
स्मार्ट सिटी के सेंसर ने दर्ज किया ख़तरनाक स्तर, प्रदूषण रोकने के लिए नगर निगम सख्त
आगरा, उत्तर प्रदेश। ताज नगरी आगरा की हवा अब दिल्ली के प्रदूषण स्तर को छू रही है। शनिवार को शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने चिंताजनक आंकड़े दर्ज किए, जिसमें हाथीघाट पर AQI 423 और बाग फरजाना में 401 तक पहुँच गया। यह स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। विभव नगर, छीपीटोला चौराहा, धूलियागंज, राजपुर चुंगी जैसे अन्य क्षेत्रों में भी AQI 300 से अधिक रहा, जिसने शहर भर में एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी है।
कूड़ा जलाने पर अब नहीं बख्शे जाएंगे दोषी
आगरा में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के पीछे कूड़ा जलाने की घटनाओं को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। अपर नगर आयुक्त ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि रोक के बावजूद कूड़ा जलाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। अब ऐसे मामलों में सीधे मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। यह कदम उन लोगों के खिलाफ एक कड़ी चेतावनी है जो प्रदूषण फैलाने में योगदान दे रहे हैं।
निर्माण कार्यों पर भी कड़ाई
वायु प्रदूषण में धूल का योगदान कम करने के लिए निर्माण कार्यों पर भी सख्ती बरती जा रही है:
मेट्रो निर्माणः मेट्रो परियोजना से संबंधित निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट का उपयोग करने और नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं।
मलबे का प्रबंधनः निर्माण मलबे के ढेरों को ढक कर रखने के लिए भी सख्त आदेश दिए गए हैं, ताकि धूल उड़ने से रोका जा सके।
लापरवाही पर कार्रवाई: निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने और धूल उड़ने पर संबंधित ठेकेदारों या इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सड़कों पर छिड़काव से मिलेगी राहत ?
प्रदूषण के बढ़ते स्तर से निपटने के लिए नगर निगम ने एक और कदम उठाया है। सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के लिए 35 से अधिक वाहन लगाए गए हैं। इन वाहनों की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छिड़काव प्रभावी ढंग से हो रहा है और उड़ती धूल को नियंत्रित किया जा सके।
आगरा के नागरिकों के लिए यह एक चिंताजनक स्थिति है, खासकर संवेदनशील समूहों जैसे बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए। प्रशासन द्वारा उठाए गए ये कदम कितने प्रभावी साबित होंगे, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे कूड़ा जलाने से बचें और प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें।




