ताजमहल से ISBT तक का सफर होगा आसान; जानें कब से शुरू होगी यात्री सेवा और कितना होगा किराया

आगरा। ताजनगरी के ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में मंगलवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। आगरा मेट्रो ने अपने प्रथम कॉरिडोर के अंतर्गत मनकामेश्वर स्टेशन से आईएसबीटी (ISBT) तक ‘अप लाइन’ पर सफलतापूर्वक ट्रायल रन पूरा कर लिया है। यह पल तब बेहद रोमांचक हो गया जब बिजलीघर (मनकामेश्वर) की लंबी टनल से निकलकर मेट्रो ट्रेन पहली बार नेशनल हाईवे पर बने एलिवेटेड ट्रैक पर पहुंची। सड़क पर चल रहे वाहनों की रफ्तार मेट्रो की इस पहली झलक को देखने के लिए थम सी गई।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ परीक्षण

यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार की देखरेख में यह ट्रायल संपन्न हुआ। इस दौरान रोलिंग स्टॉक, सिस्टम और संरचना विभाग के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ट्रैक, सिग्नलिंग और सुरक्षा मानकों का बारीकी से निरीक्षण किया।

इन स्टेशनों से होकर गुजरी ‘सफेद ट्रेन’

ट्रायल के दौरान मेट्रो ट्रेन मनकामेश्वर स्टेशन से रवाना होकर अंडरग्राउंड स्टेशनों— एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजा की मंडी और आरबीएस कॉलेज से गुजरी। इसके बाद ट्रेन जमीन से ऊपर एलिवेटेड ट्रैक पर आई और ISBT स्टेशन तक पहुंची। वर्तमान में ISBT स्टेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, इसलिए जहाँ तक ट्रैक तैयार था, वहाँ तक ट्रेन का संचालन कर तकनीकी जाँच की गई।

कब शुरू होगी सेवा और कितना लगेगा किराया?

आगरा के निवासियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे इस रूट पर सफर कब कर पाएंगे।

संभावित तिथि: यूपी मेट्रो के लक्ष्य के अनुसार, मार्च 2026 तक आईएसबीटी तक मेट्रो का विधिवत संचालन शुरू हो सकता है।

अनुमानित किराया: ताज पूर्वी गेट से आरबीएस (RBS) स्टेशन तक का किराया ₹30 से ₹40 के बीच रहने की उम्मीद है।

महत्वपूर्ण जानकारी: ठीक एक साल पहले 2023 में इसी दिन प्रायोरिटी सेक्शन (ताज ईस्ट गेट से मनकामेश्वर) पर ट्रायल हुआ था। अब अप-लाइन का ट्रायल सफल होने के बाद, जल्द ही डाउन-लाइन पर ट्रैक और सिग्नलिंग का काम पूरा कर ट्रायल किया जाएगा।

भूमिगत टनल का इंजीनियरिंग चमत्कार

भूमिगत मेट्रो का निर्माण किसी चुनौती से कम नहीं होता। इसके लिए पहले विशाल टनल बोरिंग मशीन (TBM) का उपयोग कर सुरंग बनाई जाती है। सुरंग के गोलाकार होने के कारण उस पर सीधे पटरी नहीं बिछाई जा सकती, इसलिए पहले एक समतल ‘ट्रैक स्लैब’ तैयार किया जाता है, जिसके ऊपर ‘बैलास्टलेस ट्रैक’ (बिना पत्थर वाली पटरी) बिछाई जाती है।

जाम से मिलेगी बड़ी राहत

आईएसबीटी से सिकंदरा तक के शेष हिस्से पर भी काम युद्ध स्तर पर जारी है। साथ ही दूसरे कॉरिडोर (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से आगरा के लोगों को विश्व स्तरीय परिवहन सुविधा मिलेगी और हाईवे पर लगने वाले भीषण जाम से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।