
आगरा। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान आगरा कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभाग में विज्ञान की गूंज सुनाई दी। प्रतिवर्ष 28 फरवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर कॉलेज परिसर में दो दिवसीय विशेष व्याख्यान श्रृंखला का भव्य आयोजन किया गया। 24 और 25 फरवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल छात्रों को प्रेरित किया, बल्कि आधुनिक भौतिकी की जटिलताओं और ऐतिहासिक खोजों पर गहन संवाद का एक मंच भी तैयार किया।
मां सरस्वती की वंदना और नवाचार का संकल्प
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ 24 फरवरी को एम.एससी. (पूर्वार्द्ध) व्याख्यान कक्ष में हुआ। आगरा कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर इस ज्ञानोत्सव की शुरुआत की।
अपने संबोधन में प्रो. गौतम ने कहा कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा सरोकार सामाजिक कल्याण से होना चाहिए। उन्होंने कॉलेज स्तर पर ऐसे शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जो समाजोन्मुख हों और रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान करने की क्षमता रखते हों।
रमन प्रभाव और सर सी.वी. रमन की प्रेरक यात्रा
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का सीधा संबंध महान भारतीय वैज्ञानिक सर सी. वी. रमन की ऐतिहासिक खोज ‘रमन प्रभाव’ से है। इसी कड़ी में प्रथम वक्ता के रूप में प्रोफेसर राज कुमार वर्मा ने अपनी बात रखी। उन्होंने सर सी.वी. रमन के प्रारंभिक जीवन से लेकर उनके संघर्षों और ‘रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की स्थापना तक के सफर को जीवंत कर दिया। प्रो. वर्मा ने बताया कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद एक भारतीय वैज्ञानिक ने पूरी दुनिया को प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) का नया सिद्धांत दिया, जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।
क्वांटम यांत्रिकी और परमाणु यात्रा का सफरनामा
द्वितीय वक्ता प्रोफेसर गौरांग मिश्रा ने “क्वांटम यांत्रिकी का गणितीय दर्शन” जैसे गूढ़ विषय पर दो सत्रों में अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने क्वांटम फिजिक्स की गणितीय पेचीदगियों और वर्तमान वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में इसकी विसंगतियों को बहुत ही सरल ढंग से छात्रों के सामने रखा। कार्यक्रम के दौरान आकाश, गौरख और आर्यन पचौरी जैसे मेधावी छात्र चर्चा में काफी सक्रिय रहे।
वहीं, 25 फरवरी के सत्र में डॉ. संध्या मान ने “परमाणु की खोज से वर्तमान तक की यात्रा” विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने नील्स बोहर के परमाणु मॉडल से लेकर रिचर्ड फाइनमैन और पॉल डिराक के आधुनिक सिद्धांतों तक के क्रमिक विकास को विस्तार से समझाया।
विज्ञान के क्षेत्र में नारी शक्ति का गौरवगान
इस व्याख्यान श्रृंखला की एक विशेष कड़ी डॉ. अल्पना ओझा का वक्तव्य रहा। उन्होंने “नाभिकीय भौतिकी में अग्रणी महिलाओं का योगदान” विषय पर बोलते हुए उन महिला वैज्ञानिकों को याद किया जिन्हें अक्सर इतिहास के पन्नों में कम जगह मिली। मैरी क्यूरी के अदम्य साहस से लेकर भारतीय वैज्ञानिक बीभा चौधरी और टी. के. राधा के योगदान तक, डॉ. ओझा ने यह स्पष्ट किया कि विज्ञान की प्रगति में महिलाओं की भूमिका अपरिहार्य रही है।
शैक्षणिक बिरादरी का व्यापक सहयोग
इस आयोजन की सफलता के पीछे भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डी. वी. सिंह, प्रो. सुनीता गुप्ता, डॉ. भूपेन्द्र सिंह, डॉ. बी. के. चिकारा और प्रो. आर. एस. इनदोलिया सहित समस्त स्टाफ का कड़ा परिश्रम रहा। कॉलेज के विभिन्न विभागों से प्रो. प्रभात यादव, प्रो. संजय राय, डॉ. रचना सिंह और डॉ. गौरव कौशिक जैसे दिग्गजों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।
अंत में, विभाग द्वारा प्रभावी संचालन के बाद सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस श्रृंखला का समापन हुआ। इस तरह के आयोजन निश्चित रूप से आगरा के शैक्षणिक वातावरण में नई ऊर्जा का संचार करते हैं।



