आगरा। कहते हैं कि शिक्षा की जड़ें जहाँ से जुड़ी हों, वह स्थान जीवन भर दिल के करीब रहता है। कुछ ऐसा ही नजारा ताजनगरी के पश्चिमपुरी स्थित शिव पैलेस में देखने को मिला, जहाँ इलाहाबाद विश्वविद्यालय पूर्व छात्र परिषद (पंजीकृत), आगरा इकाई की वार्षिक सामान्य सभा का भव्य आयोजन किया गया। यह केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यादों के गलियारों में फिर से टहलने और ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ कहे जाने वाले विश्वविद्यालय की विरासत को सहेजने का एक भावुक अवसर था।

​यादों का कारवां: जब अपनों ने साझा किए छात्र जीवन के किस्से

​कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. एस. एम. मिश्रा ने की, जबकि मंच संचालन आगरा कॉलेज के प्रो. शशिकांत पांडेय ने अपनी चिर-परिचित शैली में किया। कार्यक्रम का आगाज एक परिचय सत्र से हुआ, जिसने माहौल को पूरी तरह से अनौपचारिक और आत्मीय बना दिया।

​उपस्थित पूर्व छात्रों ने जब अपने छात्र जीवन, हॉस्टल की रातों और आनंद भवन की गलियों के किस्से साझा किए, तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। इस मौके पर पूर्व छात्रों के साथ आए उनके परिजनों ने भी अपने विचार रखे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जुड़ाव केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का भावनात्मक बंधन है।

​नई कार्यकारिणी का गठन: डॉ. यदुवीर सिंह चौहान को मिली कमान

​सभा के औपचारिक सत्र में संगठन की मजबूती और भविष्य की रूपरेखा पर चर्चा हुई। निवर्तमान महासचिव प्रो. संतोष कुमार सिंह ने बीते वर्ष की गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, वहीं कोषाध्यक्ष डॉ. बलराम कांत ने पारदर्शी तरीके से संस्था का वित्तीय विवरण रखा।

IMG 20260330 WA0005

​इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई, जिसका कुशल निर्देशन वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञानेश चतुर्वेदी और प्रो. लव कुश मिश्रा ने किया। सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का चुनाव किया गया, जिसमें आर.बी.एस. कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. यदुवीर सिंह चौहान को अध्यक्ष चुना गया।

​नवनिर्वाचित पदाधिकारियों की सूची:

  • अध्यक्ष: डॉ. यदुवीर सिंह चौहान
  • उपाध्यक्ष: प्रो. शशिकांत पांडेय
  • महासचिव: सी. पी. गुप्ता
  • कोषाध्यक्ष: डॉ. बलराम कांत
  • संयुक्त सचिव: मनोज कुमार दिवाकर
  • सांस्कृतिक सचिव: प्रो. उमाकांत चौबे
  • मीडिया सचिव: डॉ. डी. एन. राय
  • खेल सचिव: डॉ. अनूप सिंह

​संस्था के मार्गदर्शन के लिए एक सशक्त संरक्षक मंडल भी बनाया गया है, जिसमें श्री गोपाल कुलश्रेष्ठ, श्री ज्ञानेश चतुर्वेदी, श्री हरिओम सिंह, प्रो. एस. एम. मिश्रा एवं प्रो. शुभी माथुर जैसे दिग्गज शामिल हैं।

​”जितनी शाखाएँ, उतने वृक्ष”: भविष्य का संकल्प

​नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. यदुवीर सिंह चौहान ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के ध्येय वाक्य “Quot Rami Tot Arbores” (जितनी शाखाएँ, उतने वृक्ष) का उल्लेख करते हुए कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल मिलना-जुलना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले समय में परिषद शैक्षिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक विस्तार देगी, ताकि नई पीढ़ी को भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा से जोड़ा जा सके।

​सुरमयी शाम: जब गीतों में ढलीं यादें

​बैठक के बाद आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। संगीत का ऐसा समां बंधा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। आगरा कॉलेज की सेवानिवृत्त प्राध्यापिका प्रो. शुभी माथुर के मधुर गीतों ने शाम को खास बना दिया। वहीं, एआरटीओ श्री एस. के. मिश्रा और सेवानिवृत्त जिला जज श्री गोपाल कुलश्रेष्ठ ने अपनी गायन प्रस्तुति से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।

​विशेष आकर्षण नवनिर्वाचित महासचिव श्री सी. पी. गुप्ता और उनकी धर्मपत्नी द्वारा प्रस्तुत युगल गीत रहा, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। प्रो. शशिकांत पांडेय, श्री हरिओम सिंह और श्री डी. सी. मिश्रा ने भी अपनी सहधर्मिणियों के साथ प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को पारिवारिक उत्सव जैसा रूप दे दिया।

​गणमान्य जनों की उपस्थिति

​इस गरिमामय कार्यक्रम में डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. बृजेंद्र मिश्रा, डॉ. नागेंद्र मिश्रा, डॉ. गौरव सिंह, अधिवक्ता अरविंद सोनी, लालजी यादव, अनिल सत्संगी और डॉ. शालिनी मिश्रा सहित आगरा के कई प्रतिष्ठित पूर्व छात्र मौजूद रहे। अंत में, सभी ने एक साथ रात्रि भोज का आनंद लिया और पुरानी यादों को ताजा करते हुए विदा ली।

पाठकों के लिए प्रश्न:

क्या आप भी किसी ऐसे शिक्षण संस्थान से जुड़े हैं जिसकी यादें आज भी आपके चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं? कमेंट बॉक्स में अपने कॉलेज के दिनों का सबसे यादगार किस्सा हमारे साथ साझा करें!