आगरा के शिक्षा जगत में इन दिनों हलचल तेज है। गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के सुनहरे भविष्य को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन ने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून को सख्ती से लागू करने का मन बना लिया है। सत्र 2026-27 के लिए नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक की मुफ्त शिक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया का बिगुल फूंक दिया गया है।​

हाल ही में जिलाधिकारी अरविंद बंगारी ने प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए निजी स्कूलों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्कूल ने आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी की, तो उस स्कूल की मान्यता निरस्त करने में प्रशासन देर नहीं करेगा।

​16 फरवरी तक है आवेदन का पहला मौका​

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सत्र 2026-27 के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तारीख 16 फरवरी है, जो पहले चरण के आवेदन की अंतिम तिथि है। जिला प्रशासन ने इसे तीन चरणों में विभाजित किया है ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को इसका लाभ मिल सके।​

प्रथम चरण: 16 फरवरी तक आवेदन और 18 फरवरी को लॉटरी।​

द्वितीय चरण: 21 फरवरी से 7 मार्च तक आवेदन और 9 मार्च को लॉटरी।

​तृतीय चरण: 12 से 25 मार्च तक आवेदन और 27 मार्च को लॉटरी।

​स्कूलों की 25% सीटों पर होगा गरीब बच्चों का अधिकार

आरटीई कानून के अनुसार, प्रत्येक निजी और गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालय को अपनी प्रारंभिक कक्षाओं (नर्सरी या कक्षा 1) की कुल क्षमता का 25 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने बीएसए (Basic Shiksha Adhikari) को निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों की मैपिंग और पंजीकरण समय से पूरा कर लिया जाए ताकि पारदर्शी तरीके से सीटों का आवंटन हो सके।​

डीएम की दो-टूक: मनमानी करने वाले स्कूलों पर होगी FIR

​अक्सर देखा जाता है कि लॉटरी में नाम आने के बाद भी कई निजी स्कूल अभिभावकों को चक्कर कटवाते हैं या किसी न किसी बहाने से प्रवेश देने से इनकार कर देते हैं। इस बार आगरा प्रशासन ऐसी किसी भी मनमानी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने कड़े लहजे में कहा कि जो स्कूल नियम तोड़ेंगे, उनके खिलाफ न केवल मान्यता रद्द करने की कार्रवाई होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई जाएगी।

​”शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। कोई भी संस्थान किसी बच्चे को उसके इस हक से वंचित नहीं रख सकता। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि हर पात्र बच्चे को स्कूल की दहलीज तक पहुँचाया जाए।” – अरविंद बंगारी, जिलाधिकारी आगरा​

अभिभावकों की सहायता के लिए बनेगी ‘हेल्प डेस्क’​तकनीकी बाधाओं और जानकारी के अभाव में कई पात्र परिवार आवेदन नहीं कर पाते हैं। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) जितेंद्र गौंड ने बताया कि जिले में अभिभावकों की सहायता के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। इसके अलावा, विकास खंड स्तर पर नोडल अधिकारी भी तैनात किए गए हैं, जो आवेदन से लेकर प्रवेश तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

​कैसे करें आवेदन? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)​

अभिभावक आरटीई के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड होगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। लॉटरी निकलने के बाद आवंटित स्कूलों की सूची सार्वजनिक की जाएगी और संबंधित स्कूल को बच्चे का दाखिला लेना ही होगा।​

निष्कर्ष: शिक्षा की ओर एक मजबूत कदम

​आगरा प्रशासन की यह सख्ती शहर के उन हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके माता-पिता महंगे स्कूलों की फीस भरने में असमर्थ हैं। 16 फरवरी तक का समय पहले चरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि इस बार ‘शिक्षा का अधिकार’ सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा।​

पाठकों के लिए एक प्रश्न: क्या आपको लगता है कि निजी स्कूलों पर प्रशासन की यह सख्ती आरटीई को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में कारगर साबित होगी? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।