चमत्कार! जगन्नाथ पुरी में पुनर्जन्म: कोमा से लौटे बेटे ने मंदिर में खोली आँखें, पिता की अटूट आस्था लाई रंग

भुवनेश्वर, ओडिशा: आस्था और विज्ञान के बीच की रेखा कहाँ मिट जाती है, इसका एक जीवंत उदाहरण ओडिशा के पवित्र जगन्नाथ पुरी मंदिर में देखने को मिला। एक पिता के लिए यह किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था, जब 10 दिनों से कोमा में पड़े उसके बेटे ने, जिसे डॉक्टरों ने ‘मरा हुआ’ घोषित कर दिया था, भगवान जगन्नाथ के गर्भगृह के पास अचानक आँखें खोलीं और अपने पिता को पुकारा। यह हृदय-विदारक दृश्य जल्द ही एक दिव्य चमत्कार की कहानी बन गया, जिसने मंदिर में मौजूद हर किसी को भावुक कर दिया।

असहाय पिता की अंतिम उम्मीद

यह मार्मिक घटना इसी सप्ताह सोमवार को हुई। 40 वर्षीय एक पिता अपने लगभग बेजान बेटे को गोद में लिए रोता हुआ श्रीमंदिर के सिंहद्वार तक पहुँचा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बच्चे की हालत इतनी खराब थी कि वह मृत लग रहा था। पिता की आँखों में अथाह पीड़ा थी, लेकिन उसके कदम नहीं रुके। वह सुरक्षा गार्डों के रोकने पर भी आगे बढ़ता गया, उसका रोना-बिलखना इतना तीव्र था कि किसी ने उसे नहीं रोका।

“आप ही आखिरी उम्मीद हैं”: गर्भगृह के पास प्रार्थना

मंदिर में प्रवेश करने के बाद, उस पिता ने अपने इकलौते बेटे को भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के सामने रख दिया। दुख और अटूट आस्था से अभिभूत, वह जोर-जोर से रो रहा था और भगवान से अपने बेटे के जीवनदान के लिए प्रार्थना कर रहा था। मंदिर के एक सेवायत, सौम्य रंजन पांडा ने बताया कि पिता की पीड़ा देखकर कुछ सेवायतों ने उसे पतितपावन (भगवान जगन्नाथ का रूप) के पास जाकर सीधे प्रार्थना करने की सलाह दी।

पिता हाथ जोड़कर खड़ा रहा और प्रार्थना करता रहा कि “आप ही हमारी आखिरी उम्मीद हैं।” मंदिर में मौजूद भक्त और कर्मचारी भी चुपचाप इस पिता की प्रार्थना में शामिल हो गए।

मंगल आरती के बीच हुआ ‘जादू’

पिता ने बताया कि उसका बेटा पिछले 10 दिनों से आईसीयू में था और कोमा में चला गया था। डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे और उसे यह कहकर घर भेज दिया था कि अब कोई उम्मीद नहीं है। अस्पताल से वह सीधे नंगे पाँव, अपने बेटे को गोद में लेकर मंदिर आया था।

तभी, मंदिर के एक पुजारी ने बच्चे पर भगवान का चरणामृत छिड़का। मंगल आरती के मंत्रों की गूँज के बीच, एक अविश्वसनीय घटना घटी:

बच्चे ने अचानक अपना सिर हिलाया।

उसने धीरे से आँखें खोलीं।

और फिर अपने पिता की ओर देखकर ‘बापदादा’ कहकर पुकारा।

यह दृश्य देखकर मंदिर में उपस्थित हर कोई स्तब्ध रह गया। पिता का रोना खुशी के आँसुओं में बदल गया। लोगों ने एक स्वर में इसे ईश्वरीय चमत्कार और भगवान जगन्नाथ का साक्षात आशीर्वाद बताया। पिता की अटूट आस्था ने विज्ञान को झुका दिया और उसे उसके बेटे का पुनर्जन्म वापस लौटा दिया।