कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन एक महा-युग के अंत और नई शुरुआत के रूप में दर्ज होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के जो रुझान सामने आ रहे हैं, उन्होंने न केवल एग्जिट पोल्स को सही साबित किया है, बल्कि राज्य की राजनीतिक तासीर को ही बदल कर रख दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बंगाल में ‘शून्य से शिखर’ तक का सफर तय करते हुए प्रचंड बहुमत के जादुई आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है।

​ऐतिहासिक बहुमत: 190 के पार पहुंची भाजपा, टीएमसी को भारी नुकसान

​ताज़ा रुझानों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से भाजपा 190 से 195 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के आंकड़े (148) से कहीं ज्यादा है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) महज 90-95 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। कोलकाता की सड़कों पर जहाँ एक ओर भाजपा समर्थकों का हुजूम ‘जय श्री राम’ और ‘सोनार बांग्ला’ के नारों के साथ जश्न मना रहा है, वहीं टीएमसी खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है।

​भवानीपुर में सांसें अटकाने वाला मुकाबला, उत्तर बंगाल में क्लीन स्वीप

​इस चुनाव का सबसे रोमांचक केंद्र भवानीपुर बना हुआ है, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला अब निर्णायक मोड़ पर है। जैसे-जैसे राउंड की गिनती बढ़ रही है, फासला कम होता जा रहा है। वहीं, उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और मेदिनीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर भाजपा ने पहले ही जीत दर्ज कर ली है। मेदिनीपुर में भाजपा के शंकर कुमार गुछैत ने 38,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की है, जो राज्य में भाजपा की गहरी पकड़ को दर्शाता है।

​असम में ‘हैट्रिक’: हिमंत बिस्वा सरमा का जादू बरकरार

​असम से भी भाजपा के लिए बड़ी खुशखबरी है। वहां पार्टी 126 में से 80 से ज्यादा सीटों पर बढ़त के साथ सत्ता की ‘हैट्रिक’ लगाने की ओर बढ़ रही है। सबसे चौंकाने वाला परिणाम जोरहाट से आया है, जहाँ कांग्रेस के कद्दावर नेता और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने हरा दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जालुकबारी सीट पर भारी अंतर से आगे चल रहे हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि पूर्वोत्तर में भाजपा का किला और भी मजबूत हो गया है।

​कश्मीर से अयोध्या तक खुशी की लहर: राष्ट्रव्यापी जश्न

​भाजपा की इस ऐतिहासिक सफलता का असर देश के अन्य हिस्सों में भी स्पष्ट देखा जा रहा है:

  • जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटी और इसे “राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत” करार दिया।
  • अयोध्या: धार्मिक नगरी में संतों और भक्तों ने विशेष दीपोत्सव जैसा माहौल बना दिया है।
  • दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में उत्सव की तैयारियां चरम पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 6:30 बजे यहां पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और जीत का नया विजन साझा करेंगे।

​क्यों हारी टीएमसी? राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बंगाल की महिलाओं ने भाजपा के ‘कल्याणकारी योजनाओं’ (Welfare Schemes) और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े रुख पर भरोसा जताया है। भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए वादों, विशेषकर महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता, ने गेम-चेंजर की भूमिका निभाई है। 15 साल के लंबे शासन के बाद जनता के बीच ‘एंटी-इंकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) इतनी प्रभावी थी कि टीएमसी के कई कद्दावर मंत्री अपनी सीट बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

निष्कर्ष

​4 मई 2026 का यह परिणाम भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक बड़े उलटफेर के रूप में याद रखा जाएगा। बंगाल में भाजपा की यह जीत साबित करती है कि विकास और राष्ट्रवाद का एजेंडा अब पूर्वी भारत के सबसे मजबूत गढ़ में भी स्थापित हो चुका है। अब सबकी नजरें शाम को होने वाले प्रधानमंत्री के संबोधन पर हैं, जहाँ से 2026 के बाद की भारतीय राजनीति की नई पटकथा लिखी जाएगी।