
आगरा, 26 जनवरी :जब सुबह की पहली किरण ने आगरा कॉलेज के ऐतिहासिक गुंबदों को छुआ, तो फिजाओं में केवल एक ही गूँज थी—’जन गण मन’। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आज ताजनगरी का सुप्रसिद्ध आगरा कॉलेज राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनूठे संगम का गवाह बना। 1823 में स्थापित यह संस्थान, जिसने देश की आजादी की लड़ाई और निर्माण दोनों को देखा है, आज एक बार फिर अपनी पूरी भव्यता के साथ संविधान के प्रति निष्ठा व्यक्त करने के लिए तैयार खड़ा था।
प्रातः ठीक 9:30 बजे महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्रबंध समिति के सचिव प्रोफेसर सी. के. गौतम ने ध्वजारोहण कर समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया। तिरंगे के लहराते ही पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
गरिमामयी अतिथियों की उपस्थिति और गौरवशाली विरासत

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री शेखर कुमार यादव ने बेहद गंभीर और प्रेरणादायी विचार साझा किए। उन्होंने अपने 2024 के ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ (ब्रिटेन) के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि कैसे भारतीय संविधान और हमारी सांस्कृतिक चेतना आज वैश्विक स्तर पर सराही जा रही है।
न्यायमूर्ति यादव ने विशेष रूप से नारी सम्मान और अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता) के संदर्भ में भारतीय संस्कृति की आत्मा पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल अधिकारों की बात न करें, बल्कि संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों और नीति निदेशक तत्वों को अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा, “आगरा कॉलेज केवल एक शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि वैचारिक क्रांति की जन्मस्थली है।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने किया भावविभोर

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक हिस्सा रहा संगीत विभाग द्वारा प्रस्तुत ‘ऑपरेशन सिंदूर’। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुई एक साहसिक घटना पर आधारित इस नृत्य नाटिका ने दर्शकों की आँखों को नम कर दिया। छात्र-छात्राओं ने अपनी कला के माध्यम से सेना के त्याग और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान को जीवंत कर दिया।
इसके अलावा, संगीत विभाग के प्रियांशु कृष्ण की बाँसुरी की तान और मुरली मनोहर तिवारी के तबले की जुगलबंदी ने “पायो जी मैंने राम रतन धन पायो” भजन से वातावरण को आध्यात्मिक शांति प्रदान की। विधि संकाय की छात्रा अदिति शर्मा और सजल जैन के ओजस्वी भाषणों ने जहाँ युवाओं को प्रेरित किया, वहीं मिली शर्मा की कविता ने देशभक्ति के जज्बे को नई ऊँचाइयां दीं।
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और स्वदेशी गौरव पर जोर
जेएनयू के प्रोफेसर रामनाथ झा ने अपने संबोधन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि हम मैकाले की थोपी हुई औपनिवेशिक सोच के बंधनों को तोड़ें और अपनी भारतीय भाषा, संस्कृति और बौद्धिक परंपरा की ओर लौटें।

“वहीं, मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने अपने संबोधन में नारी सम्मान और संवैधानिक कर्तव्यों पर जोर दिया। उन्होंने अपने ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ (लंदन) के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे भारतीय संस्कृति और संविधान आज पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल अधिकारों की बात न करें, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 51A में निहित मौलिक कर्तव्यों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
‘वाणी–2025′ का विमोचन और सामूहिक संकल्प
समारोह के दौरान आगरा कॉलेज की वार्षिक पत्रिका “वाणी–2025” (द्विशताब्दी विशेषांक) का विमोचन किया गया। यह पत्रिका महाविद्यालय की 200 वर्षों की यात्रा और छात्रों की रचनात्मकता का एक दस्तावेज है।
समारोह के समापन पर प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और विशेष रूप से एनएसएस स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आगरा कॉलेज न केवल शिक्षा दे रहा है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए जिम्मेदार नागरिक भी तैयार कर रहा है।कार्यक्रम का सफल संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुनीता रानी घोष ने किया, जिनकी शब्दावली और ऊर्जा ने दर्शकों को कार्यक्रम के अंत तक बांधे रखा। अंत में, सामूहिक राष्ट्रगान के साथ इस ऐतिहासिक दिवस का गरिमामय समापन हुआ।
गौरवमयी उपस्थिति: शिक्षकों और स्टाफ का अटूट समर्पण
समारोह की सफलता में आगरा कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापकों और स्टाफ की उपस्थिति ने चार चाँद लगा दिए। इस अवसर पर उपप्राचार्य प्रोफेसर पी. बी. झा सहित महाविद्यालय के समस्त विभागों के विद्वान शिक्षक उपस्थित रहे।
प्रमुख रूप से उपस्थित प्राध्यापकगण:

कार्यक्रम में प्रोफेसर भूपाल सिंह, प्रोफेसर शशिकांत पांडे, प्रोफेसर मृणाल शर्मा, प्रोफेसर पूनम चाँद, प्रोफेसर जय श्री भारद्वाज, प्रोफेसर भूपेंद्र कुमार चिकारा, प्रोफेसर ए. के. सिंह, प्रोफेसर गौरव कौशिक, प्रोफेसर सीमा सिंह, प्रोफेसर विक्रम सिंह, प्रोफेसर उमेश कुमार, प्रोफेसर संजीव शर्मा, प्रोफेसर रिजु निगम आदि ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।
एनएसएस (NSS) नेतृत्व:
अनुशासन की कमान एनएसएस अधिकारीगण—प्रोफेसर रीता निगम, प्रोफेसर अमित अग्रवाल, प्रोफेसर नितेश शर्मा (एयर विंग), प्रोफेसर दिग्विजय पाल सिंह और प्रोफेसर कृष्णवीर सिंह ने संभाली।
विभिन्न संकायों के विद्वान:
समारोह में प्रोफेसर शिववीर सिंह, प्रोफेसर अर्चना यादव, प्रोफेसर आर. के. श्रीवास्तव, प्रोफेसर एम. एम. खान, प्रोफेसर डी. सी. मिश्रा, प्रोफेसर एस. एन. जैसल, प्रोफेसर अरुणोदय बाजपेई, प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह, प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह, प्रोफेसर संतोष कुमार सिंह, प्रोफेसर धर्मेंद्र प्रताप सिंह, प्रोफेसर डी. पी. सिंह, प्रोफेसर संध्या यादव, प्रोफेसर विवेक भटनागर, प्रोफेसर अवधेश जौहरी, प्रोफेसर गौरव प्रकाश, प्रोफेसर जावेद, प्रोफेसर वीरी सिंह जूरैल, प्रोफेसर के. के. सिंह, प्रोफेसर चंद्रशेखर शर्मा, प्रोफेसर अमित रावत, प्रोफेसर लोकेंद्र पाल सिंह, प्रोफेसर उमाकांत चौबे, प्रोफेसर डी. के. सिंह, प्रोफेसर दीपक उपाध्याय, प्रोफेसर चंद्रवीर सिंह, प्रोफेसर महावीर सिंह, प्रोफेसर सुमन कपूर, प्रोफेसर दीपा रावत, प्रोफेसर ममता सिंह, प्रोफेसर नीरा शर्मा, प्रोफेसर शेफाली चतुर्वेदी, प्रोफेसर नीरजा महेश्वरी, प्रोफेसर आशीष कुमार, प्रोफेसर मनीष शंकर तिवारी, प्रोफेसर राजीव द्विवेदी, प्रोफेसर अमित चौधरी, प्रोफेसर संध्या मान, प्रोफेसर अल्पना ओझा, प्रोफेसर जॉली सिंह, प्रोफेसर सुनीता गुप्ता, प्रोफेसर अंशु चौहान, प्रोफेसर सुनीता यादव, प्रोफेसर मनीषा दोहरे, प्रोफेसर गीता महेश्वरी, प्रोफेसर मंजू शर्मा, प्रोफेसर अनुराधा नेगी, प्रोफेसर शादा जाफरी, प्रोफेसर सारिका यादव, प्रोफेसर आनंद प्रताप सिंह, प्रोफेसर शिव कुमार सिंह, प्रोफेसर अनुराग पालीवाल, प्रोफेसर पी. के. दीक्षित, प्रोफेसर सत्यदेव शर्मा, प्रोफेसर एस. एस. खिरवार, प्रोफेसर जिनेश कुमार सिंह, प्रोफेसर दिनेश कुमार मौर्य, प्रोफेसर दिग्विजय नाथ राय, प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार, प्रोफेसर आर. पी. पाल, प्रोफेसर रवि शंकर सिंह, प्रोफेसर रंजीत सिंह, प्रोफेसर धर्मवीर सिंह, प्रोफेसर अविनाश जैन, प्रोफेसर श्याम गोविंद सिंह, प्रोफेसर आशीष तेजस्वी, प्रोफेसर विकास सिंह, प्रोफेसर केशव सिंह, प्रोफेसर गौरांग मिश्रा, प्रोफेसर महादेव सिंह, प्रोफेसर महेंद्र सिंह, प्रोफेसर मीना कुमारी, प्रोफेसर निधि जोहरी, प्रोफेसर राजेश जौहरी, प्रोफेसर अजहर अली खान, प्रोफेसर आभा शर्मा, प्रोफेसर अचिन्त वर्मा, प्रोफेसर अमरनाथ, प्रोफेसर सुरेंद्रनाथ, प्रोफेसर अमित यादव, प्रोफेसर अंश वन सक्सेना, प्रोफेसर नागेंद्र मिश्रा, प्रोफेसर अरविंद गुप्ता, प्रोफेसर अतर सिंह, प्रोफेसर भगवत स्वरूप सिंह, प्रोफेसर धनंजय कुमार सिंह, प्रोफेसर धर्मवीर सिंह यादव, प्रोफेसर हरेंद्र नाथ शर्मा, प्रोफेसर माधुरी यादव, प्रोफेसर विष्णु शर्मा, प्रोफेसर वरुण, प्रोफेसर विश्वंत गुप्ता, प्रोफेसर काजल शर्मा, प्रोफेसर ललिता सिंह, प्रोफेसर स्मिता चतुर्वेदी, प्रोफेसर निखिलेश तिवारी, प्रोफेसर प्रभात यादव, प्रोफेसर राजेश चंद्र वर्मा, प्रोफेसर राजकुमार वर्मा, प्रोफेसर रणधीर सिंह इंडोलिया, प्रोफेसर संजय शर्मा, प्रोफेसर राम विजय सिंह, प्रोफेसर राम प्रकाश पाल, प्रोफेसर रोहित पटवा, प्रोफेसर संजय कुमार राय, प्रोफेसर सुनीता द्विवेदी, प्रोफेसर स्वदेश कुमार, प्रोफेसर कमलेश शर्मा, प्रोफेसर वंदना, प्रोफेसर विनीत गुप्ता, तथा इंजीनियरिंग विभाग से प्रोफेसर यादवेंद्र शर्मा एवं प्रोफेसर अनुज पाराशर सहित अन्य सम्मानित शिक्षक मौजूद रहे।साथ ही एडवोकेट अरुण कुमार दीक्षित, राकेश उपाध्याय, बृजेश हरित, एस. के. सोनकर और मनीष देव सहित बड़ी संख्या में कार्यालय कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
आभार और विमोचन
समारोह के विशेष अवसर पर महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका “वाणी–2025” का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आगरा कॉलेज परिवार की यह एकजुटता ही देश को सशक्त बनाने का आधार है।




