आगरा। ताजनगरी के ग्रामीण अंचलों में वन्यजीवों और इंसानों के बीच टकराव की खबरें अक्सर आती रहती हैं, लेकिन हाल ही में आगरा के खंदौली ब्लॉक से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के नेकपुर गांव में एक निर्माणाधीन मंदिर परिसर में तब अफरा-तफरी मच गई, जब ईंटों के ढेर के बीच से एक-दो नहीं, बल्कि पूरे सात रैट स्नेक (Rat Snakes) बरामद हुए।​

सांपों की इतनी बड़ी संख्या देखकर काम कर रहे मजदूरों और ग्रामीणों में डर फैल गया। हालांकि, ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए कोई हिंसक कदम नहीं उठाया और तुरंत वन्यजीव संरक्षण संस्था की मदद ली।​

मंदिर की नींव में छिपे थे ‘बिन बुलाए मेहमान’

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​नेकपुर गांव में वर्तमान में एक भव्य मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण के लिए परिसर में ईंटों के भारी ढेर लगे हुए हैं। शुक्रवार को जब मजदूर काम के लिए ईंटें उठाने लगे, तो उन्हें भीतर हलचल महसूस हुई। जैसे ही कुछ ईंटें हटाई गईं, वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए। ईंटों के बीच कई लंबे और फुर्तीले सांप आपस में लिपटे हुए थे।​

ग्रामीणों के अनुसार, सांपों की लंबाई और उनकी फुर्ती देखकर निर्माण स्थल पर काम रोक दिया गया। लोगों को डर था कि कहीं ये जहरीले न हों और किसी को नुकसान न पहुंचा दें।​

वाइल्डलाइफ एसओएस (Wildlife SOS) का त्वरित एक्शन​

सांपों और ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, स्थानीय लोगों ने बिना देरी किए वाइल्डलाइफ एसओएस की 24 घंटे चलने वाली आपातकालीन हेल्पलाइन पर कॉल किया। सूचना मिलते ही संस्था की ‘रैपिड रिस्पांस यूनिट’ से दो प्रशिक्षित विशेषज्ञ तुरंत मौके पर पहुंचे।​

रेस्क्यू टीम ने बताया कि ईंटों के ढेर के बीच से सांपों को निकालना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि जगह काफी संकरी थी। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद, टीम ने सावधानीपूर्वक सभी सातों सांपों को एक-एक करके सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान के दौरान न तो किसी ग्रामीण को चोट आई और न ही सांपों को कोई नुकसान पहुँचा।​

शहरीकरण और वन्यजीवों का संघर्ष​

इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “तीव्र शहरीकरण और बढ़ती निर्माण गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। यही कारण है कि सांप अक्सर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में इंसानी बस्तियों या निर्माण स्थलों पर पहुँच जाते हैं। हम नेकपुर के ग्रामीणों की सराहना करते हैं जिन्होंने कानून को हाथ में लेने के बजाय विशेषज्ञों को बुलाना बेहतर समझा।

“​रैट स्नेक: डरावने लेकिन किसानों के सच्चे मित्र​

बचाए गए सांपों की पहचान ‘इंडियन रैट स्नेक’ (जिसे स्थानीय भाषा में ‘घोड़ा पछाड़’ भी कहा जाता है) के रूप में हुई है। वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने इस प्रजाति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:​

“रैट स्नेक पूरी तरह से गैर-विषैले (Non-venomous) होते हैं। ये चूहों की आबादी को नियंत्रित कर पारिस्थितिक तंत्र और किसानों की फसलों को बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अक्सर लोग इन्हें कोबरा समझकर मार देते हैं, जो कि गलत है। जागरूकता ही इस डर को खत्म करने का एकमात्र जरिया है।

​सफल रेस्क्यू के बाद प्राकृतिक आवास में वापसी

​रेस्क्यू किए गए सातों सांपों को कुछ घंटों के लिए चिकित्सा निगरानी में रखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। विशेषज्ञों द्वारा फिट घोषित किए जाने के बाद, उन्हें आबादी से दूर उनके प्राकृतिक वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।​

इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि इंसान संयम और समझदारी से काम ले, तो वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व संभव है।