
आगरा। उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र, विशेषकर आगरा के आलू किसानों के लिए एक ऐतिहासिक घड़ी आ गई है। लंबे समय से प्रतीक्षित ‘अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र’ (International Potato Center – CIP) के निर्माण की बाधाएं अब पूरी तरह दूर हो गई हैं। ताजनगरी के सींगना में बनने वाले इस विश्वस्तरीय केंद्र के लिए भारत सरकार के उपक्रम एनबीसीसी (NBCC) इंडिया लिमिटेड ने ₹33.57 करोड़ का ई-टेंडर जारी कर दिया है।
यह परियोजना न केवल आगरा बल्कि पूरे उत्तर भारत के कृषि परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है। फतेहपुर सीकरी के सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने इस विकास कार्य की पुष्टि करते हुए इसे किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक ‘क्रांतिकारी कदम’ बताया है।
12 महीने में बनकर तैयार होगा आधुनिक परिसर
सांसद राजकुमार चाहर के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा। लक्ष्य रखा गया है कि कार्य शुरू होने के महज 12 महीने (1 साल) के भीतर यह केंद्र पूरी तरह बनकर तैयार हो जाए। यह केंद्र एशिया का अपनी तरह का इकलौता संस्थान होगा, जो सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आलू की नई किस्मों और तकनीक पर काम करेगा।
परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹33,57,53,427 (लगभग 33.57 करोड़ रुपये) तय की गई है। इसके लिए इच्छुक और पात्र ठेकेदार 27 मार्च 2026 की सुबह 11:00 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
हाई-टेक सुविधाओं से लैस होगी लैब और इंफ्रास्ट्रक्चर
सींगना में बनने वाला यह केंद्र केवल एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान का संगम होगा। जारी टेंडर के विवरण के अनुसार, इस परिसर में निम्नलिखित सुविधाएं विकसित की जाएंगी:
- मुख्य प्रयोगशाला भवन (G+1): यहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब होगी जहाँ आलू के रोगों और जेनेटिक्स पर शोध होगा।
- फार्म मैनेजमेंट एवं कार्यालय: ग्राउंड फ्लोर पर प्रशासनिक कार्यों और प्रक्षेत्र प्रबंधन के लिए समर्पित विंग होगी।
- स्मार्ट सुविधाएं: पूरे परिसर में HVAC सिस्टम (सेंट्रल एयर कंडीशनिंग), CCTV निगरानी, LAN/IP EPABX नेटवर्किंग और उन्नत फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
- एक्सटीरियर डेवलपमेंट: परिसर के भीतर सड़कों का निर्माण, लैंडस्केपिंग और जल निकासी की आधुनिक व्यवस्था की जाएगी।
आगरा बनेगा ‘ग्लोबल पोटैटो हब’: किसानों को क्या होगा लाभ?
आगरा, मथुरा, हाथरस, फिरोजाबाद और अलीगढ़ के बेल्ट को ‘पोटैटो बास्केट’ कहा जाता है। इस केंद्र के बनने से स्थानीय किसानों को मिलने वाले लाभों की सूची लंबी है:
- उन्नत बीज उत्पादन: अब तक किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज के लिए दूसरे राज्यों या केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब आगरा का किसान खुद उन्नत बीज तैयार कर दुनिया भर में निर्यात कर सकेगा।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: आलू में लगने वाले रोगों (जैसे झुलसा रोग) से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर शोध होगा, जिससे फसल बर्बादी कम होगी।
- अंतरराष्ट्रीय तकनीक: पेरू स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के सहयोग से यहाँ की मिट्टी के अनुकूल नई किस्मों का विकास किया जाएगा।
- आर्थिक मजबूती: जब किसान का उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी, तो स्वाभाविक रूप से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल आएगा।
बाधाएं हुईं दूर, सांसद ने जताया पीएम और सीएम का आभार
परियोजना में आ रही देरी पर विराम लगाते हुए सांसद राजकुमार चाहर ने कहा, “इस प्रोजेक्ट के मार्ग में जो भी तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं थीं, उन्हें केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से दूर कर लिया गया है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने आगरा के किसानों के इस सपने को हकीकत में बदला।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केंद्र केवल शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आगरा को वैश्विक कृषि मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा। यहाँ विकसित होने वाली तकनीक से न केवल भारत, बल्कि अन्य एशियाई देशों के किसान भी लाभान्वित होंगे।
टेंडर प्रक्रिया की महत्वपूर्ण तिथियां
यदि आप इस निर्माण परियोजना से संबंधित तकनीकी विवरण देखना चाहते हैं, तो एनबीसीसी के पोर्टल पर जा सकते हैं:
- ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 27 मार्च 2026 (सुबह 11:00 बजे)
- तकनीकी बोली (Technical Bid) खोलना: 27 मार्च 2026 (दोपहर 11:30 बजे)
- EMD (अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट): ₹33.57 लाख
निष्कर्ष (Conclusion)
सींगना का अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र आगरा के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाला है। ₹33.57 करोड़ का यह निवेश केवल ईंट-पत्थर की इमारत में नहीं, बल्कि लाखों किसानों के भविष्य में किया जा रहा है। 12 महीने बाद जब यह केंद्र क्रियाशील होगा, तो आगरा का आलू न केवल देश की मंडियों में बल्कि विदेशों के सुपरमार्केट में भी अपनी धाक जमाएगा।
पाठकों के लिए प्रश्न: क्या आपको लगता है कि इस अंतरराष्ट्रीय केंद्र के बनने के बाद आगरा के आलू किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और उन्हें अपनी फसल का सही दाम मिल पाएगा? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।



