
अखिलेश यादव की नई रणनीति: क्या प्रतापगढ़ की सियासत में ‘युवा शक्ति’ बनाम ‘अनुभव’ की होगी सीधी टक्कर?
प्रतापगढ़/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन सियासी गलियारों में बिसात बिछनी शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा प्रतापगढ़ की हाई-प्रोफाइल सीट ‘कुंडा’ को लेकर है। सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी (सपा) इस बार कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ एक बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। खबर है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव यहां से युवा और शिक्षित महिला चेहरा ज्योत्सना सिंह को मैदान में उतार सकते हैं।यद्यपि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन हाल ही में लखनऊ में हुई संगठनात्मक बैठकों के बाद ज्योत्सना सिंह का नाम तेजी से उभरा है।
कौन हैं ज्योत्सना सिंह? शिक्षा से सियासत तक का सफर
ज्योत्सना सिंह प्रतापगढ़ की स्थानीय राजनीति में एक जाना-माना नाम बनती जा रही हैं। उनकी पृष्ठभूमि शिक्षा और सक्रिय सामाजिक कार्यों से जुड़ी है:
शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी राजस्थान के कोटा (एलेन) से की। इसके बाद उन्होंने एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ से पत्रकारिता (Journalism) में स्नातक किया।
राजनीतिक विरासत: ज्योत्सना के रगों में राजनीति दौड़ती है। उनके पिता राजकुमार सिंह सदर सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख रहे हैं और सपा के टिकट पर नगर पालिका का चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी माता वर्तमान में सपा महिला सभा (प्रतापगढ़) की जिला अध्यक्ष हैं और पूर्व में ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं।
पार्टी से जुड़ाव: ज्योत्सना ने साल 2016 में ही समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी, लेकिन 2022 से वे जमीन पर अत्यधिक सक्रिय हैं।
प्रिया सरोज से दोस्ती और समीकरणों का खेल
सियासी गलियारों में ज्योत्सना सिंह और सपा की तेजतर्रार सांसद प्रिया सरोज के बीच गहरी दोस्ती की भी चर्चा है। दोनों के परिवारों के बीच पुराने मधुर संबंध हैं। माना जा रहा है कि पार्टी कुंडा या सदर सीट पर महिला कार्ड खेलकर आधी आबादी को साधने और राजा भैया के प्रभाव को चुनौती देने की योजना बना रही है।
क्या कुंडा का रण होगा दिलचस्प?
राजा भैया दशकों से कुंडा सीट पर निर्दलीय या अपनी पार्टी (जनसत्ता दल लोकतांत्रिक) से जीतते आए हैं। अखिलेश यादव की कोशिश है कि इस बार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले के साथ युवाओं और महिलाओं को जोड़कर एक नया विकल्प पेश किया जाए।
अगर ज्योत्सना सिंह को कुंडा से टिकट मिलता है, तो यह मुकाबला ‘अनुभव बनाम युवा जोश’ का होगा, जो न केवल प्रतापगढ़ बल्कि पूरे यूपी की राजनीति के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।




