संस्कार भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदू धर्म रक्षक महावीर गोकुला को दी भावांजलि

आगरा, ब्रज की माटी के महान योद्धा और हिंदू धर्म के रक्षक वीर गोकुला सिंह के बलिदान दिवस के अवसर पर आज ताजनगरी आगरा में श्रद्धा और उत्साह का संगम देखने को मिला। ‘संस्कार भारती’ ब्रजप्रांत (जिला-आगरा) के तत्वावधान में सिकंदरा-बोदला रोड स्थित ‘निखिल कैफे’ में “प्रगीतोत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने गोकुला सिंह के अदम्य साहस को याद करते हुए उन्हें राष्ट्र का गौरव बताया।

इतिहास के अमिट तथ्य हैं वीर गोकुला: डॉ. यशोयश

कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध गायिका निशिराज द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात कवि डॉ. यशोयश ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से वीर गोकुला को नमन करते हुए कहा:

“हिंदू कुलगौरव वीर हुए, गोकुला सिंह महावीर हुए। 17वीं सदी प्राकट्य हुए, इतिहास अमिट वे तथ्य हुए।”

मुख्य अतिथियों ने साझा किए विचार

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं समीक्षक डॉ. खुशीराम शर्मा ने वीर गोकुला के बलिदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका त्याग ऐतिहासिक और अकल्पनीय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

अध्यक्षता कर रहे कवि सम्राट डॉ. राजेन्द्र मिलन ने अपने संबोधन में वीर गोकुला को राष्ट्र का अभिन्न प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गोकुला सिंह ने उस दौर में औरंगजेब की विशाल सेना के दांत खट्टे कर दिए थे, जब अत्याचार चरम पर था। मुख्य वक्ता राज बहादुर ‘राज’ ने कहा कि उनका बलिदान स्वर्ण अक्षरों में अंकित है और आने वाली पीढ़ियां सदैव उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी। अति विशिष्ट अतिथि नंदनंदन गर्ग ने उनकी देशभक्ति को अविस्मरणीय करार दिया।

काव्य पाठ से जीवंत हुआ इतिहास

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ के मार्गदर्शन और डॉ. यशोयश के कुशल संचालन में चले इस प्रगीतोत्सव में क्षेत्र के कई दिग्गज कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। काव्य पाठ करने वालों में अलका शर्मा, राज फौजदार, हरीश भदौरिया, डॉ. राजीव शर्मा ‘निस्पृह’, और रविंद्र वर्मा सहित कई नाम शामिल रहे। सभी रचनाकारों ने गोकुला सिंह के पराक्रम और उनके धर्म रक्षक स्वरूप का अपनी कविताओं में बखान किया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर चंद्रशेखर शर्मा, प्रभु दत्त शर्मा, उमाशंकर पाराशर, अनुज अनुभव, मोहन मुरारी शर्मा, नीरज शास्त्री, राज कुमार जैन, हीरेन्द्र नरवार, योगेश शर्मा, संजय कुमार, डॉ. सुषमा सिंह, रमा वर्मा, रमेश पंडित, हरीमोहन कोठिया, रामेन्द्र शर्मा, राम अवतार शर्मा, देवेन्द्र थापक, दिव्या आर्या, कुमार देव, कृपालु किंकर, विपिन चौधरी, अजय मिश्र, यतेन्द्र सोलंकी और अशोक गोयल जैसे प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ. ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।