आगरा। ताजनगरी की आबोहवा में इस वक्त सियासी सरगर्मी चरम पर है। उत्तर प्रदेश की सत्ता और संगठन के शीर्ष चेहरे कल यानी 7 मार्च को आगरा में एक मंच पर जुटने जा रहे हैं। अवसर है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ‘ब्रज प्रांत समन्वय बैठक’ का, जिसे आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिहाज से ‘मिशन यूपी’ की आधारशिला माना जा रहा है।

​माल रोड स्थित होटल अमर में होने वाली इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की प्रबल संभावना है। हालांकि आधिकारिक कार्यक्रम की अंतिम पुष्टि का इंतजार है, लेकिन प्रशासनिक और रणनीतिक हलकों में उनके आगमन की तैयारियां जोरों पर हैं। यह बैठक केवल एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि आने वाले तीन सालों के लिए सत्ता और संगठन के बीच सामंजस्य का एक ब्लू-प्रिंट तैयार करने का माध्यम बनेगी।

​2027 का रण: बूथ स्तर तक की किलेबंदी पर जोर

​इस समन्वय बैठक का सबसे अहम एजेंडा वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्रज क्षेत्र हमेशा से सत्ता का प्रवेश द्वार रहा है। सूत्रों की मानें तो संघ और भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी इस बात पर मंथन करेंगे कि कैसे कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर कर उन्हें फिर से सक्रिय किया जाए।

​बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह की उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि संगठन अब ‘इलेक्शन मोड’ में आ चुका है। चर्चा इस बात पर केंद्रित रहेगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक कैसे पहुंचे और विपक्षी विमर्श को कैसे काट दिया जाए।

​संघ के शताब्दी वर्ष और सामाजिक समरसता का रोडमैप

​2025-26 का वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। आगरा की इस बैठक में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विस्तृत चर्चा होगी।

​संघ का लक्ष्य केवल वैचारिक विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता के जरिए समाज के हर वर्ग तक अपनी पैठ बनाना है। बैठक में इस बात पर विचार होगा कि सेवा कार्यों और सामाजिक आंदोलनों के जरिए कैसे ‘अछूते’ वर्गों को संघ और विचारधारा के साथ जोड़ा जाए।

​संगठन में बड़े बदलाव की आहट: नई कार्यकारिणी पर लगेगी मुहर?

​राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगरा की इस बैठक के बाद भाजपा की जिला और क्षेत्रीय कार्यकारिणी में बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। लंबे समय से कार्यकर्ता नई नियुक्तियों और बदलावों का इंतजार कर रहे हैं।

​बैठक में संघ के क्षेत्रीय और प्रांत प्रचारकों के साथ भाजपा नेतृत्व का सीधा संवाद होगा। माना जा रहा है कि जमीनी फीडबैक के आधार पर निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी हो सकती है और ऊर्जावान चेहरों को आगे लाया जा सकता है। समन्वय बैठक के बाद कई जिलों में नए जिलाध्यक्षों के नामों पर भी मुहर लग सकती है।

​सत्ता और संगठन के बीच ‘सेतु’ का काम करेगी यह बैठक

​अक्सर देखा गया है कि सरकार और संगठन के बीच संवाद की कमी चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। आगरा की इस समन्वय बैठक का मूल उद्देश्य इसी दूरी को खत्म करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस बैठक में शामिल होकर यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार की प्राथमिकताएं संगठन के सुझावों के अनुरूप ही तय होंगी।

​बैठक में संघ के क्षेत्रीय प्रचारक, प्रांत संघ चालक और प्रांत कार्यवाह जैसे वरिष्ठ पदाधिकारी भी अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। यह रिपोर्ट आगामी समय में सरकार की नीतियों और संगठन के कार्यक्रमों की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित होगी।

​पश्चिमी यूपी और ब्रज में नई ऊर्जा फूंकने की कोशिश

​हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रांतों में ऐसी समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। कानपुर और बुंदेलखंड के बाद अब आगरा में ब्रज प्रांत की बैठक का होना यह दर्शाता है कि भाजपा और संघ एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र की राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए, आगरा की इस बैठक के निष्कर्ष बेहद दूरगामी होंगे।

निष्कर्ष

​आगरा में होने वाली यह ब्रज प्रांत समन्वय बैठक केवल भाजपा और संघ की आंतरिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की भावी राजनीति का संकेत है। सीएम योगी आदित्यनाथ की संभावित मौजूदगी और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों का जमावड़ा यह साफ कर रहा है कि 2027 की जंग के लिए अभी से किलेबंदी शुरू हो गई है। संगठन में बदलाव और कार्यकर्ताओं को नया लक्ष्य देना ही इस बैठक का मुख्य केंद्र है।

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