आगरा। ताजनगरी आगरा में शुक्रवार की शाम कुछ अलग होने वाली है। जब घड़ी की सुइयां शाम के 6 बजाएंगी, तो शहर के आसमान में साइरन की गूंज सुनाई देगी और देखते ही देखते पुलिस लाइन के आसपास का इलाका अंधेरे के आगोश में समा जाएगा। घबराइए नहीं, यह किसी वास्तविक खतरे का संकेत नहीं, बल्कि हवाई हमले (Air Raid) से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा की जाने वाली एक महत्वपूर्ण ‘मॉक ड्रिल’ है।​

प्रशासन की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य युद्ध जैसी आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा और विभागों के बीच आपसी समन्वय को परखना है।

​नागरिक सुरक्षा की तैयारी: 6 मिनट का ‘ब्लैकआउट’​

आगरा के जिलाधिकारी और प्रभारी नागरिक सुरक्षा की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक में इस अभ्यास की रूपरेखा तय की गई। शुक्रवार शाम 6:00 बजे से 6:06 बजे तक चलने वाली इस ड्रिल के दौरान पूरे क्षेत्र में ‘ब्लैकआउट’ किया जाएगा।​

जैसे ही साइरन की ऊँची-नीची आवाज गूंजेगी, टोरेंट पावर द्वारा चिन्हित इलाकों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। यह 6 मिनट का समय प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें बचाव दल अपनी तत्परता का प्रदर्शन करेंगे। 6 बजकर 6 मिनट पर हमले की समाप्ति का एक लंबा और तेज साइरन बजेगा, जिसके बाद जीवन सामान्य हो जाएगा और बिजली बहाल कर दी जाएगी।

​रेस्क्यू ऑपरेशन का होगा सजीव प्रदर्शन​

यह केवल अंधेरा करने तक सीमित नहीं है। इस मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस लाइन परिसर में एक युद्ध स्तर का दृश्य तैयार किया जाएगा।​

  • फंसे हुए लोगों को निकालना: नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड्स के स्वयंसेवक क्षतिग्रस्त भवनों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीक का अभ्यास करेंगे।​
  • अग्निशमन और स्वास्थ्य सेवाएं: फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग बुझाने और एम्बुलेंस घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाने का पूर्वाभ्यास करेंगी।
  • ​समन्वय: इसमें आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग और परिवहन विभाग के अधिकारी एक साथ मिलकर काम करेंगे।

बच्चों में जागरूकता: स्कूलों की भी होगी भागीदारी​

प्रशासन ने इस बार शिक्षा विभाग को भी इस मुहिम से जोड़ा है। मॉक ड्रिल के दौरान आसपास के स्कूलों के विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को आपदा प्रबंधन की बुनियादी तकनीकों से रूबरू कराना है। बच्चों को सिखाया जाएगा कि कैसे आपात स्थिति में धैर्य बनाए रखना है और साइरन के संकेतों को कैसे समझना है।​

प्रशासन की अपील: “घबराएं नहीं, सहयोग करें”​

अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक रिहर्सल है। उन्होंने पुलिस लाइन और आसपास के निवासियों से अपील की है कि वे साइरन की आवाज सुनकर घबराएं नहीं और न ही किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान दें। यह अभ्यास पूरी तरह से सुरक्षा मानकों के तहत किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शहर तैयार रहे।​

ब्लैकआउट के दौरान क्या करें और क्या न करें?

​मॉक ड्रिल को सफल बनाने के लिए नागरिकों को कुछ विशेष सावधानियों का पालन करना होगा:

​ये काम बिल्कुल न करें:​

अनावश्यक रोशनी: घर की बालकनी, छत या खिड़कियों पर लाइट न जलाएं।​

मोबाइल और टॉर्च: ब्लैकआउट के दौरान मोबाइल की फ्लैशलाइट, टॉर्च या लेजर लाइट का उपयोग करने से बचें।​

वाहन की हेडलाइट: यदि आप सड़क पर हैं, तो वाहन की हेडलाइट या डिपर का इस्तेमाल न करें, सुरक्षित स्थान पर रुक जाएं।​

छत पर न जाएं: अभ्यास के दौरान छतों या खुले स्थानों पर खड़े होकर तमाशा न देखें।​

ये काम जरूर करें:​

धैर्य रखें: परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को पहले ही सूचित कर दें ताकि वे अंधेरे से न डरें।

​सुरक्षित स्थान: साइरन बजते ही अपने घरों के अंदर रहें।​

अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी साझा न करें।