आगरा। ताजनगरी के ग्रामीण अंचल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने हर माता-पिता के दिल को झकझोर कर रख दिया है। आगरा के पिनाहट ब्लॉक के अतैयरपुरा गांव में एक 6 वर्षीय मासूम बच्चे की कुत्ते के काटने के 23 दिन बाद रेबीज संक्रमण के कारण दर्दनाक मौत हो गई। नर्सरी में पढ़ने वाले इस मासूम की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि संक्रमण उसके मस्तिष्क तक पहुंच चुका था।​

घर के बाहर खेलते समय हुआ था हमला​

पिनाहट के अतैयरपुरा निवासी कुंवर सिंह का छह वर्षीय पुत्र अनिस उर्फ छोटू नर्सरी का छात्र था। कड़ाके की ठंड और स्कूल की छुट्टियाँ होने के कारण अनिस 9 जनवरी को अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ते ने उस पर अचानक हमला कर दिया। कुत्ते ने मासूम के सिर और चेहरे पर गहरे घाव कर दिए थे।​

परिजनों ने आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया, जहाँ उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन की दो डोज़ भी दी गईं। लेकिन घाव चेहरे और सिर के पास होने के कारण वायरस को शरीर में फैलने के लिए बहुत कम समय मिला।​

26 जनवरी को बिगड़ी तबीयत: दिखने लगे थे रेबीज के लक्षण​

इलाज के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन 26 जनवरी को अचानक अनिस की तबीयत बिगड़ने लगी। मासूम के मुंह से लार टपकने लगी और वह पानी व रोशनी को देखकर डरने लगा। उसकी हरकतें सामान्य बच्चों जैसी नहीं रही थीं। घबराए परिजन उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे।​

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A.i : इमेज़

डॉक्टरों ने लक्षणों को देखते हुए तुरंत रेबीज की आशंका जताई और उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 1 फरवरी की सुबह अनिस ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे गांव में मातम और दहशत का माहौल है।

​क्यों जानलेवा साबित हुआ कुत्ता काटना?

​विशेषज्ञों के अनुसार, रेबीज का वायरस नसों के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचता है। अनिस के मामले में कुत्ते ने उसके चेहरे और सिर पर काटा था। चूंकि चेहरा मस्तिष्क के बहुत करीब होता है, इसलिए वायरस को नसों के जरिए दिमाग तक पहुंचने में बहुत कम समय लगा।

​डॉक्टरों का कहना है कि जब कुत्ता शरीर के ऊपरी हिस्सों (गर्दन, चेहरा या सिर) पर काटता है, तो साधारण वैक्सीन के साथ-साथ इम्यूनोग्लोबिन का इंजेक्शन लगाना अनिवार्य होता है। यह इंजेक्शन वायरस को वहीं बेअसर करने में मदद करता है। अनिस के मामले में शायद संक्रमण की गंभीरता का सही आकलन समय पर नहीं हो सका।​

आगरा में बढ़ रहा है आवारा कुत्तों का आतंक

​यह कोई इकलौती घटना नहीं है। आगरा शहर और ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दिन औसतन 300 से अधिक लोग एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। पिनाहट, बाह, खेरागढ़ और शमशाबाद जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। निजी अस्पतालों में भी रोजाना दर्जनों लोग डॉग बाइट की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जो प्रशासन की नसबंदी और टीकाकरण अभियानों की पोल खोलता है।​

कुत्ते के काटने पर क्या करें और क्या न करें?​

रेबीज एक शत-प्रतिशत जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही समय पर बचाव से इसे टाला जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:​

तुरंत सफाई: कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव को बहते हुए साफ पानी और साबुन से कम से कम 10-15 मिनट तक धोएं। साबुन का क्षार वायरस को नष्ट करने में मदद करता है।

​देशी नुस्खों से बचें: घाव पर मिर्च, हल्दी, मिट्टी या तेल न लगाएं। इससे संक्रमण और अधिक फैल सकता है।​वैक्सीन का पूरा कोर्स: डॉक्टर के पास जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का पूरा कोर्स करवाएं। डोज बीच में न छोड़ें।

इम्यूनोग्लोबिन: यदि घाव गहरा है या चेहरे/सिर पर है, तो डॉक्टर से इम्यूनोग्लोबिन इंजेक्शन के बारे में जरूर पूछें।​

कुत्ते की निगरानी: जिस कुत्ते ने काटा है, उस पर 10 दिनों तक नजर रखें। यदि वह कुत्ता अजीब व्यवहार करे या मर जाए, तो समझ लें कि उसे रेबीज था। ऐसे में इलाज में रत्ती भर भी देरी न करें।

​निष्कर्ष​ :- अनिस की मौत ने हमें यह चेतावनी दी है कि आवारा कुत्तों की समस्या को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रशासन को जहां नसबंदी अभियान तेज करने की जरूरत है, वहीं आम जनता को भी प्राथमिक उपचार और रेबीज के प्रति जागरूक होना होगा। याद रखें, जानकारी ही बचाव है।​

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि स्थानीय प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने में विफल रहा है? अपने विचार कमेंट बॉक्स में साझा करें।