
आगरा में उत्सव की धूम, मंडियों में सजी रंग-बिरंगी सब्ज़ियां; भक्तों में उत्साह
आगरा, उत्तर प्रदेश: दीपावली के पंच-महापर्व का चौथा दिन, यानी आज (बुधवार, 22 अक्टूबर 2025) गोवर्धन पूजा का पावन पर्व पूरे देश के साथ-साथ आगरा में भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के गोवर्धनधारी रूप का पूजन किया जाता है। घरों और मंदिरों में सुबह से ही यह उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में कार्तिक मास का विशेष महत्व है, जो विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है। इस माह में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से श्रीहरि शीघ्र प्रसन्न होते हैं। तिथियों में वृद्धि के कारण, इस वर्ष गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन न होकर 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को मनाई जा रही है।
गोवर्धन पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस समय पूजन करने से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कार्य पूर्ण करते हैं।
गिरिराज जी का अन्नकूट भोग

गोवर्धन पूजा का एक अभिन्न अंग है ‘अन्नकूट’। इसमें कई तरह की मौसमी सब्ज़ियों को मिलाकर एक विशेष भोग तैयार किया जाता है, जिसे भगवान गिरिराज जी को अर्पित किया जाता है।आगरा की सब्ज़ी मंडियों में आज इस अन्नकूट के लिए रंग-बिरंगी सब्ज़ियों की रौनक देखने लायक है। शाहगंज और रामनगर जैसी मंडियों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। एक सब्ज़ी विक्रेता ने बताया, “अन्नकूट की सब्ज़ी की कीमत वैरायटी और मात्रा के आधार पर ₹150 से ₹200 प्रति किलो तक है। आज अन्नकूट की बिक्री सामान्य दिनों से अधिक होती है, जिससे अच्छी आमदनी होती है।”हालांकि, कुछ खरीदारों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार सब्ज़ियां कुछ महंगी हैं, लेकिन गिरिराज जी की पूजा के लिए उन्हें खरीदना आवश्यक है।
पूजा की विधि
गोवर्धन पूजा के लिए भक्त सुबह उठकर घर और आंगन की साफ-सफाई करते हैं। इसके बाद गाय के गोबर (या गेहूं के आटे) से एक छोटा गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है। इस पर्वत के आसपास बछड़े और ग्वालिनों की मूर्तियां भी रखी जाती हैं। फिर दीपक जलाकर फल, फूल और अन्नकूट का भोग अर्पित करके परिवार के साथ भगवान कृष्ण का पूजन किया जाता है।
पौराणिक कथा: इंद्र का अहंकार हुआ चूर
गोवर्धन पूजा की कथा भगवान श्री कृष्ण और देवराज इंद्र से जुड़ी है। कथा के अनुसार, जब इंद्रदेव ने अहंकारवश ब्रजवासियों पर भारी वर्षा का प्रकोप बरसाया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था। इस घटना के बाद इंद्र का अहंकार चूर-चूर हो गया। इस विजय और रक्षा के उपलक्ष्य में ही गोवर्धन पूजा की जाती है, जिसे अन्नकूट भी कहा जाता है।




