
गंभीर थायरॉइड सर्जरी के बाद संकुचित श्वास नली और 30% हार्ट पंपिंग क्षमता वाले मथुरा के मरीज का जटिल Aortic वाल्व रिप्लेसमेंट और बायपास ऑपरेशन
आगरा: चिकित्सा जगत में एक बड़ी सफलता दर्ज करते हुए, शांतिवेद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, आगरा ने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत एक अत्यंत जोखिम भरे और जटिल हृदय ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस जीवनरक्षक और दुर्लभ शल्यक्रिया का नेतृत्व प्रख्यात कार्डिओथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल ने किया।
यह केस इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि मथुरा निवासी 65 वर्षीय श्री रमेश जी का मामला ‘अत्यधिक उच्च जोखिम’ (High-Risk Cardiac Surgery) श्रेणी में आता था।
चुनौतियों से भरा था मामला
रमेश कई महीनों से गंभीर समस्याओं, जैसे – सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और अत्यधिक थकान से जूझ रहे थे। जाँच में पता चला कि उन्हें Aortic Valve Stenosis (दिल के मुख्य वाल्व का सिकुड़ना), Coronary Artery Disease (हृदय की धमनियों में कई ब्लॉकेज), और पूर्व हार्ट अटैक के कारण हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 30% रह गई थी।
इस केस को सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बनाने वाला कारण यह था कि पूर्व में हुई थायरॉयड कैंसर की शल्यक्रिया के चलते उनकी श्वास नली (Trachea) में संकुचन आ गया था। इन सभी जटिलताओं के कारण, एनसीआर क्षेत्र के कई बड़े अस्पतालों ने भी इस ऑपरेशन को करने से मना कर दिया था।
डॉ. सिंघल और टीम का साहसी कदम
अपनी विशेषज्ञता और समर्पण का परिचय देते हुए, डॉ. सुशील सिंघल और उनकी अनुभवी मेडिकल टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। ऑपरेशन के दौरान मरीज का Aortic Valve बदला गया और हृदय की अवरुद्ध धमनियों की बायपास सर्जरी (CABG) भी की गई। यह दुर्लभ संयोजन वाली एक अत्यंत सफल सर्जरी थी।
सर्जरी के बाद,रमेश अब पूर्णतः स्वस्थ हैं, अपने पैरों पर चल-फिर रहे हैं, और उन्हें संतोषजनक स्थिति में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
आयुष्मान योजना बनी संबल, विश्वस्तरीय इलाज अब छोटे शहरों में भी
इस सफल ऑपरेशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह महँगी और जटिल शल्यक्रिया आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क की गई। यह घटना न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में एक उपलब्धि है, बल्कि यह दर्शाती है कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकती हैं।
डॉ. सुशील सिंघल ने इस सफलता पर कहा, “इस प्रकार के केस में जोखिम बहुत अधिक होता है, लेकिन मरीज की दृढ़ इच्छा शक्ति और हमारी टीम के सामूहिक प्रयास से हम सफल हो पाए। यह केस सिद्ध करता है कि अब छोटे शहरों में भी विश्वस्तरीय इलाज और उच्च-जोखिम वाली सर्जरी संभव है।”इस शानदार उपलब्धि के लिए शांतिवेद हॉस्पिटल और डॉ. सिंघल की टीम को चिकित्सा जगत में व्यापक सराहना मिल रही है।




