लोकतंत्र के सामने नई चुनौतियाँ, समाधान में गांधीवाद का रास्ता

आगरा कॉलेज, आगरा – आगरा कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग ने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया, जिसका विषय था “गांधीवाद और लोकतंत्र का वर्तमान वैश्विक परिदृश्य”। इस आयोजन ने इस बात पर रोशनी डाली कि आज के दौर में जब लोकतंत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भी महात्मा गांधी के सिद्धांत कितने प्रासंगिक हैं। संगोष्ठी का उद्घाटन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने किया।

व्यक्ति की आजादी सबसे जरूरी: प्रो. हेमंत कुमार शाह

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि, लेखक और पत्रकार प्रो. हेमंत कुमार शाह ने अपने विचार रखते हुए कहा, “हमें केवल देश की नहीं, बल्कि हर एक व्यक्ति की आजादी चाहिए।” उन्होंने कहा कि गांधी का लक्ष्य सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ‘स्वराज’ था, जिसमें हर व्यक्ति आजाद हो। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब राष्ट्र भले ही आजाद हो, लेकिन व्यक्ति की आजादी खतरे में है, तब गांधी के विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। प्रो. शाह ने कहा कि अन्याय का अहिंसक प्रतिकार ही असली गांधीवाद है।

गांधी के विचार सिर्फ ‘आदर्शवादी’ नहीं, बल्कि ‘व्यावहारिक’ थे

मुख्य वक्ता प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि गांधी ने अपने विचारों से ही नहीं, बल्कि अपने कार्यों से भी दुनिया को यह दिखाया कि असमानता, संकीर्णता और लालच जैसी समस्याओं का समाधान कैसे किया जा सकता है। वहीं, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अरुणोदय वाजपेयी ने गांधी के विचारों को ‘आदर्शवादी’ या ‘काल्पनिक’ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “गांधी के विचार अत्यंत व्यावहारिक हैं।” उन्होंने बताया कि गांधी ने कांग्रेस को एक कुलीन संगठन से बदलकर एक जन-आंदोलन बनाया और ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ की नींव भी रखी।

संगोष्ठी के मुख्य विमर्श बिंदुइस संगोष्ठी में पांच प्रमुख बिंदुओं पर गहराई से चर्चा हुई:

सत्य और अहिंसा: आज की सत्ता-केंद्रित राजनीति बनाम गांधी की नैतिक राजनीति।

जनसहभागिता का संकट: लोकतंत्र में बढ़ती दूरियां और जनभागीदारी की कमी।

आर्थिक असमानता: पूंजीवाद के वर्चस्व के सामने गांधी का ग्राम स्वराज।

सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता: धार्मिक असहिष्णुता और पहचान की राजनीति की चुनौती।

वैश्विक चुनौतियाँ: जलवायु संकट, युद्ध और शरणार्थी समस्याओं पर गांधी का वैकल्पिक दृष्टिकोण।

संगोष्ठी का उद्देश्य

इस आयोजन का उद्देश्य यह था कि गांधी के सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच के संबंध को गहराई से समझा जा सके और यह देखा जा सके कि ये सिद्धांत आज भी किस तरह हमारे समाज और दुनिया को सही दिशा दिखा सकते हैं। इस दौरान कई शिक्षकों और शोधार्थियों ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिग्विजय नाथ राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संतोष कुमार सिंह ने दिया। संगोष्ठी का सफल आयोजन विभाग के प्रभारी प्रो. मृणाल शर्मा और उनकी टीम के प्रयासों से संभव हो पाया।