आगरा। पूरे देश में रंगों का त्योहार बीते कल मनाया गया, लेकिन असली रंगत तो आज ताजनगरी के पुलिस लाइन में देखने को मिली। अक्सर गंभीर दिखने वाले और ड्यूटी पर मुस्तैद रहने वाले पुलिसकर्मियों ने आज खाकी का अनुशासन एक किनारे रखकर जमकर हुड़दंग मचाया। आगरा पुलिस लाइन में आयोजित इस होली मिलन समारोह में सिर्फ गुलाल नहीं उड़ा, बल्कि यहाँ कीचड़, पानी और ‘कपड़ा फाड़’ होली का वो नजारा दिखा जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया।

​पुलिस लाइन में बना 20 फीट का ‘होली तालाब’

​इस साल आगरा पुलिस की होली का मुख्य आकर्षण पुलिस लाइन के मैदान में बनाया गया एक विशाल गड्ढा रहा। करीब 20 फीट चौड़ा और गहरा यह गड्ढा किसी खास मकसद से तैयार किया गया था। इसमें पानी भरकर उसे कीचड़ और रंगों से सराबोर कर दिया गया। होली की मस्ती में डूबे पुलिसकर्मी एक-दूसरे को पकड़कर इस गड्ढे में पटकते नजर आए। यह नजारा इतना जीवंत था कि ऐसा लग रहा था मानो पुलिसकर्मी अपनी पूरे साल की थकान इस कीचड़ के खेल में मिटा रहे हों।

​’कपड़ा फाड़’ होली और डीजे की धुन पर थिरकते कदम

​होली का असली मजा तब शुरू हुआ जब लाउडस्पीकर पर होली के मशहूर गानों की धुन गूंजी। म्यूजिक के साथ ही पुलिसकर्मियों के बीच ‘कपड़ा फाड़’ होली शुरू हो गई। देखते ही देखते कई पुलिसकर्मियों के कुर्ते और टी-शर्ट हवा में उड़ते दिखाई दिए। यह ब्रज क्षेत्र की उस पारंपरिक मस्ती की याद दिलाता है जहाँ होली का मतलब केवल रंग लगाना नहीं, बल्कि पूरी तरह से सराबोर हो जाना होता है। पुलिस लाइन के चप्पे-चप्पे पर केवल अबीर-गुलाल और खुशी की लहर दिखाई दे रही थी।

​अफसरों और जवानों के बीच मिट गई दूरियां

​इस आयोजन की खास बात यह रही कि यहाँ ‘साहब’ और ‘सिपाही’ का अंतर पूरी तरह खत्म हो गया। आगरा के एडिशनल कमिश्नर केशव कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को जब पुलिसकर्मियों ने घेरा, तो उन्होंने भी दिल खोलकर जवानों के साथ होली खेली। एडिशनल कमिश्नर को गुलाल से सराबोर कर दिया गया। अधिकारियों ने भी जवानों का उत्साह बढ़ाया और उनके साथ गानों पर कदम ताल मिलाए। यह दृश्य विभाग के भीतर टीम भावना और आपसी सद्भाव का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा था।

​फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से हुई ‘वाटर कैनन’ वाली बारिश

​जब रंगों की गर्मी बढ़ी, तो उसे ठंडा करने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मैदान में उतारा गया। आमतौर पर आग बुझाने के लिए इस्तेमाल होने वाली वाटर कैनन आज ‘खुशियों की बौछार’ कर रही थी। तेज प्रेशर के साथ गिरते रंगीन पानी ने पुलिसकर्मियों के जोश को दोगुना कर दिया। भीगते हुए जवान और उनके बीच चलती हंसी-ठिठोली ने माहौल को बेहद खुशनुमा बना दिया।

​ड्यूटी के बाद सुकून के कुछ पल

​बता दें कि आम जनता की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी मुख्य त्योहार के दिन अपनी छुट्टियां त्याग कर सड़कों पर मुस्तैद रहते हैं। जब पूरा शहर होली मनाकर सो जाता है, तब अगले दिन पुलिस विभाग अपनी ‘अधिकारी होली’ मनाता है। आगरा पुलिस लाइन का यह कार्यक्रम इसी कड़ी का हिस्सा था। जवानों का कहना है कि यह एक दिन उन्हें मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाता है और एक नई ऊर्जा के साथ फिर से जनसेवा में जुटने की ताकत देता है।

निष्कर्ष:

आगरा पुलिस लाइन की यह होली न केवल मनोरंजन का साधन थी, बल्कि यह खाकी के पीछे छिपे मानवीय चेहरे को भी दर्शाती है। अनुशासन के सख्त घेरे में रहने वाले इन जवानों के लिए यह दिन खुशियों की एक ऐसी खिड़की है, जहाँ वे खुलकर जी सकते हैं। कीचड़ के गड्ढे से लेकर फटे कुर्ते तक, आज की होली आगरा पुलिस के लिए यादगार बन गई है।

पाठकों के लिए एक सवाल:

क्या आपको लगता है कि पुलिसकर्मियों के लिए साल में एक बार इस तरह के तनाव-मुक्त आयोजनों की संख्या बढ़नी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।