आगरा, ​ताजनगरी के पश्चिमपुरी क्षेत्र में आज ‘पूर्व के ऑक्सफोर्ड’ कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय की यादें उस समय जीवंत हो उठीं, जब विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों का कारवां एक मंच पर इकट्ठा हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय पूर्व छात्र परिषद, आगरा इकाई की कार्यकारिणी की एक विशेष बैठक संपन्न हुई, जिसमें न केवल पुरानी यादों को साझा किया गया, बल्कि संगठन की मजबूती और भविष्य की रूपरेखा को लेकर भी गंभीर मंथन हुआ।

​इस बैठक ने यह सिद्ध कर दिया कि समय भले ही बदल गया हो, लेकिन प्रयागराज की उस पावन धरती और विश्वविद्यालय के गलियारों से मिला संस्कार आज भी इन पूर्व छात्रों के दिलों में उतनी ही शिद्दत से धड़कता है।

​डॉ. शेखरेंद्र मोहन मिश्र की अध्यक्षता में संगठन की मजबूती पर जोर

​बैठक की अध्यक्षता आगरा कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक और संस्था के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. शेखरेंद्र मोहन मिश्र ने की। अपने संबोधन में उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक गौरवशाली परंपरा का नाम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में पूर्व छात्रों का यह नैतिक दायित्व है कि वे अपनी बौद्धिक क्षमता का उपयोग समाज के उत्थान के लिए करें।

​डॉ. मिश्र ने सदस्यों से आह्वान किया कि संगठन को केवल बैठकों तक सीमित न रखकर इसे शैक्षिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सशक्त संगठन ही विश्वविद्यालय की विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचा सकता है।

​कार्यकारिणी का होगा कायाकल्प: चुनाव की जल्द होगी घोषणा

​बैठक का एक मुख्य एजेंडा संगठन की कार्यकारिणी का पुनर्गठन था। उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि बदलते समय के साथ संगठन में नई ऊर्जा और नए विचारों का समावेश जरूरी है। इसके लिए आगरा इकाई की नई कार्यकारिणी के गठन का निर्णय लिया गया है।

​बैठक में तय हुआ कि चुनाव की आधिकारिक तिथि और स्थान की घोषणा जल्द ही की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अधिक से अधिक सक्रिय सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपना है, ताकि परिषद के कार्यों में गतिशीलता बनी रहे। इस निर्णय का सभी उपस्थित सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया।

​किस्सों और संस्मरणों से जीवंत हुआ माहौल

​औपचारिक चर्चाओं के बीच जब चाय की चुस्कियों के साथ छात्र जीवन के संस्मरणों का दौर शुरू हुआ, तो माहौल पूरी तरह आत्मीय हो गया। वरिष्ठ पूर्व छात्रों ने हॉस्टल के दिनों, आनंद भवन की चर्चाओं और विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में बिताए गए उन सुनहरे पलों को याद किया। किसी ने अपने प्रोफेसरों के कड़क अनुशासन की बात की, तो किसी ने छात्र राजनीति के उन दिनों को याद किया जिन्होंने उन्हें आज एक सफल नागरिक बनाया है। यह सत्र केवल यादों का मिलन नहीं था, बल्कि एक पीढ़ी का दूसरी पीढ़ी से वैचारिक जुड़ाव भी था।

​शहर की दिग्गज हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

​बैठक में शिक्षा और कानून जगत की कई नामी हस्तियों ने शिरकत की। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • डॉ. बी. बी. एस. चौहान: उपाध्यक्ष एवं पूर्व प्राचार्य, आरबीएस कॉलेज।
  • प्रो. संतोष सिंह: वरिष्ठ शिक्षाविद।
  • डॉ. बलराम कांत: कोषाध्यक्ष।
  • श्री ज्ञानीश कुमार चतुर्वेदी: वरिष्ठ अधिवक्ता, आगरा।
  • अन्य गणमान्य: डॉ. शशिकांत पांडे, श्री हरिओम सिंह, श्री सी. पी. गुप्ता।

​इन सभी वक्ताओं ने एक स्वर में संगठन को और अधिक समावेशी बनाने और आगरा में रह रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अन्य पूर्व छात्रों को इस मंच से जोड़ने का संकल्प लिया।

​दिवंगत साथियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

​बैठक के समापन पर एक गरिमामयी और भावुक क्षण वह था, जब परिषद के उन सदस्यों को याद किया गया जो अब हमारे बीच नहीं रहे। उनकी सेवाओं और संगठन के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए सभी उपस्थित सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखा और उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह क्षण इस बात का प्रतीक था कि यह परिषद केवल एक औपचारिक समूह नहीं, बल्कि एक परिवार है।