आगरा/फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बावजूद कुछ सरकारी अधिकारी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला फिरोजाबाद के नौशहरा क्षेत्र का है, जहाँ आगरा की एंटी करप्शन टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) और एक संविदा कर्मी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। गिरफ्तारी का मंजर इतना नाटकीय था कि आरोपी जेई पुलिस के सामने गिड़गिड़ाने लगा और जमीन पकड़ कर लेट गया, जिसके बाद टीम को उसे घसीटते हुए ले जाना पड़ा।

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क्या है पूरा मामला?

​मामला फिरोजाबाद के नौशहरा बिजली सबस्टेशन से जुड़ा है। यहाँ तैनात जेई राजेश पाल और संविदा कर्मी मुन्नेश कुमार पर एक उपभोक्ता से काम के बदले अवैध वसूली का आरोप था। नौशहरा निवासी नीरज कुमार ने आगरा की एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी कि उनके एक काम के बदले जेई राजेश पाल 40 हजार रुपये की मोटी रिश्वत मांग रहे हैं।​

नीरज की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने पहले मामले की जांच की और जब शिकायत सही पाई गई, तो जेई को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया।​

समाधान शिविर में रंगे हाथ हुई गिरफ्तारी

​बुधवार को गांव भूड़ा बरतरा में बिजली विभाग की ‘एक मुश्त समाधान योजना’ (OTS) के तहत एक शिविर लगाया गया था। इस शिविर का उद्देश्य उपभोक्ताओं की समस्याओं का निस्तारण करना था, लेकिन जेई राजेश पाल यहाँ भी अपनी “अवैध कमाई” के जुगाड़ में जुटे थे।​

शाम करीब 4 बजे, जैसे ही पीड़ित नीरज ने जेई और संविदा कर्मी मुन्नेश को रिश्वत के 40 हजार रुपये थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में तैनात एंटी करप्शन टीम ने दोनों को दबोच लिया। नोटों पर लगे केमिकल और टीम की मुस्तैदी ने आरोपियों को भागने का कोई मौका नहीं दिया।​

गिरफ्तारी के वक्त जेई का हाईवोल्टेज ड्रामा

जैसे ही जेई राजेश पाल को अहसास हुआ कि वह कानून के शिकंजे में फंस चुका है, उसने मौके पर ही हंगामा शुरू कर दिया। जेल जाने के डर से जेई टीम के सामने गिड़गिड़ाने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जेई ने जमीन पकड़ ली और साथ जाने से इनकार करने लगा। काफी देर तक चले इस ड्रामे के बाद, एंटी करप्शन टीम के सदस्यों ने उसे जमीन से उठाकर घसीटते हुए सरकारी गाड़ी तक पहुँचाया। संविदा कर्मी मुन्नेश को भी हिरासत में लेकर टीम आगरा के लिए रवाना हो गई।​

आगरा के अन्य विभागों में भ्रष्टाचार की जड़ें​

यह कोई पहला मामला नहीं है जब आगरा और उसके आसपास के जिलों में सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए हों। आगरा में नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD), और विकास प्राधिकरण (ADA) जैसे विभागों में ठेकेदारों और जूनियर इंजीनियरों के बीच साठगांठ की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं।​

नगर निगम और PWD: सड़कों के निर्माण और नालियों की मरम्मत के नाम पर ठेकेदारों से “कमीशन” लेना एक आम बात हो चुकी है। कई बार घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें आती हैं, जिनका मुख्य कारण जेई और ठेकेदारों के बीच का भ्रष्टाचार होता है।​

ठेकेदारों का सिंडिकेट:

आगरा में कई सरकारी विभागों में ठेकेदारों का एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है, जो अधिकारियों को रिश्वत देकर बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करता है। इससे न केवल सरकारी खजाने को चपत लगती है, बल्कि आम जनता को भी खराब बुनियादी ढांचा मिलता है।​

विभाग में मचा हड़कंप​

इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग के आला अधिकारियों में खलबली मच गई है। एंटी करप्शन टीम ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)​

सरकारी तंत्र में बैठे कुछ भ्रष्ट कर्मचारी न केवल सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं, बल्कि आम आदमी का सिस्टम पर से भरोसा भी कम कर रहे हैं। आगरा एंटी करप्शन टीम की यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो जनता की सेवा के बजाय अपनी जेब भरने को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए जनता की जागरूकता और नीरज जैसे साहसी लोगों की जरूरत है जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें।​

पाठकों के लिए सवाल:

क्या आपको लगता है कि इस तरह की छिटपुट गिरफ्तारियों से सरकारी विभागों में फैला भ्रष्टाचार खत्म हो पाएगा, या इसके लिए सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।