आगरा। ताजनगरी के संजय प्लेस इलाके में एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहां पूरा शहर आने वाले त्योहारों और शादियों की खुशियों में डूबा था, वहीं संजय प्लेस स्थित मारुति प्लाजा की छठवीं मंजिल पर नफरत और जुनून का खूनी खेल खेला जा रहा था। एक अकाउंटेंट ने अपनी ही सहकर्मी और प्रेमिका की न केवल हत्या की, बल्कि उसकी पहचान मिटाने के लिए उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। यह घटना किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है, जहाँ एक तरफ प्यार का दावा था और दूसरी तरफ रूह कंपा देने वाली हैवानियत।​

तीन साल का साथ और शादी का वो अधूरा प्रपोजल

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​मेरठ की दिविशा टेक्नोलॉजी, जिसका ऑफिस आगरा के संजय प्लेस में स्थित है, यहाँ मिंकी शर्मा (23) पिछले तीन साल से एचआर मैनेजर के तौर पर कार्यरत थीं। इसी ऑफिस में ट्रांस यमुना कॉलोनी का रहने वाला विनय राजपूत अकाउंटेंट था। तीन साल तक साथ काम करते-करते दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। लंच साथ करना, सुख-दुख साझा करना और ऑफिस के बाद साथ वक्त बिताना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था।​

पुलिस पूछताछ में विनय ने स्वीकार किया कि वह मिंकी से शादी करना चाहता था और इसके लिए उसने अपने परिवार को भी राजी कर लिया था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन पिछले छह महीनों में रिश्तों की इस गर्माहट में बर्फीली खामोशी छाने लगी।

​शक का जहर और 6 दिन की सोची-समझी प्लानिंग

विनय के मुताबिक, पिछले कुछ समय से मिंकी के व्यवहार में बदलाव आ गया था। उसे शक था कि मिंकी किसी और युवक के करीब जा रही है। इसी शक ने विनय के भीतर एक हत्यारे को जन्म दिया। उसने पुलिस को बताया कि वह पिछले छह दिनों से मिंकी को रास्ते से हटाने की योजना बना रहा था।​

23 जनवरी को जब मिंकी अपने भाई की शादी के कार्ड कूरियर करने के बहाने ऑफिस पहुंची, तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि वह अपनी मौत के करीब जा रही है। ऑफिस में विनय और मिंकी के बीच शादी और पैसों को लेकर विवाद हुआ। विनय का दावा है कि मिंकी ने शॉपिंग के लिए एक लाख रुपये मांगे और शादी से इनकार कर दिया, जिससे उसका गुस्सा बेकाबू हो गया।

​टीवी सीरियल देख रची साजिश: पहचान मिटाने के लिए काटा सिर

​आरोपी विनय ने गुस्से में आकर चाकू से मिंकी पर ताबड़तोड़ हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या करने के बाद उसने अपनी पहचान और अपराध छुपाने के लिए टीवी सीरियल्स जैसी तरकीब अपनाई। उसने मिंकी के कपड़े उतार दिए और चाकू से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। उसने धड़ को एक बैग में और सिर को दूसरे बैग में पैक किया ताकि पुलिस शिनाख्त न कर सके।​

रात के अंधेरे में वह मिंकी की ही स्कूटी पर लाश के टुकड़ों को लेकर निकला। उसने धड़ को जवाहर पुल से यमुना में फेंकने की कोशिश की, लेकिन वहां लगी लोहे की जाली बाधा बन गई। पकड़े जाने के डर से उसने धड़ को वहीं पुल पर छोड़ दिया और सिर वाला बैग लेकर झरना नाले की ओर निकल गया, जिसे उसने नाले के गहरे पानी में फेंक दिया।​

गोल्डन नेल पेंट और सीसीटीवी: ऐसे बेनकाब हुआ कातिल​

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24 जनवरी की सुबह जब पुलिस को पुल पर एक लावारिस धड़ मिला, तो शहर में सनसनी फैल गई। मृतका का चेहरा न होने के कारण शिनाख्त करना नामुमकिन था। लेकिन अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही देता है। मिंकी के हाथ के अंगूठे पर लगा ‘गोल्डन नेल पेंट’ पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बना।​

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पुलिस ने पिछले दो दिनों की गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली और परिजनों से उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नेल पेंट के बारे में पूछा। मिंकी के परिजनों ने जब घर से वही गोल्डन नेल पेंट लाकर दिखाया, तो धड़ की शिनाख्त हो गई। इसके बाद जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो भगवान टॉकीज के पास विनय स्कूटी पर एक संदिग्ध बोरा और पीठ पर बैग लटकाए नजर आया।

​कातिल का ‘डबल गेम’: रात भर परिजनों के साथ ढूंढता रहा मिंकी को

​इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू विनय का दोहरा चरित्र था। हत्या और शव को ठिकाने लगाने के बाद, विनय रात 11:30 बजे खुद मिंकी के घर पहुंच गया। उसने परिजनों को यकीन दिलाया कि मिंकी ऑफिस आई ही नहीं थी। वह रात भर मिंकी के भाई और पिता के साथ उसे अस्पतालों और रास्तों में तलाशने का नाटक करता रहा। उसने ऑफिस का ताला लगा होने का बहाना बनाकर परिजनों को गुमराह किया, ताकि किसी को उस पर शक न हो।​

निष्कर्ष: क्या समाज में घट रहा है धैर्य?

आगरा की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। एकतरफा जुनून और शक किस कदर किसी इंसान को हैवान बना सकता है, यह मामला इसका जीवंत उदाहरण है। फिलहाल, पुलिस ने विनय राजपूत को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मृतका का सिर अभी भी बरामद नहीं हो पाया है। परिजनों ने भारी मन से बिना सिर के ही धड़ का अंतिम संस्कार किया। कानून विनय को उसके किए की सजा जरूर देगा, लेकिन मिंकी के परिवार को जो घाव मिला है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी।

​पाठकों के लिए प्रश्न: आपको क्या लगता है, कार्यस्थलों (Workplaces) पर सुरक्षा और कर्मचारियों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कंपनियों को क्या कदम उठाने चाहिए? अपनी राय कमेंट में साझा करें।