आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप जाए। थाना फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव नगला मानसिंह में गुरुवार की शाम खुशियां मातम में बदल गईं। एक किसान परिवार जो साल भर की मेहनत की फसल ‘सरसों’ को घर लाने की तैयारी कर रहा था, उसी फसल की मड़ाई (थ्रेसिंग) के दौरान उनके 2 साल के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत हो गई।

​यह हादसा इतना अचानक और भयावह था कि जब तक लोग कुछ समझ पाते, थ्रेशर मशीन ने परिवार के इकलौते वारिस को हमेशा के लिए छीन लिया।

​तिरपाल बना काल: कैसे हुआ यह भयानक हादसा?

​नगला मानसिंह गांव के निवासी आकाश गुरुवार को अपने खेत पर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सरसों की मड़ाई कर रहे थे। थ्रेशर मशीन चल रही थी और चारों तरफ धूल और सरसों के दानों की गहमागहमी थी। आकाश का 2 साल का बेटा, ‘मानव’, मशीन के पास ही बिछी एक तिरपाल पर लेटा हुआ था। परिजनों को अंदाजा भी नहीं था कि जिस तिरपाल को उन्होंने बच्चे के आराम के लिए बिछाया है, वही उसकी मौत का कारण बन जाएगी।

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मड़ाई के दौरान अचानक मशीन के खिंचाव के कारण वह तिरपाल तेजी से अंदर की ओर खिंचने लगा। तिरपाल पर लेटा हुआ मासूम मानव भी उसी वेग के साथ मशीन के कटर की चपेट में आ गया।

​चीख-पुकार के बीच थम गई सांसें

​जैसे ही बच्चा मशीन की ओर खिंचा, वहां मौजूद परिजनों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में शोर मचाया गया और ट्रैक्टर को बंद किया गया। परिजन बदहवास होकर मशीन की ओर दौड़े और मासूम को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मशीन के कटर ने बच्चे के शरीर को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया था।

​परिजन खून से लथपथ मासूम को लेकर अस्पताल की ओर भागे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इकलौते बेटे की मौत की खबर मिलते ही पिता आकाश और मां बेसुध हो गए। गांव में जिसने भी इस मंजर के बारे में सुना, उसकी आंखों में आंसू आ गए।

​इकलौता बेटा था मानव, बुझ गया घर का दीया

​मृतक मासूम मानव अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। परिजनों ने बताया कि वह पूरे परिवार की आंखों का तारा था। किसान परिवार ने बड़े लाड़-प्यार से उसे पाल था और घर में उसकी किलकारियां गूंजती रहती थीं। लेकिन एक पल की चूक और मशीनी लापरवाही ने उस हंसते-खेलते घर को उम्र भर का गम दे दिया। गुरुवार रात से ही गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला है और पूरे नगला मानसिंह गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

​कृषि सीजन में मशीनों के इस्तेमाल में बरतें सावधानी

​यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि उन तमाम किसानों के लिए एक चेतावनी भी है जो वर्तमान में रबी की फसलों (सरसों और गेहूं) की मड़ाई के काम में जुटे हुए हैं। थ्रेशर मशीनें बेहद शक्तिशाली और खतरनाक होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  1. बच्चों को दूर रखें: मड़ाई के दौरान बच्चों को मशीन के आसपास बिल्कुल न आने दें। धूल और शोर की वजह से अक्सर बच्चे का मूवमेंट पता नहीं चल पाता।
  2. ढीले कपड़े और तिरपाल: थ्रेशर के पास कभी भी ढीले कपड़े पहनकर न जाएं और तिरपाल या बोरी जैसी चीजों को मशीन के इनलेट (जहाँ से फसल डाली जाती है) से सुरक्षित दूरी पर रखें।
  3. सुरक्षा जाल (Safety Guard): हमेशा मशीन के कटर और बेल्ट पर सुरक्षा जाल का उपयोग करें।
  4. थकान में काम न करें: अक्सर किसान रात-रात भर जागकर मड़ाई करते हैं, जिससे एकाग्रता की कमी होती है और हादसे की संभावना बढ़ जाती है।

​निष्कर्ष: क्या हम अब भी नहीं चेतेंगे?

​आगरा की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिक मशीनों ने हमारा काम तो आसान कर दिया है, लेकिन जरा सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत मांग सकती है। मानव की मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है। प्रशासन और कृषि विभाग को भी ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनी सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि फिर किसी ‘मानव’ की जान इस तरह न जाए।