आगरा। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुए दर्दनाक बस हादसे की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि ताजनगरी आगरा से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। एत्मादपुर क्षेत्र में स्कूल से घर लौट रही एक 9 वर्षीय मासूम बच्ची के लिए बस का सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ। जर्जर हो चुकी बस के फर्श ने मासूम का साथ छोड़ दिया और वह सीधे मौत के पहिए के नीचे जा गिरी।

​कबाड़ बस और फर्श पर रखा लकड़ी का तख्ता: मौत का जाल

​हादसा थाना एत्मादपुर क्षेत्र के नगला लाले इलाके का है। नगला लाले निवासी ब्रह्मजीत की 9 साल की बेटी नैना, जो आरबीएस स्कूल में कक्षा एक की छात्रा थी, रोज की तरह स्कूल गई थी। दोपहर में छुट्टी के बाद वह अपनी बड़ी बहन परी के साथ बस में बैठकर घर लौट रही थी।

​परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि जिस बस में मासूमों को बिठाया जा रहा था, वह किसी ‘कबाड़’ से कम नहीं थी। बस का लोहे का फर्श पूरी तरह गल चुका था। लापरवाही की पराकाष्ठा देखिए कि गले हुए फर्श को ठीक कराने के बजाय स्कूल प्रबंधन ने उस पर लकड़ी का एक कच्चा तख्ता रख दिया था। जैसे ही बस सड़क पर दौड़ने लगी, कंपन के कारण वह तख्ता अपनी जगह से खिसक गया और नैना अचानक बस के नीचे सड़क पर जा गिरी। अगले ही पल बस का पिछला पहिया मासूम को कुचलता हुआ निकल गया।

​”दादी, आने के बाद साथ खेलूंगी…” अब बस यादें रह गईं

​इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया है। नैना की मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। उसकी दादी पांचों देवी और मां सोनम बदहवास हैं। रोते-रोते दोनों बार-बार बेहोश हो रही हैं।

​दादी की सिसकियां पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने वाली हैं। वे रोते हुए बस एक ही बात कह रही थीं, “सुबह कह रही थी कि दादी स्कूल से आने के बाद तुम्हारे साथ खेलूंगी… मेरी लाडो को वापस ला दो।” नैना के चाचा योगेश ने बताया कि नैना की बड़ी बहन परी, जो उसी स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ती है, जब रोते हुए घर पहुँची तब जाकर परिवार को अनहोनी का आभास हुआ।

​स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता: घंटों तक छिपाई बात

​मृतका के पिता ब्रह्मजीत ने स्कूल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद स्कूल की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। जब नैना काफी देर तक घर नहीं पहुंची, तो परिजनों ने स्कूल में फोन किया। तब जाकर उन्हें बताया गया कि बच्ची का ‘एक्सीडेंट’ हो गया है और उसे गोयल हॉस्पिटल ले जाया गया है।

​जब तक परिजन अस्पताल पहुंचे, तब तक मासूम नैना दम तोड़ चुकी थी। आरोप है कि स्कूल प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने के लिए काफी देर तक मामले को दबाए रखा।

​प्रशासन की कार्रवाई और सुलगते सवाल

​घटना की सूचना मिलते ही एत्मादपुर पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी आलोक कुमार ने बताया कि बच्ची के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और दोषी बस चालक व स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि:

  1. ​क्या आरटीओ (RTO) विभाग इन जर्जर बसों की फिटनेस जांच केवल कागजों पर करता है?
  2. ​क्या स्कूल प्रबंधन के लिए मासूमों की जान से ज्यादा बस की मरम्मत के पैसे कीमती हैं?
  3. ​आखिर कब तक ‘कबाड़’ बन चुकी बसें सड़कों पर बच्चों की जान लेती रहेंगी?

​निष्कर्ष

​आगरा का यह हादसा प्रशासन और स्कूल संचालकों के गाल पर एक करारा तमाचा है। एक मासूम की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि किसी ने गाड़ी के टूटे फर्श को ठीक करना जरूरी नहीं समझा। जब तक ऐसी लापरवाही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ मिसाली कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय हमेशा डरे रहेंगे।

पाठकों के लिए एक प्रश्न:

क्या आपको लगता है कि निजी स्कूलों की बसों की फिटनेस जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी होनी चाहिए जिसमें अभिभावकों को भी शामिल किया जाए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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