उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवता और खून के रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। शहर के कोतवाली नगर क्षेत्र के प्रेमी नगला में हुए सनसनीखेज सामूहिक हत्याकांड का पुलिस ने महज 12 घंटों के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस घर के आंगन में चार लाशें बिछी थीं, उनका कातिल कोई बाहरी नहीं बल्कि उस घर का ही चिराग और बड़ा बेटा निकला।​

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी करण शाक्य ने अपने सगे पिता, मां, पत्नी और अपनी मासूम बेटी को ईंटों से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया।

आइए जानते हैं आखिर क्या थी वो वजह, जिसने एक बेटे को ‘कसाई’ बना दिया।

​आधी रात को खूनी खेल: कैसे अंजाम दी गई वारदात?

​यह खौफनाक मंजर सोमवार की रात करीब 1 बजे का है। जब पूरा शहर गहरी नींद में सोया था, तब प्रेमी नगला इलाके में डॉक्टर गंगा सिंह शाक्य के घर में मौत का तांडव चल रहा था। पुलिस की पूछताछ में आरोपी करण शाक्य ने जो बताया, उसे सुनकर सख्त दिल पुलिसवालों की रूह भी कांप गई।​

झगड़े की शुरुआत मामूली कहासुनी से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे इसने हिंसक रूप ले लिया। करण ने छत पर रखी एक ईंट उठाई और सबसे पहले अपनी पत्नी पर वार किया। इसके बाद उसने एक-एक करके अपनी बेटी ज्योति, अपनी मां और अंत में अपने पिता डॉक्टर गंगा सिंह को मौत की नींद सुला दिया। तड़पते हुए परिजनों पर उसने तब तक प्रहार किए, जब तक उनकी सांसें थम नहीं गईं।

​4 लाख रुपये और पारिवारिक कलह बनी काल

​पुलिस अधीक्षक स्वेताभ पाण्डेय के नेतृत्व में हुई जांच में हत्या की मुख्य वजह आर्थिक तंगी और पारिवारिक विवाद निकलकर सामने आई है। बताया जा रहा है कि करण की बेटी ज्योति की शादी तय हो चुकी थी, जिसके लिए करीब 4 लाख रुपये की सख्त जरूरत थी। रुपयों के इंतजाम को लेकर घर में पिछले कई दिनों से तनाव का माहौल था।​

आर्थिक दबाव और घर में रोज-रोज होने वाली किचकिच ने करण को मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसने पूरे परिवार को ही खत्म करने का आत्मघाती फैसला ले लिया। हत्या के पीछे कोई सोची-समझी साजिश नहीं, बल्कि अचानक उपजा आक्रोश और हताशा नजर आ रही है।​

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गिरफ्तार अभियु्क्त

सीसीटीवी फुटेज और धोए हुए कपड़े: ऐसे पकड़ा गया कातिल​

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की। उसने अपने खून से सने कपड़े धोए और खुद को सामान्य दिखाने का नाटक किया। सुबह जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो करण ने भी अनजान बनने का ढोंग रचा। लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं।​

पुलिस ने जब घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो करण की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद आरोपी खुदकुशी करने की भी योजना बना रहा था।

​पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी: 12 घंटे में केस सॉल्व

​एटा जैसे शांत शहर में दिनदहाड़े चार लोगों की हत्या की खबर से हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के आला अधिकारी, सीओ सिटी और कई थानों की फोर्स मौके पर तैनात कर दी गई थी। पुलिस पर इस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने का भारी दबाव था।​

एसएसपी एटा के निर्देश पर गठित टीमों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाया और महज 12 घंटे के भीतर कातिल को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पोस्टमार्टम के बाद भारी पुलिस सुरक्षा के बीच चारों मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पूरे इलाके में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि एक बेटा ऐसा भी कर सकता है।​

निष्कर्ष: समाज के लिए एक बड़ा सबक

​एटा की यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि हमारे समाज के बिखरते ढांचों की एक दर्दनाक तस्वीर है। आर्थिक तंगी और संवाद की कमी किस तरह एक इंसान को हैवान बना सकती है, यह मामला इसका जीवंत उदाहरण है। जब रिश्तों के बीच विश्वास की जगह विवाद ले लेता है, तो परिणाम ऐसे ही विनाशकारी होते हैं।

​आरोपी करण शाक्य अब पुलिस की गिरफ्त में है और उसे उसके किए की सजा कानून जरूर देगा, लेकिन उसने जो घाव समाज और अपने बचे हुए रिश्तेदारों को दिए हैं, वे शायद कभी नहीं भर पाएंगे।​

पाठकों के लिए प्रश्न: क्या आपको लगता है कि बढ़ता आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव आज के समय में पारिवारिक हिंसा की मुख्य वजह बनता जा रहा है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।