
आगरा। शिक्षा की नगरी आगरा के मुकुटमणि ‘आगरा कॉलेज’ ने अपने वजूद के 203 साल पूरे कर लिए हैं। इस दो सदी से भी लंबे सफर, स्वतंत्रता संग्राम की कहानियों और बौद्धिक चेतना की जीवंत गाथा को अब दुनिया एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म के जरिए देख सकेगी। 13 अप्रैल 2026 को आगरा कॉलेज के ऐतिहासिक गंगाधर शास्त्री भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इस विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का विधिवत शुभारंभ किया गया।
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए दीप प्रज्वलन और मुहूर्त शॉट के साथ इस ऐतिहासिक परियोजना की नींव रखी। आरए मूवीज के बैनर तले बनने वाली यह फिल्म न केवल एक संस्थान की कहानी होगी, बल्कि यह भारत के बदलते स्वरूप और शैक्षिक क्रांति का एक आईना भी बनेगी।
मुहूर्त शॉट और सांस्कृतिक उल्लास
कार्यक्रम का आगाज़ माँ सरस्वती की वंदना और गणपति पूजन के साथ हुआ। जैसे ही निदेशक रंजीत सामा ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच नारियल फोड़कर फिल्म के शुभारंभ की घोषणा की, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस दौरान कॉलेज के गौरव को समर्पित एक विशेष गीत— “उत्तम शिक्षा का केन्द्र है यह आगरा कॉलेज, आगरा कॉलेज नाम है इसका”— प्रस्तुत किया गया, जिसने वहां मौजूद शिक्षकों और अतिथियों को भावुक कर दिया।
एक घंटे की फिल्म में सिमटेंगे दो सदियों के किस्से
निर्माता रंजीत सामा के अनुसार, यह डॉक्यूमेंट्री लगभग एक घंटे की होगी। इसमें 1823 से लेकर अब तक के सफर को बेहद बारीकी से फिल्माया जाएगा। फिल्म का मुख्य उद्देश्य आगरा कॉलेज की उस ज्ञान परंपरा को सहेजना है, जिसने देश को अनगिनत राजनेता, क्रांतिकारी, वैज्ञानिक और साहित्यकार दिए हैं। निर्देशक हेमंत वर्मा की देखरेख में बनने वाली इस फिल्म को अगले छह महीनों के भीतर रिलीज करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वतंत्रता संग्राम और 1857 की क्रांति का साक्षी
कार्यक्रम के संचालक प्रो. शशिकांत पांडे ने कॉलेज के उन पन्नों को पलटा जो शायद आज की पीढ़ी के लिए अनछुए हैं। उन्होंने बताया कि आगरा कॉलेज केवल एक डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं रहा, बल्कि यह 1857 की क्रांति का एक प्रमुख केंद्र था। अंग्रेजों ने इस कॉलेज की बौद्धिक शक्ति से घबराकर यहां के साहित्य को नष्ट करने और 1880 में संस्थान को बंद करने तक की साजिश रची थी।
लेकिन आगरा के जागरूक नागरिकों ने ‘बोर्ड ऑफ ट्रस्टी’ का गठन कर इस विरासत को बचाया। फिल्म में इन संघर्षों और गौरवशाली मोड़ को प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा।
”यह केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं, राष्ट्र निर्माण की धरोहर है”
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने अपने संबोधन में कॉलेज की प्रबंध समिति का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण के लिए बजट पारित किया। उन्होंने कहा, “आगरा कॉलेज की शिक्षक-शिष्य परंपरा स्वयं में एक जीवंत इतिहास है। यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगी।”
मुख्य अतिथि योगेंद्र उपाध्याय ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आगरा कॉलेज का इतिहास भारत की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विरासत को सुरक्षित रखने के लिए एक “टाइम कैप्सूल” का निर्माण भी किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य की पीढ़ियां सैकड़ों साल बाद भी अपनी जड़ों को पहचान सकें।
शूटिंग का आगाज़ और भविष्य की योजना
औपचारिक कार्यक्रम और राष्ट्रगान के समापन के बाद, डॉक्यूमेंट्री की वास्तविक शूटिंग शुरू कर दी गई। कॉलेज के विभिन्न विभागाध्यक्षों के साक्षात्कार रिकॉर्ड किए गए, जिनमें उन्होंने अपने अनुभवों और कॉलेज की विशिष्टताओं को साझा किया। फिल्म के निर्माण में लगभग 3 माह का समय लगने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे भव्य स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
इस अवसर पर कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. पी. वी. झा, प्रो. गौरव कौशिक (मीडिया प्रभारी) और सुनीता रानी घोष सहित कॉलेज का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।



