
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के एत्मादपुर में हुए उस रूह कंपा देने वाले हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें 9 वर्षीय मासूम नैना की जान चली गई। इस मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। अपनी जर्जर ‘खटारा’ बस से एक मासूम की जिंदगी छीनने वाला आरोपी स्कूल प्रबंधक और चालक नरेंद्र सिंह अब पुलिस की गिरफ्त में है। पुलिस ने उसे शिकोहाबाद स्थित उसकी ससुराल से उस वक्त दबोचा, जब वह ट्रेन पकड़कर राज्य से बाहर भागने की योजना बना रहा था।
जर्जर बस और ‘जुगाड़’ ने ली मासूम की जान
हादसे की कहानी किसी भी माता-पिता का कलेजा चीर देने वाली है। एत्मादपुर के नगला लाले निवासी दूध व्यापारी ब्रह्मजीत की बेटी नैना, भागूपुर स्थित आरबीएस (RBS) उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा थी। बुधवार दोपहर जब स्कूल की छुट्टी हुई, तो नैना अपनी छोटी बहन और अन्य बच्चों के साथ घर लौट रही थी।
जिस बस में नैना सवार थी, उसकी हालत इतनी खराब थी कि फर्श पूरी तरह टूटा हुआ था। स्कूल प्रबंधक नरेंद्र सिंह, जो खुद बस चला रहा था, उसने मरम्मत कराने के बजाय टूटे फर्श पर लकड़ी का एक पटरा रख दिया था। जैसे ही बस नगला बिहारपुर मोड़ के पास एक स्पीड ब्रेकर से उछली, वह पटरा हट गया और नैना बस के नीचे सड़क पर गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मासूम करीब 10 मीटर तक घिसटती चली गई और सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
ससुराल में छिपा था आरोपी, पुलिस ने बिछाया जाल
हादसे के बाद से ही आरोपी नरेंद्र सिंह फरार चल रहा था। पुलिस की तीन टीमें लगातार उसकी तलाश में दबिश दे रही थीं। एडीसीपी पश्चिमी जोन, आदित्य सिंह ने बताया कि मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि नरेंद्र शिकोहाबाद में अपनी ससुराल में छिपा बैठा है।
बृहस्पतिवार की आधी रात को जब पुलिस टीम शिकोहाबाद स्टेशन रोड पहुंची, तो आरोपी वहां से ट्रेन पकड़कर भागने की फिराक में था। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
12 साल से बिना रजिस्ट्रेशन दौड़ रही थी ‘मौत की बस’
इस हादसे ने शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग (RTO) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि जिस बस से नैना की मौत हुई, वह पिछले 12 वर्षों से बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन और फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़कों पर दौड़ रही थी।
हैरानी की बात यह है कि मासूम के पिता ब्रह्मजीत ने कई बार स्कूल प्रबंधक को बस की खस्ताहाल स्थिति के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन प्रबंधक ने हर बार उनकी बातों को अनसुना कर दिया। इस बड़ी लापरवाही पर शासन ने भी कड़ा रुख अपनाया है और परिवहन विभाग के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
गैर-इरादतन हत्या की धारा में मामला दर्ज
शुरुआत में इस मामले को महज एक दुर्घटना के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन आरटीओ की रिपोर्ट और प्रबंधक की घोर लापरवाही को देखते हुए पुलिस ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। नैना के पिता की तहरीर पर दर्ज प्राथमिकी में अब ‘गैर-इरादतन हत्या’ (धारा 105, BNS) की धारा जोड़ी गई है। पुलिस का कहना है कि प्रबंधक को पता था कि बस की हालत जानलेवा है, इसके बावजूद उसने बच्चों की जान जोखिम में डाली।
गांव में मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
नगला लाले गांव में आज भी चूल्हे नहीं जले हैं। नैना की मां बेसुध है और बार-बार अपनी बेटी को पुकार रही है। वहीं, नैना की छोटी बहन, जिसकी आंखों के सामने यह पूरी घटना हुई, वह सदमे में है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या है। मासूम की मौत ने स्कूल बसों की सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
निष्कर्ष (Conclusion)
नैना की मौत का मामला समाज और प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल है। एक आरोपी की गिरफ्तारी शायद उस परिवार का दर्द कम न कर सके जिसने अपनी लाड़ली को खोया है, लेकिन यह उन भ्रष्ट अधिकारियों और लापरवाह स्कूल प्रबंधकों के लिए एक कड़ा संदेश जरूर है जो चंद पैसों के लिए मासूमों की जान दांव पर लगाते हैं। अब समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश के हर जिले में स्कूल बसों की सघन जांच हो, ताकि फिर किसी ‘नैना’ को अपनी जान न गंवानी पड़े।
पाठकों के लिए एक प्रश्न:
क्या आपको लगता है कि केवल स्कूल प्रबंधक की गिरफ्तारी काफी है, या उन अधिकारियों पर भी आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए जिन्होंने 12 साल तक इस अवैध बस को सड़क पर चलने दिया? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।



