
आगरा, 24 मई 2026: आज के डिजिटल और तेजी से बदलते दौर में किसी भी नए विचार, आविष्कार या रचनात्मक कार्य की सुरक्षा करना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। युवा पीढ़ी और शोधार्थियों को इसी सुरक्षा चक्र से रूबरू कराने के लिए ऐतिहासिक आगरा कॉलेज, आगरा की इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) समिति द्वारा बीते दिन यानी 23 मई 2026 को “बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) एवं पेटेंट सर्च” विषय पर एक बेहद ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के भीतर शोध की मौलिकता को बढ़ावा देना और उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
कॉलेज के विकास में नवाचार की नई सोच: प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम का मार्गदर्शन
यह पूरा कार्यक्रम महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य प्रोफेसर सी. के. गौतम के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि आधुनिक शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि छात्रों को वैश्विक स्तर पर हो रहे तकनीकी और कानूनी बदलावों की जानकारी होना भी अनिवार्य है।
कार्यक्रम में कॉलेज की आंतरिक गुणवत्ता और अकादमिक उत्कृष्टता को मजबूती देने के लिए उपप्राचार्य प्रोफेसर पी. बी. झा, प्रोफेसर सुनीता गुप्ता, IIC अध्यक्ष प्रोफेसर कल्पना चतुर्वेदी और उपाध्यक्ष प्रोफेसर आशीष कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रोफेसर रिजु निगम, प्रोफेसर संजीव शर्मा, प्रोफेसर मंजू शर्मा, डॉ. सत्यदेव, डॉ. जावेद, डॉ. अरविंद गुप्ता, डॉ. कृष्णवीर, डॉ. यशस्विता और डॉ. पारुल महाजन सहित भारी संख्या में शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं इस बौद्धिक विमर्श का हिस्सा बने।
क्या है बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)? विशेषज्ञ डॉ. शिल्पी लवानिया ने समझाया गणित
कार्यक्रम की मुख्य और विशेषज्ञ वक्ता डॉ. शिल्पी लवानिया रहीं। उन्होंने अपने व्याख्यान की शुरुआत बहुत ही सरल और व्यावहारिक भाषा में की, जिससे जटिल कानूनी विषय भी छात्रों को आसानी से समझ में आ गया। डॉ. लवानिया ने बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) असल में किसी भी व्यक्ति के दिमाग की उपज, उसके आविष्कार, लेखन या कलात्मक कृति को दिया जाने वाला एक कानूनी संरक्षण है।
”नवाचार, सृजनात्मकता और शोध कार्य किसी भी देश की प्रगति की रीढ़ होते हैं। IPR न केवल आविष्कारकों को उनके काम का मालिकाना हक देता है, बल्कि यह तकनीकी विकास और आर्थिक प्रगति को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करता है।”
— डॉ. शिल्पी लवानिया
उन्होंने व्याख्यान के दौरान IPR के विभिन्न महत्वपूर्ण स्वरूपों को विस्तार से रेखांकित किया, जिनमें शामिल हैं:
- पेटेंट (Patent): नए आविष्कारों को सुरक्षित करने के लिए।
- कॉपीराइट (Copyright): साहित्य, संगीत और कलात्मक कार्यों की सुरक्षा के लिए।
- ट्रेडमार्क (Trademark): ब्रांड नाम और लोगो की पहचान के लिए।
- औद्योगिक डिजाइन (Industrial Design): किसी उत्पाद की बनावट की सुरक्षा।
- व्यापारिक गोपनीयता (Trade Secrets): किसी कंपनी के गोपनीय फॉर्मूले या डेटा की सुरक्षा।
- भौगोलिक संकेतक (Geographical Indications – GI Tag): किसी विशेष क्षेत्र की प्रसिद्ध वस्तुओं की पहचान के लिए।
पेटेंट सर्च (Patent Search) की व्यावहारिक तकनीक: गूगल और वाइपो का कैसे करें इस्तेमाल?
व्याख्यान का सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक हिस्सा वह था, जब डॉ. शिल्पी लवानिया ने छात्रों को लाइव पेटेंट सर्च की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी नया शोध शुरू करने से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि उस विषय पर दुनिया में पहले क्या काम हो चुका है। इसे ही ‘शोध-अंतराल’ (Research Gap) की पहचान करना कहते हैं।
उन्होंने छात्रों को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर के कई प्रमुख पेटेंट सर्च टूल्स के बारे में बताया, जैसे:
- Google Patents
- WIPO PatentScope (विश्व बौद्धिक संपदा संगठन)
- InPASS (भारतीय पेटेंट उन्नत खोज प्रणाली)
- USPTO (अमेरिकी पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय)
- Espacenet (यूरोपीय पेटेंट कार्यालय)
इस दौरान उन्होंने प्रभावी पेटेंट सर्च के लिए Boolean Operators (जैसे AND, OR एवं NOT) के प्रयोग का लाइव प्रदर्शन भी किया। उन्होंने बताया कि इन कीवर्ड्स का सही संयोजन करके कैसे चंद सेकंड्स में सटीक शोध परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है और शोध की मौलिकता बनी रहती है।
एआई (AI) अटेंडेंस सिस्टम और प्रसिद्ध कानूनी मामलों से सीख
विषय को और अधिक रोचक बनाने के लिए डॉ. लवानिया ने दैनिक जीवन और आधुनिक तकनीक के उदाहरण दिए। उन्होंने ‘एआई आधारित उपस्थिति प्रणाली’ (AI-based Attendance System) और ‘स्मार्ट तकनीकों’ का उदाहरण देकर समझाया कि कैसे एक छोटा सा तकनीकी सुधार भी पेटेंट का रूप ले सकता है और आपको वैश्विक पहचान दिला सकता है।
इसके साथ ही, उन्होंने भारत के कुछ सबसे चर्चित और ऐतिहासिक IPR कानूनी मामलों की भी चर्चा की, जिन्होंने देश में बौद्धिक संपदा के कानून को एक नई दिशा दी। इनमें प्रमुख थे:
- नोवार्टिस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (Novartis vs Union of India): दवाओं के पेटेंट और एवरग्रीनिंग से जुड़ा मामला।
- याहू बनाम आकाश अरोड़ा (Yahoo vs Akash Arora): इंटरनेट डोमेन नाम और ट्रेडमार्क उल्लंघन का मामला।
- बजाज ऑटो बनाम टीवीएस मोटर्स (Bajaj Auto vs TVS Motors): ट्विन-स्पार्क प्लग तकनीक के पेटेंट का विवाद।
- पेप्सिको बनाम गुजरात के किसान (PepsiCo vs Gujarat Farmers): आलू की विशेष किस्म के पौधों की विविधता के संरक्षण से जुड़ा मामला।
इन वास्तविक मामलों की चर्चा से विद्यार्थी यह समझने में सफल रहे कि पेटेंट केवल कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे बहुत बड़ा कानूनी और व्यावसायिक तंत्र काम करता है।



