रिप की शुरुआत और अचानक संपर्क टूटना​

आगरा के मधुनगर निवासी शिवम चौधरी अपने तीन दोस्तों—जयवीर चौधरी, यश मित्तल और सुधांशु फौजदार के साथ 6 जनवरी को कार से लद्दाख की ट्रिप पर निकले थे। सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था। चारों दोस्तों ने लद्दाख पहुँचकर नया सिम कार्ड लिया और लगातार अपने परिजनों के संपर्क में रहे। 9 जनवरी को वे विश्व प्रसिद्ध पैंगोंग झील पर थे, जहाँ से उन्होंने परिवार को वीडियो कॉल कर वहां की खूबसूरती दिखाई। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह कॉल अगले चार दिनों के लिए आखिरी साबित होगा।

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​शाम करीब 5:30 बजे पैंगोंग से लेह के लिए निकलते समय उन्होंने अंतिम बार बात की, जिसके बाद उनका फोन ‘आउट ऑफ रीच’ हो गया। जब अगले 24 घंटों तक कोई संपर्क नहीं हुआ, तो आगरा में बैठे परिजन अनहोनी की आशंका से कांप उठे। 11 जनवरी को परिजनों ने आगरा के सदर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।​

हादसा: जब 20 फीट गहरी खाई में जा गिरी कार

​लद्दाख पुलिस द्वारा जारी जानकारी और युवकों के बयान के अनुसार, 9 जनवरी की शाम वे लेह के लिए निकले थे। रास्ते में ‘खारू’ के पास उन्हें मनाली की ओर जाने वाला एक बोर्ड दिखा। रास्ता भटकने के कारण वे गलत दिशा में बढ़ गए। 11 जनवरी को जब वे सरचू से आगे निकले, तो उन्हें अहसास हुआ कि रास्ता बंद है।​वापस लौटते समय नाकीला (Nakila) के पास कुदरत ने उनकी परीक्षा ली। भारी बर्फबारी के कारण सड़क पर फिसलन थी और उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 20 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरी। गनीमत यह रही कि कार पलटी नहीं, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।​

शून्य से नीचे तापमान और ‘हीटर’ का सहारा

​खाई में गिरने के बाद चारों ओर सिर्फ बर्फ की चादर थी और तापमान माइनस 20 से 30 डिग्री के बीच। ऐसी स्थिति में कार से बाहर निकलना जानलेवा हो सकता था। युवकों ने सूझबूझ दिखाई और कार के अंदर ही रहने का फैसला किया। 11 और 12 जनवरी की पूरी रात उन्होंने कार का हीटर चलाकर खुद को जमने से बचाया। लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई थी; कार का डीजल धीरे-धीरे खत्म हो रहा था।​

20 किलोमीटर का पैदल संघर्ष और रेस्क्यू

​12 जनवरी की रात जब डीजल खत्म होने की कगार पर पहुँचा, तो युवकों ने तय किया कि अगर वे यहीं बैठे रहे तो ठंड से उनकी मौत निश्चित है। उन्होंने हिम्मत जुटाई और बर्फीले तूफान के बीच पैदल चलने का फैसला किया। करीब 20 किलोमीटर तक बर्फ में पैदल चलने के बाद वे ‘व्हिस्की नाला’ के पास स्थित कुछ झोपड़ियों तक पहुँचने में सफल रहे।

​इसी बीच, आगरा पुलिस और लद्दाख पुलिस की संयुक्त सक्रियता रंग लाई। लद्दाख पुलिस की सर्च टीम ने लोकेशन ट्रेस करते हुए व्हिस्की नाला के पास इन चारों युवकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला।​

परिजनों ने ली राहत की सांस

​आगरा के एसीपी सदर इमरान अहमद ने बताया कि खराब मौसम और नेटवर्क न होने के कारण संपर्क टूट गया था। लद्दाख पुलिस ने चारों युवकों को रेस्क्यू कर लेह पहुँचाया है। आगरा से परिवार के लोग उन्हें लेने के लिए लद्दाख रवाना हो चुके हैं और उम्मीद है कि बुधवार तक चारों अपने घर सुरक्षित पहुँच जाएंगे।

​पर्यटकों के लिए सबक​

लद्दाख जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान सफर करना जोखिम भरा होता है। स्थानीय प्रशासन अक्सर सलाह देता है कि भारी बर्फबारी के समय अनुभवी गाइड के बिना या अकेले अनजान रास्तों पर न निकलें। आगरा के इन चार दोस्तों के लिए यह सफर एक ऐसा सबक बन गया जिसे वे उम्र भर नहीं भूल पाएंगे।