ACP की राष्ट्रीय गोष्ठी में AI, तकनीक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहन विमर्श; केंद्रीय मंत्री डॉ. एस. पी. सिंह बघेल ने जताई चिंता

आगरा, :एसोसिएशन फॉर क्लिनिकल साइकियाट्री (ACP) के तत्वावधान में आगरा ने देश भर के शीर्ष मनोचिकित्सकों की मेजबानी की। राष्ट्रीय वार्षिक गोष्ठी का विषय “भारतीय डिजिटल क्रांति का मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोचिकित्सा पर प्रभाव” रहा, जिस पर दो दिनों (25-26 अक्टूबर) तक गहन विचार-विमर्श किया जाएग।

देशभर के 300 से अधिक विशेषज्ञों ने इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी राय रखी।

डिजिटल तकनीक समाधान भी, जोखिम भी: केंद्रीय मंत्रीगोष्ठी का उद्घाटन समारोह विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, जिसके मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ. एस. पी. सिंह बघेल रहे। उन्होंने वर्तमान दौर में मानसिक रोगों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। डॉ. बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल तकनीकें जहाँ एक ओर इन चुनौतियों के समाधान में एक बड़ी भूमिका निभा सकती हैं, वहीं इनके दुष्प्रभावों से सावधान रहना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस गोष्ठी से प्राप्त निष्कर्ष मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

आधुनिक जीवनशैली और उपचार के नए स्वरूपों पर प्रकाश

समारोह में सम्मानित अतिथि के रूप में एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता और वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आर. के. जैन उपस्थित रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने आधुनिक जीवनशैली के कारण तेजी से बदलती मानसिक बीमारियों की प्रकृति और उनके उपचार में आ रहे नए स्वरूपों पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला।

गोष्ठी में निम्हांस (बेंगलुरु), पीजीआई (चंडीगढ़), केजीएमयू (लखनऊ), बीएचयू (वाराणसी), मुंबई और हैदराबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से 40 से अधिक वरिष्ठ विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि 15 से अधिक युवा शोधकर्ताओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

आयोजन समिति की सचिव, डॉ. काश्यपी गर्ग (मनोचिकित्सा विभाग, एस.एन. मेडिकल कॉलेज) ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों का समाधान खोजना है।

AI चैटबॉट्स और भविष्य की मनोचिकित्सा

एसीपी के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. यू. सी. गर्ग (आगरा) ने अपने विशेष व्याख्यान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) चैटबॉट्स के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में इनके उपयोग के लाभ और संभावित जोखिमों दोनों पहलुओं पर विचार रखा।

डॉ. गर्ग ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भविष्य की मनोचिकित्सा का एक अहम उपकरण बन सकती है, बशर्ते इसका उपयोग जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।

” यह गोष्ठी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक सार्थक विमर्श सिद्ध हुई, जिसने देशभर के चिकित्सकों को इस डिजिटल युग में उपचार के लिए नए दृष्टिकोण और दिशा प्रदान की।

प्रमुख उपस्थित विशेषज्ञ:

प्रो. एस. सी. तिवारी (निवर्तमान अध्यक्ष, लखनऊ) डॉ. अनुराग वर्मा (महासचिव, प्रयागराज) डॉ. विपुल सिंह (प्रमुख संपादक, कानपुर) डॉ. आदर्श त्रिपाठी (कोषाध्यक्ष, लखनऊ) डॉ. के. सी. गुरनानी (आयोजन समिति अध्यक्ष)