आगरा। भारतीय संस्कृति की जड़ें इसकी परंपराओं और त्योहारों में निहित हैं। इसी गौरवशाली विरासत को संजोते हुए, क्षत्रिय सभा (शाखा: आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा-बोदला) द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ‘नव संवत्सर 2083’ यानी भारतीय नव वर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। सिकंदरा-बोदला क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की झलक दिखी, बल्कि समाज की ज्वलंत समस्याओं और युवाओं की उपलब्धियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

​कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद भर से आए क्षत्रिय बंधुओं के पारंपरिक स्वागत से हुआ, जहाँ सभी का साफा बांधकर सम्मान किया गया। यह दृश्य क्षत्रिय समाज की एकजुटता और ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा का जीवंत उदाहरण रहा।

​प्रतिभाओं का सम्मान: राजवर्धन और दिव्यांशी बने समाज का गौरव

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​समाज की उन्नति का पैमाना उसके युवाओं की सफलता होती है। इस अवसर पर क्षत्रिय सभा ने दो उभरते सितारों को सम्मानित किया। एनडीए (NDA) में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित होकर देश सेवा का संकल्प लेने वाले राजवर्धन सिंह भदौरिया को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। वहीं, खेल जगत में अपनी धाक जमाने वाली दिव्यांशी राठौर का प्रदेश स्तरीय क्रिकेट टीम में चयन होने पर भव्य स्वागत किया गया। इन दोनों युवाओं की उपलब्धि ने कार्यक्रम में मौजूद हर व्यक्ति को गौरवान्वित किया।

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​यूजीसी कानून पर गहरा रोष: शिक्षाविदों ने उठाई आवाज

​समारोह के दौरान जहाँ एक ओर उत्सव का माहौल था, वहीं दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों को लेकर चिंता भी व्यक्त की गई। फुपुक्टा के अध्यक्ष प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह चौहान ने समाज को संगठित होने की बधाई तो दी, लेकिन साथ ही यूजीसी (UGC) के नए कानूनों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने इसे शिक्षा के ढांचे के लिए नुकसानदेह बताते हुए पुरजोर विरोध दर्ज कराया।

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​पूर्व जिला अध्यक्ष भंवर सिंह चौहान ने भी प्रोफेसर चौहान की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि नव संवत्सर हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने की प्रेरणा देता है, और ऐसे समय में हमारी शिक्षा व्यवस्था को बाधित करने वाले कानून स्वीकार्य नहीं हैं। सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर आर.के. सिंह राघव ने भी इस कानून को समाज के हितों के विपरीत बताया।

​बेटियों की शिक्षा ही भविष्य का आधार: डॉ. मंजू भदौरिया

​मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने अपने संबोधन में सनातन धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए एक भावुक और प्रभावी अपील की। डॉ. भदौरिया ने कहा, “भले ही आप एक समय का भोजन कम करें, लेकिन अपनी बेटियों को शिक्षित जरूर करें।” उन्होंने बेटियों की शिक्षा को समाज की पहली प्राथमिकता बताया। साथ ही, उन्होंने यूजीसी के मुद्दे पर समाज के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया और सभी को हिंदू नव वर्ष की मंगलकामनाएं दीं।

​सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार और रोजगार की बात

​कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञ मंगल सिंह तोमर ने बेरोजगारी के मुद्दे पर विचार रखे और कृषि क्षेत्र के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का आह्वान किया। वहीं, कुंवर दिनेश प्रताप सिंह (पीली कोठी) ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि समारोह के निमंत्रण पत्रों पर देवी-देवताओं के चित्र नहीं छापने चाहिए, क्योंकि बाद में ये पत्र नालियों और कूड़े में मिलते हैं, जिससे हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। उनकी इस अपील को समाज ने काफी सराहा।

​एकजुटता का संदेश और समापन

​समारोह में रिटायर चीफ इंजीनियर आर.के. सिंह राघव ने सभी हिंदुओं से अपने घरों पर ‘भगवा ध्वज’ फहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, लेकिन समाज का हित हमेशा सर्वोपरि रहना चाहिए।

​इस अवसर पर जवाहर सिंह जादौन, डॉ. वी.पी. सिंह, गजेंद्र परमार (अध्यक्ष, शाखा दयालबाग), कपूर सिंह सिकरवार, कल्पना सिंह धाकरे, डॉ. विजेंद्र सिंह चौहान, मुनेन्द्र सिंह जादौन, पूनम राघव (महिला शाखा अध्यक्ष, राजपुर चुंगी), आर.पी. सिंह जादौन, डॉ. रामलखन सिंह राठौर, ‘बुलेट अड्डा’ के संचालक मनोज जादौन, सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

​कार्यक्रम का समापन शाखा अध्यक्ष विजेंद्र पाल सिंह राना एवं डॉ केपी सिंह की अध्यक्षता में सभी को धन्यवाद देते हुए भव्य प्रीतिभोज एवं फलाहार के साथ संपन्न हुआ। समस्त कार्यकारिणी सदस्यों ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दिया।

निष्कर्ष

​क्षत्रिय सभा का यह आयोजन केवल एक कैलेंडर बदलने का उत्सव नहीं था, बल्कि यह सामाजिक चिंतन, युवाओं के सम्मान और अपनी परंपराओं के प्रति अडिग रहने का संकल्प था। बेटियों की शिक्षा से लेकर यूजीसी जैसे नीतिगत मुद्दों पर समाज की मुखर आवाज यह दर्शाती है कि क्षत्रिय समाज भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।

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