
आधुनिकता के इस दौर में जहाँ स्मार्टफोन बच्चों की शिक्षा का जरिया बना है, वहीं यह अनजाने में उन्हें ऐसे अंधेरे रास्तों पर भी ले जा रहा है जिसकी कल्पना किसी माता-पिता ने नहीं की होगी। ताजनगरी आगरा से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बच्चों को इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक वीडियो देखते देख एक माँ का धैर्य जवाब दे गया। महिला ने न केवल विरोध किया, बल्कि समाज की शुचिता बनाए रखने के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा मामला? रील की चकाचौंध के पीछे का कड़वा सच
मामला आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ रहने वाली एक महिला, जो पेशे से आयुर्वेदिक दवाओं का व्यवसाय करती हैं, ने साइबर क्राइम थाने में एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पीड़िता का आरोप है कि एक महिला अपनी इंस्टाग्राम आईडी पर बेहद अश्लील और द्विअर्थी (double meaning) बातें करते हुए रील पोस्ट करती है।पीड़िता को इस बात की जानकारी तब हुई जब उन्होंने अपने बच्चों को चोरी-छिपे मोबाइल पर वही आपत्तिजनक वीडियो देखते हुए पकड़ा। जब उन्होंने मोबाइल छीनकर जांच की, तो वे दंग रह गईं। वीडियो में न केवल भाषा अमर्यादित थी, बल्कि महिलाओं के प्रति भी भद्दे कमेंट्स किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इस विवादित आईडी के लगभग 2.95 लाख फॉलोअर्स हैं।
पार्लर से शुरू हुई शक की सुई
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले वह कमला नगर के एक ब्यूटी पार्लर में दवाओं की डिलीवरी देने गई थीं। वहां उन्होंने पार्लर संचालिका को उस विवादित इंस्टाग्राम आईडी के वीडियो देखते देखा। संचालिका ने बताया कि यह महिला कमला नगर क्षेत्र की ही रहने वाली है और इसी तरह के ‘गंदा’ कंटेंट बनाकर अपनी फॉलोअर्स लिस्ट बढ़ा रही है। महिला को तब अंदाजा नहीं था कि एक दिन यही वीडियो उनके अपने घर तक पहुँच जाएंगे और उनके बच्चों के कोमल मन को प्रभावित करेंगे।
साइबर क्राइम थाना में प्राथमिकी दर्ज: पुलिस की कार्रवाई
बच्चों और समाज पर पड़ रहे इस नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए, महिला ने जागरूकता का परिचय दिया और हार मानने के बजाय कानून का सहारा लिया। आगरा के साइबर क्राइम थाने में आरोपी महिला के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। थाना प्रभारी के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट की गतिविधियों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर अश्लीलता फैलाना कानूनन अपराध है और इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
माता-पिता के लिए चेतावनी: आपके बच्चे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं?
यह घटना केवल एक FIR तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस माता-पिता के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है जिनके बच्चे घंटों मोबाइल पर बिताते हैं। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं। इंटरनेट की दुनिया में ‘हनी ट्रैप’ और ‘अश्लील कंटेंट’ से बच्चों को बचाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अपने बच्चों को डिजिटल खतरों से कैसे बचाएं? (महत्वपूर्ण टिप्स)
अगर आप भी अपने बच्चों को स्मार्टफोन देते हैं, तो इन सुरक्षा मानकों का पालन जरूर करें:
गूगल फैमिली लिंक (Google Family Link): इस एप के जरिए आप अपने बच्चे के मोबाइल का स्क्रीन टाइम, एप्स के उपयोग और उनकी लोकेशन को कंट्रोल कर सकते हैं।
यूट्यूब रिस्ट्रिक्टेड मोड: यूट्यूब की सेटिंग्स में जाकर ‘Restricted Mode’ ऑन करें, जिससे आपत्तिजनक वीडियो बच्चों के सामने नहीं आएंगे।
प्ले स्टोर पैरेंटल कंट्रोल: प्ले स्टोर में उम्र के अनुसार एप्स और गेम्स डाउनलोड करने की सीमा तय करें।
सर्च इंजन फिल्टरिंग: ब्राउजर में ‘Safe Search’ को हमेशा ऑन रखें और ‘Family DNS’ का उपयोग करें ताकि अश्लील वेबसाइट्स ब्लॉक रहें।
डिजिटल वेलबीइंग: फोन की सेटिंग्स में जाकर स्क्रीन टाइम लिमिट तय करें ताकि बच्चा एक निश्चित समय से ज्यादा मोबाइल न चला सके।
आगरा की इस महिला ने जो साहस दिखाया है, वह समाज के लिए एक मिसाल है। अक्सर लोग विवादों से बचने के लिए ऐसी चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह चुप्पी ही ऐसे कंटेंट बनाने वालों का हौसला बढ़ाती है। सोशल मीडिया एक अच्छा प्लेटफॉर्म है, लेकिन जब यह अश्लीलता का जरिया बन जाए, तो कानून की मदद लेना ही सही विकल्प है। बच्चों को केवल मोबाइल देना काफी नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि वे उस खिड़की से दुनिया का कौन सा चेहरा देख रहे हैं।




