कैंसर से लेकर ऑटिज्म तक: देशभर के विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ होम्योपैथी की बढ़ती स्वीकार्यता पर किया मंथन​

आगरा। ताजनगरी के एमडी जैन इंटर कॉलेज स्थित शांति स्वरूप सभागार में शुक्रवार को द्वितीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस का भव्य शुभारंभ हुआ। गरिमामय वातावरण में आयोजित इस राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन होम्योपैथी के वैज्ञानिक पक्ष, आधुनिक शोध और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि होम्योपैथी अब केवल एक वैकल्पिक उपचार नहीं, बल्कि विज्ञान सम्मत स्थायी समाधान है।​

“होम्योपैथी को अब पहचान की नहीं, संरक्षण की आवश्यकता” : प्रो. एस.पी. सिंह बघेल​

सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। चिकित्सकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “होम्योपैथी को अब किसी विज्ञापन या प्रमाण की जरूरत नहीं है, इसके सफल परिणाम ही इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। समय के साथ इस पद्धति ने सभी भ्रांतियों को दूर कर अपनी वैज्ञानिकता सिद्ध की है।

“​प्रो. बघेल ने कहा कि जहाँ महंगे कॉरपोरेट अस्पताल आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं, वहां किफायती और सुरक्षित होम्योपैथी एक वरदान बनकर उभरी है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना से होम्योपैथी के जुड़ने को एक मील का पत्थर बताया और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से भी इस पद्धति पर आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने की अपेक्षा जताई।​

कैंसर जैसे गंभीर रोगों में होम्योपैथी का बढ़ता प्रभाव

वैज्ञानिक सत्र के दौरान नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. प्रदीप गुप्ता ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आज वैश्विक स्तर पर कैंसर उपचार के लिए लोग होम्योपैथी पर भरोसा कर रहे हैं। डॉ. गुप्ता ने कहा, “हमारा अनुभव और 100 बेड की फुल रहने वाली आईपीडी इस बात का प्रमाण है कि यदि सही शोध और मानसिक-शारीरिक लक्षणों को आधार बनाया जाए, तो हर बीमारी का इलाज संभव है।

“​चिकित्सा जगत की प्रमुख मांगें और आश्वासन

इस अधिवेशन के माध्यम से होम्योपैथिक संगठनों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं:

राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों का आधुनिकीकरण और नए कॉलेजों की स्थापना।​

आयुष्मान भारत योजना में होम्योपैथी की IPD (इन-पेशेंट विभाग) सेवाओं को अनिवार्य रूप से जोड़ना।​

उत्तर प्रदेश में अलग से होम्योपैथी बोर्ड का गठन।

​जिला अस्पतालों में होम्योपैथी सेवाओं का विस्तार।​

केंद्रीय मंत्री प्रो. बघेल ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए इन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के समक्ष प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया।​

दिग्गज चिकित्सकों का हुआ सम्मान​

समारोह में चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 15 प्रख्यात चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में पद्मश्री डॉ. आर.एस. पारीक, डॉ. प्रदीप गुप्ता, डॉ. पार्थ सारथी शर्मा, डॉ. जे.एन. सिंह रघुवंशी और डॉ. कैलाश चंद्र सारस्वत सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।