IGRS रैंकिंग में आगरा के पिछड़ने पर जिलाधिकारी सख्त, बिना समाधान ‘निस्तारण’ दिखाने वाले अधिकारियों से मांगा जवाब

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में जनशिकायतों के निस्तारण में बरती जा रही लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ने लगी है। नाला सफाई और कूड़ा उठान जैसी बुनियादी समस्याओं को अनसुना करना और बिना धरातल पर काम किए शिकायतों को फाइलों में बंद करना 11 बड़े अधिकारियों को महंगा पड़ा है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने इस ‘कागजी निस्तारण’ के खेल का पर्दाफाश करते हुए अपर नगरायुक्त सहित 11 विभागीय अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

फर्जी निस्तारण ने बिगाड़ा जिले का रिपोर्ट कार्ड

जांच के दौरान यह चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई कि कई विभागों ने आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों तक सीमित रखा। अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से बात किए बिना और समस्या का वास्तविक समाधान किए बिना ही पोर्टल पर “समाधान हो गया” की रिपोर्ट अपलोड कर दी।

प्रशासनिक लापरवाही का सीधा असर प्रदेश स्तर की रैंकिंग पर पड़ा है। दिसंबर माह की आईजीआरएस रैंकिंग में आगरा बुरी तरह पिछड़कर 42वें स्थान पर पहुंच गया है, जिसे जिलाधिकारी ने बेहद गंभीरता से लिया है।

इन अधिकारियों पर गिरी गाज

  • अपर नगरायुक्त (नगर निगम)
  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)
  • परियोजना अधिकारी (डूडा)
  • प्रभागीय वन अधिकारी (DFO)
  • जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
  • सहायक निबंधक सहकारिता
  • सहायक महानिरीक्षक निबंधन
  • जिला क्षय रोग अधिकारी
  • उप निदेशक निर्माण (मंडी परिषद)
  • जिला आबकारी अधिकारी
  • जिला डाक अधीक्षक

डीएम की सख्त चेतावनी: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं

“जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “शिकायतकर्ता की संतुष्टि ही निस्तारण का असली पैमाना है। केवल फाइलों में खानापूर्ति करने वाले अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

आगामी समीक्षा बैठक में सभी विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी और जिन अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं होंगे, उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।