आगरा। ताजनगरी के पॉश इलाके दयालबाग में पिछले दिनों एक ऐसी वारदात हुई जिसने न केवल पुलिस के होश उड़ा दिए, बल्कि शहर की आधी आबादी के मन में दहशत भर दी। सुबह की शांत हवा में सैर करने निकली एक महिला पर जिस तरह पीछे से हमला किया गया, वह किसी सामान्य अपराधी का काम नहीं, बल्कि एक ‘विभत्स मानसिकता’ का परिणाम था। आगरा पुलिस ने अब इस ‘साइको’ हमलावर को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।

​1. खौफनाक सवेरा: जब मॉर्निंग वॉक बनी जानलेवा

​22 फरवरी की वह सुबह पुष्पांजलि बाग की रहने वाली एक महिला के लिए किसी बुरे सपने जैसी थी। वह अदन बाग के पास टहल रही थीं, तभी उनका सामना भूड़ का बाग निवासी श्याम सुंदर शर्मा से हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, मामूली कहासुनी के बाद आरोपी ने अपना आपा खो दिया। महिला ने जैसे ही उसे फटकारा, आरोपी ने अपनी जेब से चाकू निकाला और महिला के प्राइवेट पार्ट पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक था कि जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, हमलावर गलियों के रास्ते ओझल हो चुका था।

​2. पुलिस की ‘डिजिटल’ जंग: 100 कैमरों ने खोला राज

​इस वारदात ने आगरा पुलिस की साख पर सवाल खड़े कर दिए थे। चूंकि आरोपी अज्ञात था, इसलिए पुलिस के पास तकनीक ही एकमात्र सहारा थी। पुलिस की स्पेशल टीम ने दयालबाग से लेकर आरोपी के भागने के संभावित रास्तों तक के 100 से अधिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को खंगाला।

​चिलचिलाती धूप और रातों की नींद हराम कर पुलिस ने एक-एक फुटेज को ‘फ्रेम-बाय-फ्रेम’ चेक किया। अंततः एक धुंधली तस्वीर मिली, जिसे मुखबिरों की मदद से पुख्ता किया गया। गुरुवार रात खासपुर चौराहे के पास जाल बिछाकर पुलिस ने श्याम सुंदर को तब गिरफ्तार किया, जब वह शहर छोड़कर भागने की तैयारी में था।

​3. सनक की इंतिहा: “हर महिला मुझे दुश्मन लगती है”

​गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी से पूछताछ हुई, तो उसकी बातों ने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। श्याम सुंदर ने बताया कि कुछ समय पहले उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। इस व्यक्तिगत आघात को उसने पूरे स्त्री समाज के प्रति नफरत में बदल लिया।

​उसने कबूल किया, “मेरी पत्नी के जाने के बाद मेरा दिमाग सुन्न हो गया था। मुझे हर महिला में अपनी पत्नी की बेवफाई दिखने लगी थी। जहाँ भी मुझे मौका मिलता, मैं महिलाओं को चोट पहुँचाने की फिराक में रहता था।” यह सनक इतनी बढ़ गई थी कि वह अपनी जेब में चाकू लेकर घूमने लगा था।

​4. दयालबाग में दहशत और सुरक्षा के इंतजाम

​दयालबाग जैसे संभ्रांत इलाके में हुई इस घटना ने स्थानीय निवासियों को झकझोर दिया है। लोगों का कहना है कि अगर अपराधी इतना ‘सनकी’ हो सकता है, तो सड़कों पर कोई भी सुरक्षित नहीं है। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद कर लिया है और उस पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस अब मॉर्निंग वॉक के समय गश्त बढ़ाने पर विचार कर रही है।

​निष्कर्ष: क्या सजा से बदलेगी मानसिकता?

​आगरा पुलिस ने अपनी मुस्तैदी से एक बड़े खतरे को टाल दिया है, क्योंकि श्याम सुंदर जैसे अपराधी किसी और को भी निशाना बना सकते थे। लेकिन यह मामला केवल अपराध का नहीं, बल्कि एक गहरे सामाजिक और मानसिक संकट का भी है। एक व्यक्ति की सनक ने पूरे शहर की शांति भंग कर दी। आरोपी को जेल भेज दिया गया है, लेकिन क्या हम अपने आसपास ऐसे ‘साइको’ व्यवहार वाले लोगों को पहचानने के लिए तैयार हैं?

आपका सुझाव: क्या आपको लगता है कि इस तरह के अपराधियों के लिए केवल जेल ही काफी है, या उनके लिए विशेष मनोवैज्ञानिक उपचार (Psychiatric help) और कड़ी निगरानी की भी जरूरत है? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।