
नई दिल्ली/मुंबई/लख़नऊ
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बादलों का सीधा असर अब भारत की रसोई और अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंका के बीच, भारत के कई प्रमुख शहरों में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत (LPG cylinder shortage in India) की खबरें सामने आ रही हैं। खासकर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री सकते में है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए, केंद्र सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। जमाखोरी को रोकने और घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम (EC Act) के तहत एलपीजी पर ‘एस्मा’ (ESMA – Essential Services Maintenance Act) कानून लागू कर दिया है। सरकार का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और घरेलू गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन जमीनी हकीकत चिंता पैदा कर रही है।
आइए जानते हैं कि देश के किन शहरों में संकट सबसे ज्यादा है और सरकार के इस कड़े फैसले का क्या असर होगा।
लख़नऊ, मुंबई से बेंगलुरु तक कमर्शियल LPG की हाहाकार, रेस्टोरेंट मालिकों ने दी चेतावनी
ईरान-इजरायल जंग के कारण पैदा हुई अनिश्चितता ने देश के महानगरों को सबसे पहले अपनी चपेट में लिया है। खबरों के अनुसार, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में कमर्शियल एलपीजी गैस (19 किलोग्राम वाले सिलेंडर) की सप्लाई बाधित हुई है।
रेस्टोरेंट और कैटरिंग इंडस्ट्री, जो पूरी तरह से कमर्शियल सिलेंडरों पर निर्भर है, सबसे ज्यादा प्रभावित बताई जा रही है। फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FHRAI) से जुड़े सूत्रों और स्थानीय एसोसिएशनों ने चिंता जताई है कि अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो उन्हें कामकाज बंद करना पड़ सकता है या खाने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करनी पड़ेगी।
जयपुर के एक प्रमुख रेस्टोरेंट मालिक ने बताया, “हमें पिछले दो दिनों से सिलेंडर की डिलीवरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। डीलर कह रहे हैं कि पीछे से ही सप्लाई कम है। अगर यह एक-दो दिन और चला, तो हमें मेनू में बदलाव करना पड़ेगा।” यही हाल मुंबई और बेंगलुरु के होटल व्यवसाइयों का है, जहाँ बुकिंग और वेटिंग टाइम काफी बढ़ गया है।
सरकार ने उठाया बड़ा कदम: एलपीजी पर ESMA (एस्मा) लागू
बढ़ते संकट और बाजार में पैदा हुई घबराहट (Panic) को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सरकार ने तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे एलपीजी का उत्पादन अधिकतम स्तर पर करें।
जमाखोरी (Black marketing) और कालाबाजारी को रोकने के लिए, सरकार ने देश में एस्मा (ESMA – Essential Services Maintenance Act) कानून लागू कर दिया है। यह एक आपातकालीन कानून है, जो सरकार को यह शक्ति देता है कि वह किसी भी आवश्यक सेवा को बाधित होने से रोक सके। एलपीजी पर एस्मा लगने का मतलब है कि अब गैस की सप्लाई, ट्रांसपोर्टेशन या वितरण में लगे कर्मचारी या एजेंसियां हड़ताल नहीं कर सकतीं और न ही सप्लाई को कृत्रिम रूप से रोक सकती हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमने सभी राज्यों के साथ बैठक की है। यह साफ किया गया है कि हमारी पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता (Domestic consumers) हैं। देश में डोमेस्टिक एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।”
घरेलू ग्राहकों के लिए क्या बदला? बुकिंग नियमों में सख्ती
यद्यपि सरकार कह रही है कि घरेलू गैस की कमी नहीं है, लेकिन सावधानी के तौर पर घरेलू सिलेंडर की बुकिंग नियमों में बदलाव (LPG booking rule changes) किए गए हैं। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोग डर के मारे एक्स्ट्रा सिलेंडर न भरवाएं और ‘पैनिक बाइंग’ (Panic buying) न करें।
कई शहरों में तेल कंपनियों ने एक सिलेंडर की डिलीवरी और अगली बुकिंग के बीच की समय अवधि (Refill gap) को बढ़ा दिया है। उदाहरण के लिए, अब आप एक निश्चित दिनों के अंतराल के बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कर पाएंगे। इसका सीधा असर जमाखोरी को रोकना है, ताकि सप्लाई चैन पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
‘एस्मा’ (ESMA) क्या है और इसे क्यों लागू किया गया?
पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एस्मा (ESMA) क्या होता है? ‘आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम’ एक ऐसा कानून है जिसका उपयोग सरकारें तब करती हैं जब उन्हें लगता है कि किसी आवश्यक सेवा (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य, परिवहन, और अब LPG) के रुकने से आम जनता का जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है।
एलपीजी पर एस्मा लागू करके सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि:
- उत्पादन न रुके: तेल रिफाइनरियां LPG उत्पादन को अधिकतम करें।
- आपूर्ति बाधित न हो: गैस वितरक या ट्रांसपोर्टर मनमानी न करें।
- जमाखोरी पर लगाम: कोई भी एजेंसी या व्यक्ति सिलेंडरों का अवैध स्टॉक न कर पाए।
संकट पर सियासत: केजरीवाल और विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा
जैसे-जैसे देश में गैस का संकट बढ़ा है, इस पर राजनीति भी तेज हो गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि “सरकार मिडिल ईस्ट संकट का हवाला देकर अपनी विफलताओं को छिपा रही है। क्या सरकार को पहले से तैयारी नहीं करनी चाहिए थी? आज आम आदमी महंगाई और अब गैस की किल्लत से परेशान है।”
वहीं, शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “कमर्शियल गैस गायब है, घरेलू गैस पर एस्मा लग रहा है। यह सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है। क्या देश को फिर से लकड़ियों पर खाना पकाने के दिन देखने पड़ेंगे?” विपक्ष के इन हमलों से दबाव बढ़ा है, जिसके बाद सरकार ने स्पष्टीकरण जारी किया कि घरेलू सप्लाई पर कोई खतरा नहीं है।
निष्कर्ष: क्या आगे और बढ़ेंगी मुश्किलें?
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War) ने वैश्विक ईंधन बाजार को अस्थिर कर दिया है। चूँकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का असर पड़ना स्वाभाविक है।
फिलहाल, सरकार ने ‘एस्मा’ लगाकर और रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। कमर्शियल गैस की किल्लत वास्तविक है और इसका असर होटल-रेस्टोरेंट के बिलों पर दिख सकता है। हालाँकि, घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें संयमित रूप से बुकिंग करनी होगी। हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है, और सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि मिडिल ईस्ट में तनाव कितने समय तक चलता है।
पाठकों से एक सवाल (Engagement):
क्या आपके शहर में भी domestic या commercial LPG सिलेंडर की बुकिंग या डिलीवरी में देरी हो रही है? हमें कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव जरूर बताएं।



