
आगरा। ताजनगरी के थाना न्यू आगरा क्षेत्र के अंतर्गत नगला बूढ़ी इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहाँ एक तरफ प्रदेश भर में छात्र यूपी बोर्ड की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं, वहीं आगरा में 10वीं की एक मेधावी छात्रा ने परीक्षा से ठीक पहले मौत को गले लगा लिया। मंगलवार दोपहर जब माँ बाजार से लौटी और घर का दरवाजा खोला, तो सामने का मंजर देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी सबसे छोटी बेटी शिवानी (15) का शव कमरे में दुपट्टे के फंदे से लटका हुआ था।
परीक्षा की तैयारी और बिखरी किताबें: क्या था शिवानी के मन में?
शिवानी के पिता हीरा सिंह, जो एक स्थानीय जूता कारखाने में काम करते हैं, ने रुंधे गले से बताया कि बुधवार को शिवानी का हिंदी का पहला पेपर था। घर के कमरे में आज भी उसकी किताबें वैसी ही बिखरी पड़ी हैं, जैसे वह कुछ देर पहले ही पढ़ाई कर रही हो। हीरा सिंह के मुताबिक, शिवानी पढ़ाई में बहुत होनहार थी और उस पर परीक्षा का कोई अतिरिक्त दबाव नजर नहीं आ रहा था।
सुबह से वह अपनी सहेलियों और पड़ोस की बच्चियों के साथ सामान्य रूप से बातचीत कर रही थी और पढ़ाई में जुटी थी। पिता का कहना है कि घर में न तो उसे किसी ने डांटा था और न ही कोई विवाद हुआ था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर परीक्षा की दहलीज पर खड़ी एक छात्रा के मन में ऐसा क्या चल रहा था जिसने उसे इतना आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया?
माँ के बाजार जाते ही घट गई अनहोनी
घटनाक्रम के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे शिवानी घर पर ही थी। उसने अपनी माँ सीमा से मोबाइल माँगा और फिर माँ घरेलू सामान लेने बाजार चली गईं। करीब दो घंटे बाद जब सीमा वापस लौटीं, तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज देने और कुंडी खटखटाने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो सीमा ने शोर मचाना शुरू किया।
चीख-पुकार सुनकर मकान मालिक और आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जब दरवाजा तोड़ा, तो शिवानी फंदे पर लटकी मिली।
पुलिस की जांच और ‘रहस्यमयी’ मोबाइल फोन
सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, लेकिन उन्हें वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने शिवानी का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है।
आशंका जताई जा रही है कि मोबाइल के कॉल डिटेल्स या सोशल मीडिया चैट्स से इस आत्महत्या के पीछे की असली वजह साफ हो सकती है। शिवानी चार बहनों में सबसे छोटी थी और उसकी बाकी तीनों बहनों की शादी हो चुकी है। वह अपने माता-पिता की लाडली थी, इसलिए परिवार का हर सदस्य इस घटना से स्तब्ध है।
क्या परीक्षा का तनाव है असली वजह?
हालांकि पिता ने परीक्षा के किसी भी तनाव से इनकार किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर मेधावी छात्र अपनी अपेक्षाओं के बोझ तले दबे होते हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं, ऐसे में छात्रों पर बेहतर प्रदर्शन करने का मनोवैज्ञानिक दबाव चरम पर होता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कई बार बच्चे अपनी घबराहट साझा नहीं कर पाते और क्षणिक आवेश में आकर गलत फैसला ले लेते हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन दो घंटों के भीतर शिवानी के पास किसी का फोन आया था या उसने किसी से बात की थी।
निष्कर्ष (Conclusion)
आगरा की यह घटना समाज और अभिभावकों के लिए एक चेतावनी है। एक उभरता हुआ सितारा समय से पहले अस्त हो गया, जिसके पीछे के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। पुलिस जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने पूरे नगला बूढ़ी इलाके में मातम पसरा दिया है। शिक्षा व्यवस्था और पारिवारिक परिवेश में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
पाठकों के लिए प्रश्न:
क्या आपको लगता है कि बोर्ड परीक्षाओं का बढ़ता दबाव छात्रों को मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।



