डॉ. विक्रम अग्रवाल की टीम ने जटिल सर्जरी के जरिए बाएं ब्रॉन्कस से निकाली सुई; समय पर इलाज से टला बड़ा हादसा

आगरा। चिकित्सा जगत में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जो न केवल डॉक्टरों की काबिलियत को परखते हैं, बल्कि माता-पिता के लिए एक बड़ी सीख भी छोड़ जाते हैं। ऐसा ही एक हैरतअंगेज मामला ताजनगरी आगरा के गैलेक्सी अस्पताल में सामने आया, जहाँ एक दो वर्षीय मासूम की जान पर बन आई थी। बच्चे के बाएं ब्रॉन्कस (श्वासनली की मुख्य शाखा) में एक लंबी और नुकीली सुई फंस गई थी, जिसे प्रसिद्ध पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. विक्रम अग्रवाल ने सफलतापूर्वक बाहर निकालकर उसे नई जिंदगी दी।

अनजान थे परिजन, गंभीर थी स्थिति

हैरानी की बात यह थी कि मासूम के माता-पिता को इस बात की भनक तक नहीं थी कि बच्चा सुई निगल गया है। बच्चा लगातार बेचैन था और उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो परिजन उसे लेकर गैलेक्सी अस्पताल पहुंचे।जांच के दौरान जब डॉक्टरों ने देखा कि श्वासनली की गहराई में एक नुकीली सुई धंसी हुई है, तो उनके भी होश उड़ गए। सुई का सिरा अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा सकता था, जिससे बच्चे की जान को तत्काल खतरा था।

सटीक सर्जरी और टीम वर्क की जीत

मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. विक्रम अग्रवाल ने बिना समय गंवाए ऑपरेशन का निर्णय लिया। इस बेहद जटिल प्रक्रिया को एनेस्थेटिस्ट डॉ. राकेश त्यागी की कुशल निगरानी में अंजाम दिया गया। डॉक्टरों की टीम ने अपनी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए सावधानीपूर्वक उस नुकीली सुई को बाहर निकाला।

ऑपरेशन सफल रहा और अब बच्चा पूरी तरह खतरे से बाहर है। राहत की बात यह है कि वह अब सामान्य रूप से भोजन भी ले पा रहा है।

डॉक्टर की सलाह: छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

सफल ऑपरेशन के बाद डॉ. विक्रम अग्रवाल ने अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण जागरूकता संदेश जारी किया है। उन्होंने बताया कि:

छोटे बच्चों में हर चीज को मुंह में डालने की आदत होती है, इसलिए छोटी और नुकीली चीजें उनकी पहुंच से दूर रखें।

यदि बच्चा अचानक जोर-जोर से खांसने लगे, उसे सांस लेने में दिक्कत हो या वह असामान्य रूप से बेचैन दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें।

ऐसे मामलों में घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि समय पर मिला इलाज ही जीवन बचा सकता है।