1995 के बाद पहली बार हुआ पुनर्निर्धारण; निर्णय प्रक्रिया और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आएगी तेज़ी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यों की समीक्षा करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पाँच गुना तक की वृद्धि करने का आदेश दिया है। यह कदम विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।

वित्तीय अधिकारों में भारी बढ़ोतरी: किसको कितना अधिकार?

💰मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1995 के बाद यह पहला मौका है जब वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस फैसले से निर्णय प्रक्रिया में तेज़ी आएगी और विकास कार्यों को समय पर पूरा किया जा सकेगा।

सिविल कार्यों के लिए, अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा अधिकतम पाँच गुना तक बढ़ाई जाएगी।

विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए यह वृद्धि कम से कम दो गुना तक होगी।

इस फैसले के तहत, अधिकारियों के नए वित्तीय अधिकार इस प्रकार होंगे:

विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग के लिए सेवा नियमों में बड़ा संशोधन

समीक्षा बैठक में, PWD के विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग के लिए उ०प्र० अभियन्ता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

सेवा संरचना, पदोन्नति व्यवस्था, और वेतनमान के पुनर्गठन से जुड़े इन संशोधनों का उद्देश्य संवर्ग को मजबूत करना है।

प्रस्तावित संशोधन में पहली बार मुख्य अभियन्ता (स्तर-एक) का एक नया पद शामिल किया गया है।

इसके अलावा, मुख्य अभियन्ता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियन्ता के पदों की संख्या में भी वृद्धि की जाएगी।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप, अधिशासी अभियन्ता से लेकर मुख्य अभियन्ता (स्तर-एक) तक के पदों के लिए नए वेतनमान और मैट्रिक्स पे लेवल भी निर्धारित किए गए हैं।