आगरा के गलियारों और चौराहों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद और उनसे जुड़ी समस्याओं से अब शहरवासियों को जल्द निजात मिलने वाली है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद आगरा नगर निगम ने एक ऐसी योजना पर काम शुरू कर दिया है, जो न केवल इंसानों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि बेजुबानों को भी एक बेहतर छत और इलाज मुहैया कराएगी।

​ताजनगरी में अब 11 एकड़ की विशाल भूमि पर कुत्तों के लिए एक अत्याधुनिक शेल्टर होम, अस्पताल और नसबंदी केंद्र बनाने की तैयारी है। यह प्रोजेक्ट शहर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

​सेवला रोड से सिकंदरा तक: जमीन की तलाश हुई पूरी!

​इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में नगर निगम ने सेवला रोड पर जमीन का निरीक्षण किया था। हालांकि, वहां जगह की कमी के कारण योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। एक लाख से अधिक कुत्तों की आबादी वाले शहर के लिए एक छोटे से केंद्र से काम चलना मुमकिन नहीं था।

​गहन खोज के बाद अब नगर निगम की नजर सिकंदरा स्मारक के पीछे स्थित 11 एकड़ की शूटिंग रेंज पर टिकी है। कभी शूटिंग के अभ्यास के लिए बनाई गई यह जगह लंबे समय से बंद पड़ी है और इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। नगर निगम प्रशासन अब इस खाली पड़ी जमीन को कुत्तों के पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने का मन बना चुका है।

​अस्पताल, नसबंदी और रिकवरी रूम: एक छत के नीचे सब कुछ

​यह केवल एक शेल्टर होम नहीं होगा, बल्कि कुत्तों के लिए एक पूर्ण चिकित्सा केंद्र होगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार, यहाँ निम्नलिखित सुविधाएं विकसित की जाएंगी:

  • आधुनिक अस्पताल: बीमार और घायल कुत्तों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात होगी।
  • नसबंदी केंद्र (ABC Center): कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए यहाँ बड़े स्तर पर नसबंदी कार्यक्रम चलाया जाएगा।
  • रिकवरी वार्ड: सर्जरी या बीमारी के बाद कुत्तों की देखभाल के लिए अलग से रिकवरी वार्ड बनाए जाएंगे।
  • विशाल शेल्टर: आवारा और लावारिस कुत्तों के रहने के लिए खुला और सुरक्षित वातावरण दिया जाएगा।

​आगरा में ‘डॉग बाइट’ की घटनाओं पर लगेगा लगाम

​शहर में वर्तमान में कुत्तों की संख्या एक लाख के पार पहुंच चुकी है। आए दिन राहगीरों और बच्चों पर कुत्तों के हमले की खबरें आती रहती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नसबंदी की धीमी गति के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी। 11 एकड़ में बनने वाले इस विशाल केंद्र से उम्मीद जगी है कि कुत्तों को सही समय पर वैक्सीन और ट्रीटमेंट मिलेगा, जिससे उनकी आक्रामकता कम होगी और जनता में फैला डर भी खत्म होगा।

​क्या कहते हैं अधिकारी?

​नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अजय कुमार सिंह के अनुसार, शूटिंग रेंज की जमीन इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी रूप से काफी उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि जमीन की उपलब्धता और तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद जल्द ही इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। शासन से हरी झंडी मिलते ही बजट आवंटन और निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

​पशु प्रेमियों और जनता के लिए एक राहत भरी खबर

​आगरा के इस कदम की पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाएं भी सराहना कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुत्तों को हटाना समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ वातावरण देना और वैज्ञानिक तरीके से उनकी आबादी को नियंत्रित करना ही एकमात्र रास्ता है।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​आगरा नगर निगम का यह 11 एकड़ वाला शेल्टर होम प्रोजेक्ट शहर की स्वच्छता और सुरक्षा दोनों के लिहाज से क्रांतिकारी कदम है। यदि यह योजना समय पर धरातल पर उतरती है, तो आगरा उत्तर प्रदेश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा, जहाँ पशु कल्याण और जन सुरक्षा के बीच एक सटीक संतुलन बिठाया गया है।