
मात्र सात दिनों के भीतर डीजल की खपत लगभग दोगुनी हो गई है। यह वृद्धि किसी औद्योगिक मांग के कारण नहीं, बल्कि लोगों के मन में बैठे ‘कल तेल नहीं मिलेगा’ वाले डर का परिणाम है। लोग अपनी जरूरत से ज्यादा स्टॉक करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर दबाव बढ़ गया है।
पश्चिम एशिया युद्ध और अफवाहों का बाजार
इस अघोषित कटौती की जड़ें सात समंदर पार पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से जुड़ी हैं। सोशल मीडिया पर फैल रही खबरों और चर्चाओं ने लोगों को डरा दिया है कि आने वाले दिनों में कच्चा तेल (Crude Oil) भारत नहीं आ पाएगा और कीमतें आसमान छू लेंगी। हालांकि, प्रशासन और तेल कंपनियों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि भंडार पर्याप्त है, लेकिन पैनिक बाइंग के कारण टैंकरों के आने की रफ्तार और खपत के बीच का संतुलन बिगड़ गया है।
जिले में स्टॉक की क्या है स्थिति?
आगरा जिले में कुल 374 पेट्रोल पंप हैं। शुक्रवार तक के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में डीजल का स्टॉक 4387 किलो लीटर और पेट्रोल का 2819 किलो लीटर दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्टॉक कम नहीं है, लेकिन यदि हर व्यक्ति एक साथ टंकी फुल कराने पहुंचेगा, तो रसद प्रणाली का चरमराना तय है। शहर के कुछ प्रमुख पंपों को अस्थायी रूप से इसलिए बंद करना पड़ा ताकि नए टैंकर आने तक कुछ रिजर्व स्टॉक बचा कर रखा जा सके।
आम आदमी की जेब और सफर पर असर
इस संकट ने सबसे ज्यादा उन लोगों को प्रभावित किया है जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। डिलीवरी बॉयज, सेल्समैन और ऑफिस जाने वाले लोग परेशान हैं। 1000 रुपये के पेट्रोल में बड़ी कारें कुछ ही किलोमीटर चल पाती हैं, ऐसे में उन्हें बार-बार पेट्रोल पंप के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों के लिए भी यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि खेती के सीजन में डीजल की उपलब्धता अनिवार्य होती है।
200 और 1000 का ‘फिक्स’ फॉर्मूला: पंपों पर लगी पाबंदियां
आगरा के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे एमजी रोड, बोदला और फतेहाबाद रोड स्थित पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई पंप संचालकों ने तेल खत्म होने के डर से बिक्री की सीमा तय कर दी है। टू-व्हीलर सवारों को अधिकतम 200 रुपये का पेट्रोल दिया जा रहा है, वहीं चार पहिया वाहनों (कारों) के लिए यह सीमा 1000 रुपये तय की गई है।
पंपों पर तैनात कर्मचारी ग्राहकों को समझाते थक रहे हैं कि सप्लाई कम है, इसलिए सबको थोड़ा-थोड़ा तेल दिया जा रहा है ताकि किसी का काम न रुके। कई छोटे पंपों पर तो ‘स्टॉक खत्म’ के बोर्ड भी लटकते नजर आए, जिससे आम जनता के बीच अफरा-तफरी का माहौल है।



