
आगरा। उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा से धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ई-कॉमर्स कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके डिलीवरी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ पार्सल डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों ने ही अपनी कंपनी के विश्वास को तार-तार करते हुए करीब 35 लाख रुपये का बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा कर डाला। शातिर डिलीवरी बॉयज ने एक-दो नहीं, बल्कि 1300 से अधिक पार्सलों में हेरफेर की। जब सिस्टम का डेटा खंगाला गया, तब इस पूरे खेल की परतें खुलीं।
डेटा के फेरबदल से रची गई साजिश
पूरा मामला आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत UPSIDC साइट-सी का है। यहाँ स्थित ‘हैरिक्सन ओवरसीज’ और ‘पीपल्स एक्सपोर्ट’ नाम की फर्में फ्लिपकार्ट (Flipkart) और मिंत्रा (Myntra) जैसी प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ बतौर रजिस्टर्ड सेलर जुड़ी हुई हैं। इन फर्मों के संचालक गिरीश पिप्पल ने बताया कि उनकी कंपनी से रिटर्न होने वाले पार्सलों की जिम्मेदारी कुछ फील्ड एग्जीक्यूटिव्स पर थी।
नियम के मुताबिक, जब भी कोई डिलीवरी एजेंट रिटर्न शिपमेंट (वापस आने वाला सामान) लेकर आता है, तो उसे वन टाइम पासवर्ड (OTP) के जरिए उसकी पुष्टि करनी होती है। लेकिन इन कर्मचारियों ने तकनीक और सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर कागजों और डिजिटल रिकॉर्ड में तो डिलीवरी पूरी दिखा दी, मगर असलियत में वे सामान कंपनी तक पहुँचा ही नहीं रहे थे।
1300 पार्सल ‘गायब’, 35 लाख का नुकसान
धोखाधड़ी का यह सिलसिला पिछले करीब तीन महीनों से चल रहा था। संचालक को शक तब हुआ जब उन्हें मुनाफे और स्टॉक में भारी अंतर दिखने लगा। 16 फरवरी को जब कंपनी के इंटरनल डेटा की बारीकी से जांच की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।
जांच में पाया गया कि सिस्टम में तो सभी पार्सल डिलीवर दिखाए जा रहे थे, लेकिन फिजिकल स्टॉक (वास्तविक सामान) गायब था। उदाहरण के तौर पर, 14 फरवरी को रिकॉर्ड में 51 पार्सल डिलीवर होने चाहिए थे, लेकिन जब गिनती की गई तो ऑफिस में केवल 27 पार्सल ही मिले। यानी एक ही दिन में 24 पार्सल गायब कर दिए गए। पिछले तीन महीनों का हिसाब लगाने पर पता चला कि आरोपियों ने कुल 1300 पार्सलों का गबन किया है, जिसकी कुल कीमत करीब 35 लाख रुपये आंकी गई है।
कैसे पकड़े गए आरोपी?
धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद जब कंपनी के संचालक ने संदिग्ध कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया, तो वे टालमटोल करने लगे और बाद में उन्होंने आने से ही मना कर दिया। इससे संचालक का शक यकीन में बदल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत आगरा के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए जाल बिछाया और दो आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि ये कर्मचारी पार्सलों को बीच रास्ते में ही गायब कर देते थे और सिस्टम में उसे फर्जी तरीके से अपडेट कर देते थे।
पुलिस की कार्रवाई और भविष्य की चुनौतियाँ
इस हाई-प्रोफाइल मामले पर डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह में कंपनी के कुछ अन्य लोग भी शामिल थे या क्या इन पार्सलों को आगे कहीं और बेचा गया है। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों को कब्जे में ले लिया है और फरार चल रहे अन्य साथियों की तलाश जारी है।
यह मामला उन सभी ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए एक चेतावनी है जो पूरी तरह से डिजिटल डेटा पर निर्भर रहते हैं। अक्सर छोटे सेलर यह मान लेते हैं कि अगर सिस्टम ‘डिलीवर’ दिखा रहा है, तो सामान पहुँच गया होगा, लेकिन आगरा के इस कांड ने यह साबित कर दिया है कि ज़मीनी हकीकत कुछ और हो सकती है।



